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चाणक्य नीति: ये होता है सबसे अच्छा मित्र, सबसे बड़ा शत्रु और सबसे बड़ा धन

Sat, 29 May 2021 08:04 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। ये अर्थशास्त्र के ज्ञाता थे। इनके द्वारा अर्थशास्त्र नामक ग्रंथ और राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति जैसे महान ग्रंथ लिखे गए। ये कौटिल्य या विष्णुगुप्त नाम से भी विख्यात हैं। आज भी इनकी गिनती भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। इन्होंने अपनी नीतियों और कुशाग्र बुद्धि का प्रयोग करते हुए नंदवंश का नाश किया और एक साधारण बालक से चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। इन्होंने तक्षशिला विश्वविद्यालय में आचार्य के पद पर रहते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की। इनके द्वारा लिखे गए नीति शास्त्र की बातें मनुष्य के जीवन को बहुत ही करीब से स्पर्श करती हैं। यही कारण है कि नीति शास्त्र की नीतियां आज के समय में भी लोकप्रिय हैं। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में रिश्तों, धन, व्यापार आदि को लेकर महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। जानते हैं कौन है मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र, सबसे बड़ा शत्रु और सबसे बड़ा धन।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
सबसे अच्छा मित्र
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सबसे अच्छा मित्र वही है जो विकट परिस्थितियों में आपका साथ दे और अचानक विपत्ति आने पर भी आपको अकेला न छोड़े। बुरे समय में ही एक अच्छे मित्र की पहचान होती है। सही मायने में वही आपका मित्र होता है जो आपको सही और गलत की पहचान करवाता है।
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Chanakya Success Mantra - फोटो : social media
सबसे बड़ा धन
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विपत्ति के समय में धन व्यक्ति को उससे निकलने में सहायता करता है लेकिन धन भी न होने पर भी ज्ञान ही व्यक्ति के काम आता है। कभी-कभी जब धन भी किसी काम का नहीं रह जाता है तब उस परिस्थिति में व्यक्ति केवल अपने ज्ञान से ही विजय प्राप्त कर सकता है, इसलिए ज्ञान रुपी धन को सदैव अर्जित करते रहना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
सबसे बड़ा शत्रु
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु भूख होती है। जब व्यक्ति का पेट खाली होता है तो उस परिस्थिति में व्यक्ति कुछ भी करने को तैयार हो जाता है इसलिए चाणक्य ने भूख को व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु बताया है।
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