भाद्रपद शुक्ल की अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान अनंत की पूजा का विधान होता है।
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अनंत चतुर्दशी क्यों मनाते हैं ?
छह चतुर्थियों का खास महत्व है- भाद्रपद शुक्ल की अनंत चतुर्दशी, कार्तिक कृष्ण की कृष्ण, रूप या नरक चतुर्दशी, कार्तिक शुक्ल की वैकुण्ठ चतुर्दशी, वैशाख शुक्ल माह की विनायक चतुर्दशी, फाल्गुन मास की चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) और श्रावण मास की चतुर्दशी (शिवरात्रि) का खासा महत्व है।
भाद्रपद शुक्ल की अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान अनंत की पूजा का विधान होता है। यदि आपने अपने जीवन में सब कुछ पाकर सब कुछ खो दिया है और संकटों से घिरे होकर कष्ट झेल रहे हैं तो अनंत चतुर्दशी का विधिवत व्रत रखें और पूजा करेंगे तो फिर से सभी कुछ प्राप्त कर लेंगे। इसलिए मनाते हैं अनंत चतुर्दशी का त्योहार।
अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है।