फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shardiya navratri 2024: दूसरे दिन की जाएगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, इन चीजों के भोग से करें माता को प्रसन्न

Fri, 04 Oct 2024 06:54 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
मां ब्रह्मचारिणी का भोग - फोटो : अमर उजाला
Shardiya navratri 2024 2nd Day Maa Brahmacharini Bhog: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा को समर्पित होता है। इन नौं दिनों को माता रानी की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान दुर्गा मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित किया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो लोग मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उनमें वैराग्य, तप, संयम, सदाचार की वृद्धि होती है। साथ ही उस व्यक्ति का मन कठिन से कठिन परिस्थिति में भी डगमगाता नहीं है। माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों के दुर्गुणों, मलिनता और दोषों को दूर करती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के दूसरे दिन क्या भोज लगाना चाहिए। साथ ही जानेंगे पूजा का शुभ मुहूर्त...

Navratri 2024: आदिशक्ति की आराधना का पर्व प्रारंभ, सुख-समृद्धि के लिए नवरात्रि पर जरूर करें दुर्गा पाठ
विज्ञापन

2 of 5
Shardiya Navratri 2024 - फोटो : freepik
हिंदू पंचाग के अनुसार, नवरात्रि में द्वितीया तिथि की शुरुआत 4 अक्टूबर को तड़के 02:58 बजे हो जाएगी और इसका समापन 5 अक्टूबर की सुबह 05:30 बजे होगा।

Shardiya Navratri 2024: कौन हैं मां शैलपुत्री? देवी को प्रसन्न करने के लिए पान के पत्ते से करें ये खास उपाय
विज्ञापन

3 of 5
Sweets - फोटो : Freepik
मां ब्रह्मचारिणी का भोग?
मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए आप भोग में चीनी या गुड़ अर्पित कर सकते हैं। इसे बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति को लंबी उम्र का वरदान प्राप्त होता है। इसके अलावा आप गुड़ या चीनी से बनी मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं।

Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि में करें दुर्गा चालीसा का पाठ, जान लें सही नियम

4 of 5
navratri - फोटो : freepik
कैसे पड़ा माता ब्रह्मचारिणी का नाम?
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, मां दुर्गा का जन्म पर्वतराज के यहां माता पार्वती के रूप में हुआ था। देवर्षि नारद के कहने पर ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की और हजारों वर्षों के कठोर तप के कारण ही इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ गया। माता पार्वती ने कठिन तप के दौरान कई वर्षों तक निराहार रहकर अत्यन्त कठोर तप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
नवरात्रि माता दूसरा स्वरूप - फोटो : Amar Ujala
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।

Dhanteras 2024: 29 या 30 अक्तूबर कब है धनतेरस ? जानें सही तिथि और पूजा मुहूर्त


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें