फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sawan 2024: कब है सावन का पहला सोमवार, जानिए पूजा विधि आरती और मंत्र

Wed, 19 Jun 2024 04:53 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sawan 2024: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन का महीना सबसे शुभ माना जाता है। इस माह के सभी दिनों में विधि पूर्वक महादेव की पूजा करने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
विज्ञापन
1 of 6
Sawan 2024 - फोटो : Sawan 2024
Sawan 2024: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन का महीना सबसे शुभ माना जाता है। इस माह के सभी दिनों में विधि पूर्वक महादेव की पूजा करने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को यह माह अधिक प्रिय है। इस दौरान उनका जलाभिषेक करने से व्यक्ति के कष्टों में भी कमी आती है। इस साल श्रावण मास 22 जुलाई 2024 से शुरू होने वाला है, और इसका समापन 19 अगस्त 2024 के दिन होगा। हम सभी जानते हैं कि सप्ताह के सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा को समर्पित होता है। ऐसे में सावन माह के सोमवार का महत्व अधिक बढ़ जाता है। 

सावन के सोमवार में भोलेनाथ की पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। इस दौरान सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख के लिए उपवास रखती हैं। इसके अलावा अविवाहित महिलाएं अच्छे वर की कामना के लिए ये व्रत रखती है। कहते हैं कि जिन भक्तों पर शिव जी की कृपा होती है, उनके जीवन में हमेशा शांति बनी रहती है। यही नहीं बिगड़े काम भी बनने लगते है। ऐसे में आप सावन के पहले सोमवार पर व्रत रखकर उनकी विशेष कृपा पा सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस बार सावन का पहला सोमवार व्रत कब रखा जाएगा है।
विज्ञापन

2 of 6
Sawan 2024 - फोटो : freepik
कब है सावन का पहला सोमवार ?
इस साल सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई 2024 को रखा जाएगा। इसके अलावा दूसरा सोमवार व्रत 29 जुलाई, तीसरा 5 अगस्त, चौथा 12 अगस्त और पांचवां सोमवार व्रत 19 अगस्त 2024 के दिन रखा जाएगा।
विज्ञापन

3 of 6
Sawan 2024 - फोटो : free pic
सावन व्रत और पूजा-विधि
सावन के पूरे महीने में पूजा करने से भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। ऐसे में सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर शिव जी की पूजा करते हुए शिवलिंग पर गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। इस दौरान भोलेनाथ को बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल और दूध अवश्य चढ़ाएं। इस समय “ओम् नमः शिवाय”मंत्र का जाप करते रहें, इससे पूजा सफल होने की संभावना बढ़ जाती हैं। अंत में शिव जी की आरती करते हुए प्रार्थना करें, और शिव चालीसा का पाठ करें।

4 of 6
Sawan 2024 - फोटो : freepic
शिव जी को बेहद प्रिय हैं ये भोग
सावन के महीने में भगवान शिव को उनके प्रिय भोग लगाने से उनकी कृपा बनी रहती है। इस दौरान आप सूजी के हलवे का भोग लगा सकती है। मान्यता है कि भगवान शिव को ये बहुत प्रिय है। इसके अलावा भगवान शिव को मालपुआ बहुत पसंद है। इसका भोग लगाने से भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं। इस माह आप भोलेनाथ को मखाने की खीर और किसी अन्य मिठाई का भोग भी लगा सकती हैं।
विज्ञापन

5 of 6
Sawan 2024 - फोटो : freepik
शिव जी की आरती 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
Sawan 2024 - फोटो : freepik
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

शिव जी का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।

भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

शिव के प्रिय मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें