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श्री कृष्ण ने कहा है, इसलिए राधा का नाम पहले लेना चाहिए

Sun, 11 Sep 2016 09:16 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
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राध्‍ााकृष्‍ण
आपने देखा और सुना होगा क‌ि अक्सर लोग कृष्‍ण राधा की बजाय राधा कृष्‍ण का नाम लेते हैं, यानी कृष्‍ण से पहले राधा का नाम ल‌िया जाता है। इसके पीछे एक बड़ा रहस्य छुपा हुआ ज‌िसका ज‌िक्र स्वयं भगवान श्री कृष्‍ण ने क‌िया है। श्री कृष्‍ण कहते हैं क‌ि जो व्यक्ति राधा का नाम नहीं लेता है सिर्फ कृष्ण-कृष्ण रटता रहता है वह उसी प्रकार अपना समय नष्ट करता है जैसे कोई रेत पर बैठकर मछली पकड़ने का प्रयास करता है।
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श्री कृष्‍ण ने कहा है, इसल‌िए कृष्‍ण से पहले राधा का नाम लेना चाह‌िए

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जनमाष्टमी
श्रीमद् देवीभाग्वत् नामक ग्रंथ में उल्लेख मिलता है कि जो भक्त राधा का नाम लेता है भगवान श्री कृष्ण सिर्फ उसी की पुकार सुनते हैं। इसलिए कृष्ण को पुकारना है तो राधा को पहले बुलाओ। जहां श्री भगवती राधा होंगी वहां श्रीकृष्ण खुद ही चले आएंगे।
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श्री कृष्‍ण ने कहा है, इसल‌िए कृष्‍ण से पहले राधा का नाम लेना चाह‌िए

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कृष्‍ण
पुराणों के अनुसार भगवान कृष्ण स्वयं कहते हैं कि राधा उनकी आत्मा है। वह राधा में और राधा उनमें बसती है। कृष्ण को पसंद है कि लोग भले ही उनका नाम नहीं लें लेकिन राधा का नाम जपते रहें। इस नाम को सुनकर भगवान श्री कृष्ण अति प्रसन्न हो जाते हैं। इसका उल्लेख श्री कृष्ण जी ने नारद से किया है। इस संदर्भ में कथा है कि व्यास मुनि के पुत्र शुकदेव जी तोता बनकर राधा जी के महल में रहने लगे।

श्री कृष्‍ण ने कहा है, इसल‌िए कृष्‍ण से पहले राधा का नाम लेना चाह‌िए

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jai rade - फोटो : अमर उजाला
शुकदेव जी हमेशा राधा-राधा रटा करते थे। एक दिन राधा ने शुकदेव जी से कहा कि अब से तुम सिर्फ कृष्ण-कृष्ण नाम जपा करो। शुकदेव जी ऐसा ही करने लगे। इन्हें देखकर दूसरे तोता भी कृष्ण-कृष्ण बोलने लगे। राधा की सखी सहेलियों पर भी कृष्ण नाम का असर होने लगा। पूरा नगर कृष्णमय हो गया, कोई राधा का नाम नहीं लेता था। एक दिन कृष्ण उदास भाव से राधा से मिलने जा रहे थे।
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श्री कृष्‍ण ने कहा है, इसल‌िए कृष्‍ण से पहले राधा का नाम लेना चाह‌िए

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कृष्‍ण
रास्ते में नारद जी म‌िले और श्री कृष्ण के उदास चेहरे को देखकर पूछा कि प्रभु आप उदास क्यों हैं। श्री कृष्ण कहने लगे कि राधा ने सभी को कृष्ण नाम रटना सिखा दिया है। कोई राधा नहीं कहता, जबकि मुझे राधा नाम सुनकर प्रसन्नता होती है। जब राधा ने यह बात सुनी तो उनकी आंखों भर आई।
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श्री कृष्‍ण ने कहा है, इसल‌िए कृष्‍ण से पहले राधा का नाम लेना चाह‌िए

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राध्‍ााकृष्‍ण
देवी राधा ने शुकदेव जी से कहा कि अब से आप राधा-राधा ही जपा कीजिए। उस समय से ही राधा का नाम पहले आता है फिर कृष्ण का। राधा कृष्ण की तरह सीता का नाम भी राम से पहले लिया जाता है। असल में राम और कृष्ण दोनों ही एक हैं और राधा एवं सीता भी एक हैं। यह हमेशा नित्य और शाश्वत हैं।
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