रावण संहिता में रावण ने कहा है कि जो व्यक्ति अपनी स्तुति करता है या फिर दूसरों से अपनी प्रशंसा सुनने का आदी हो जाता है उसे सफलता नहीं मिलती है। वहीं जो व्यक्ति किसी विषम परिस्थिति में अपने गुरु को छोड़ देता है वह शापित हो जाता है, उसका कभी कल्याण नहीं होता है। जो व्यक्ति दूसरों की संपत्ति या समृद्धि देखकर जलता है वह व्यक्ति इस दुनिया में एक गरीब के बराबर माना जाता है और अगले जन्म में उसे संकट का सामना करता है।