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Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में अवश्य लगाएं ये तीन पेड़-पौधे, पूर्वजों का मिलेगा आशीर्वाद

Mon, 01 Sep 2025 10:49 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pitru Paksha 2025: हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृ पक्ष प्रारंभ होते हैं। इनका समापन आश्विन मास की अमावस्या तिथि पर होता है। इस बार 7 सितंबर 2025 को पितृ पक्ष की शुरुआत होगी, जो 21 सितंबर 2025 तक रहेगा।
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Pitru Paksha 2025 - फोटो : अमर उजाला
Pitru Paksha 2025: हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृ पक्ष प्रारंभ होते हैं। इनका समापन आश्विन मास की अमावस्या तिथि पर होता है। इस बार 7 सितंबर 2025 को पितृ पक्ष की शुरुआत होगी, जो 21 सितंबर 2025 तक रहेगा। यह अवधि मुख्य रूप से पूर्वजों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध कर्म के लिए जानी जाती है। मान्यता है कि यदि पितृ पक्ष में पिंडदान, तर्पण, पूजा-पाठ, धूप दान और दान-दक्षिणाएं जैसे पुण्य कार्य किए जाए, तो गृह कलह सहित पितृ दोष से राहत मिलती हैं। इसके अलावा अटके काम पूरे, घर की बरकत और सुख-समृद्धि जैसे शुभ परिणाम मिलते हैं। हालांकि श्राद्ध के समय कुछ खास पेड़-पौधों को जल देने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और वंशों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं पितृ पक्ष में इन तीन पेड़-पौधों को लगाना बेहद शुभ होता है। इसके प्रभाव से घर में सुख-शांति बनी रहती हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है। - फोटो : freepik
पीपल 
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष में इसकी पूजा करने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती हैं। इसके अलावा आप पितृ पक्ष के दौरान पीपल के पेड़ को लगा भी सकते हैं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि भी बनी रहती हैं।
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पितृ पक्ष में बरगद के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ होता है। - फोटो : adobe
बरगद 
पितृ पक्ष में बरगद के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ होता है। मान्यता है यह पेड़ दीर्घायु, अमरता और ब्रह्मा, विष्णु , शिव के त्रिमूर्ति का प्रतीक है। यदि विधि-विधान से इसका पूजन और परिक्रमा की जाए, तो जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। हालांकि, पितृ पक्ष में इसे लगाना भी शुभ होता है। यह घर से सभी तरह के दोष दूर करता है।

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तुलसी हिंदू धर्म के पवित्र पौधे में से एक है, जिसे हर तीज-त्योहार पर पूजा जाता है। - फोटो : freepik
तुलसी
तुलसी हिंदू धर्म के पवित्र पौधे में से एक है, जिसे हर तीज-त्योहार पर पूजा जाता है। इससे देवी लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि पितृपक्ष में तुलसी का पौधा लगाने से सभी मनोकामनाएं पूरी और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती हैं।

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पितृपक्ष 2025 - फोटो : अमर उजाला

पितृपक्ष 2025 की प्रमुख तिथियां 

पितृपक्ष आरंभ
भाद्रपद पूर्णिमा 7 सितंबर 2025, रात 1:41 बजे से शुरू होकर रात 11:38 बजे समाप्त होगी।

पूर्णिमा श्राद्ध-7 सितंबर 2025

  • प्रतिपदा श्राद्ध-8 सितंबर 2025
  • द्वितीया श्राद्ध- 9 सितंबर 2025
  • तृतीया श्राद्ध- 10 सितंबर 2025
  • चतुर्थी श्राद्ध-10 सितंबर 2025
  • पंचमी श्राद्ध और महाभरणी: 12 सितंबर 2025
  • षष्ठी श्राद्ध- 12 सितंबर 2025
  • सप्तमी श्राद्ध- 13 सितंबर 2025
  • अष्टमी श्राद्ध- 14 सितंबर 2025
  • नवमी श्राद्ध-15 सितंबर 2025
  • दशमी श्राद्ध- 16 सितंबर 2025
  • एकादशी श्राद्ध-17 सितंबर 2025
  • द्वादशी श्राद्ध-18 सितंबर 2025
  • त्रयोदशी और माघ श्राद्ध-19 सितंबर 2025
  • चतुर्दशी श्राद्ध-20 सितंबर 2025
  • सर्वपितृ अमावस्या (पितृ विसर्जन)-21 सितंबर 2025
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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