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Navratri 2021: नवरात्रि पर मां दुर्गा की उपासना में ज्वार, कलश, दीपक समेत नारियल का क्यों है इतना महत्व?

Wed, 06 Oct 2021 07:51 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही देवी के समक्ष जौ बोने का विधान है। दुर्गा पूजा में जौ को बेहद शुभ माना गया है। जौ समृद्धि, शांति, उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं।
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कलश स्थापना - फोटो : अमर उजाला
अश्विन मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहा जाता है। इस बार 07 अक्टूबर,गुरुवार से शारदीय नवरात्र आरंभ हो रहे हैं। ये नौ दिन माता की भक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन दिनों में देवी भगवती की आराधना और साधना में प्रयुक्त होने वाली प्रत्येक पूजा सामग्री का प्रतीकात्मक महत्व होता है एवं हर एक सामग्री के पीछे कोई न कोई उद्देश्य या संदेश जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं क्या हैं ये संदेश-
ज्वारे
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही देवी के समक्ष जौ बोने का विधान है। दुर्गा पूजा में जौ को बेहद शुभ माना गया है। जौ समृद्धि, शांति, उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जौ उगने की गुणवत्ता से भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। माना जाता है कि अगर जौ तेज़ी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आती है वहीं अगर ये बढ़ते नहीं और मुरझाए हुए रहते हैं तो भविष्य में किसी तरह के अमंगल का संकेत देते हैं।
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कलश
कलश
धर्म शास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह, नक्षत्रों एवं तीर्थों का वास होता है इसलिए नवरात्रि पूजा में घट स्थापना का सर्वाधिक महत्व है। कलश में ही ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र,सभी नदियां,सागरों, सरोवरों एवं 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए विधिपूर्वक कलश पूजन से सभी देवी-देवताओं का पूजन हो जाता है।
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तोरण - फोटो : pinterest
बंदनवार
प्राचीन काल से ही पूजा-अनुष्ठान के दौरान मुख्य द्धार पर आम या अशोक के पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है। ऐसा करने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। मान्यता है कि देवी पूजा के प्रथम दिन देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी होती हैं । देवी घर में प्रवेश करती हैं,पर बंदनवार लगी होने से तामसिक शक्तियां घर के बाहर ही रहती हैं।

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दीपक - फोटो : pexels
दीपक
नवरात्रि के समय घर में शुद्ध देसी घी का अखंडदीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं एवं इससे आस-पास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। दीपक,साधना में सहायक तृतीय नेत्र और हृदय ज्योति का प्रतीक है । इससे हमें जीवन के उर्ध्वगामी होने,ऊंचा उठने और अन्धकार को मिटा डालने की प्रेरणा मिलती है।
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गुड़हल का पुष्प
गुड़हल का पुष्प
पौराणिक मान्यता है कि गुड़हल का लाल पुष्प अर्पित करने से देवी प्रसन्न होकर भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। सुर्ख लाल रंग का यह पुष्प अति कोमल होने के साथ ही असीम शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है,इसलिए लाल गुड़हल देवी माँ को अत्यंत प्रिय है।

 
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kalash - फोटो : social media
नारियल
नवरात्रि पूजा में कलश के ऊपर नारियल पर लाल कपडा और मोली लपेटकर रखने का विधान है। माना जाता है कि इससे सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। नारियल के बाहरी आवरण को अहंकार का प्रतीक और आंतरिक भाग को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। माँ दुर्गा के समक्ष नारियल को तोड़ने का तात्पर्य अहंकार को तोडना है।
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