बिल्वपत्र के वृक्ष को श्रीवृक्ष भी कहा गया है। मान्यता है कि इसकी जड़ों में महादेव का वास है। तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी हों, तो उसे त्रिदेव का रूप मानते हैं। किंवदंती है कि एक बार पार्वती ने अपनी उंगलियों से अपने ललाट पर आया पसीना पोछकर फेंक दिया। उनके पसीने की कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं। उसी से बेलवृक्ष उत्पन्न हुआ। इसके ज्यादातर पेड़ों को मंदिरों के आसपास ही लगाया जाता है।