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Shani Jayanti 2020: कब-कब लगता है शनि दोष, जानिए असर कम करने के उपाय

Fri, 22 May 2020 03:12 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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शनि का महाउपाय
शनि का नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूटने लगते हैं। शनि को क्रूर ग्रह माना गया है, लेकिन शनि न्यायप्रिय देवता है। अच्छे कर्म करने वालों को शनि अच्छा परिणाम और बुरे कर्म करने वालों को बुरा फल देते हैं। ऐसे में कई बार जाने अनजाने में व्यक्ति कुछ गलतियां कर बैठता है जिससे शनि की तिरक्षी नजर पड़ जाती है और व्यक्ति शनि दोष से ग्रसित हो जाता है। शनि दोष से ग्रसित होने पर व्यक्ति के परेशानियों के दिन शुरू हो जाते हैं। आज हम आपको शनि दोष से जुड़े कुछ तथ्य के बारे में बताएंगे।
शनि जयंती के शुभ अवसर पर कोकिलावन शनि धाम में चढ़ाएं 11 किलों तेल और पाएं अष्टम शनि ,शनि की ढैय्या एवं साढ़े - साती के प्रकोप से छुटकारा
 
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शनि दोष किसे कहते हैं।
शनि बहुत ही धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। जब किसी जातक की कुंडली में शनि अशुभ भाव में आकर बैठ जाते हैं तो शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या आरंभ हो जाती है। इसमें जातकों को कई तरह के कष्ट भोगने पड़ते हैं। इसे ही शनि दोष कहते है।
22 मई को शनि जयंती, उससे पहले जानें कहीं शनि आपकी राशि के लिए घातक तो नहीं !
 
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कब-कब लगता है शनि दोष
कई स्थितियों में किसी जातक के ऊपर शनि दोष चढ़ता है।
- शनि जब मेष राशि होता है तो उसे नीच का माना जाता है।
- जब शनि शत्रु राशि को हो जाता है तब भी शनि दोष पैदा हो जाता है। ऐसे में जातक को शनि परेशान करते हैं।
- शनि सूर्य और चंद्रमा के साथ युति बनाने पर शनि दोष पैदा होता है।
 

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क्या है शनि साढ़ेसाती
ज्योतिष गणना के अनुसार चंद्र राशि से जब शनि 12वें भाव, पहले भाव व द्वितीय भाव में रहता तो उस अवधि को शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। 

 
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शनि मंदिर
शनि की ढैय्या
जब गोचर में जन्म राशि से चतुर्थ और अष्टम भाव में रहता है तब इसे शनि की ढैय्या कहते हैं। शनि की ढय्या एक राशि पर साढ़े सात साल और दूसरी पर लगभग 16 साल में आती है।
 
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शनि देव - फोटो : अमर उजाला
शनि दोष से बचने के उपाय
- शनि के दोष से बचने या उसका प्रभाव कम करने के लिए शनिदे पूजा करनी चाहिए और तेल और उड़द का दान करना चाहिए।
- शनि दोष से बचने के लिए हनुमान जी उपासना करनी चाहिए। शनि हनुमान भक्तों को कभी भी परेशान नहीं करते हैं।
- शनि मंत्र के जाप से भी शनि दोष कम होता है।
- शनि दोषों से मुक्ति के लिए शनिवार, शनि अमावस्या और शनि जयंती के अवसर पर उनकी विशेष पूजा करनी चाहिए।
 
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