भगवान श्रीगणेश विघ्न विनाशक हैं मंगलकारी हैं। जहां श्रीगणेश का नित पूजन-अर्चन होता है, वहां रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का वास होता है। वे विनायक हैं और जीवन में सुख,सफलता और समृद्धि की राह दिखाते हैं। वेदों में उनकी वंदना 'नमो गणेभ्यो गणपति'के उच्चारण से की गई है। वास्तु विज्ञान में सभी देवों में प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है एवं गजानन भवन के वास्तु दोषों को दूर करते हैं।
सुख-समृद्धि देंगे ऐसे गणेश
सर्वमंगल एवं बल-शक्ति की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी या लाल रंग के गणेशजी की आराधना अनुकूल रहती है,घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। सुख, शांति, समृद्धि की चाह रखने वालों को सफेद रंग के विनायक की मूर्ति लाना चाहिए। साथ ही घर में इनका एक स्थाई चित्र भी लगाना चाहिए। घर में पूजा के लिए गणेश जी की शयन या बैठी मुद्रा हो तो अधिक शुभ होती है। यदि कला या अन्य शिक्षा के प्रयोजन से पूजन करना हो तो नृत्य गणेश की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन लाभकारी है। ईशान कोण और पूर्व दिशा में सुखकर्ता की मूर्ति या चित्र लगाना शुभ रहता है वास्तुदोष दूर होते हैं।