Pitra Dosh Remedy: शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में पितृदोष दूर करने के उपाय जरूर करने चाहिए, ताकि पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें। यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में पितृदोष हो, तो जीवन में विघ्न बाधाएं आती ही रहती हैं। दरअसल, पितृदोष पूर्वजन्म में किए गए पाप, कर्मों का फल अथवा पितरों के श्राप के दंड को भोगना है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, कुंडली में सूर्य, गुरु, चंद्रमा, मंगल, शुक्र, बुध, शनि आदि ग्रहों की युति जब राहु के बनती है, अथवा राहु ग्रह के साथ अन्य ग्रह की युति बनती है, तो पितृदोष होता है। इसी प्रकार जब हाथ में बृहस्पति पर्वत और मस्तिष्क रेखा के बीच से निकलकर आ रही रेखा जब बृहस्पति और मस्तिष्क रेखा को काटती है, तो हस्तरेखा शास्त्रानुसार यह पितृदोष का सूचक है।
ज्योतिष शास्त्र में इसे मंगल का कारक भी माना गया है, क्योंकि मंगल ज्योतिषानुसार रक्त संबंध को जोड़ता है। यही कारण है अनेक विद्वान पितृदोष की तुलना मंगलदोष से भी करते हैं। यहां कुछ ऐसे हो उपायों को चर्चा करेंगे, जिससे पितृदोष के असर को कम किया जा सकता है।