आचार्य चाणक्य
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जो आत्मिक रूप से संतुष्ट हो
कहते हैं कि मन की शांति से बड़ा कोई सुख नहीं होता है। जिसका मन किसी भी कार्य को लेकर संतुष्ट नहीं होता है वह हमेशा दुखी होता रहता है और जिस व्यक्ति के पास आत्म संतुष्टि है उसके लिए धरती पर ही स्वर्ग के समान सुख है।