फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कल्कि जयंती: कलयुग में कैसे और कब जन्म लेंगे भगवान कल्कि, ये होंगे इनके माता-पिता

Mon, 05 Aug 2019 11:29 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
भगवान विष्णु के दसवें अवतार कहे जाने वाले कल्कि भगवान की आज जयंती है, जिसे पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। कल्कि पुराण के मुताबिक कल्कि भगवान का जन्म सावन माह के शुक्ल पक्ष की संध्या व्यापिनी तिथि में होगा। इस वर्ष यह तिथि 5 अगस्त को है। श्रीमद्भागवत पुरा और कल्कि पुराण के मुताबिक भगवान कल्कि का अवतार कलियुग की समाप्ति और सतयुग में संधिकाल में होगा। आइए जानते हैं भगवान के अवतार से जुड़े रोचक बातों के बारे में। 
विज्ञापन

2 of 5
- फोटो : Social Media
पूरे देश में कल्कि अवतार के कई मंदिर हैं। भगवान विष्णु का यह पहला अवतार हैं, जिन्हें अवतरित होने से पहले ही पूजा जाने लगा है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक कलियुग में पाप की अधिकता होने पर दुष्टों के संहार के लिए कल्कि अवतार होगा। वह वाहन देवदत्त नाम का सफेद घोड़ा होगा। यह पापियों का संहार करेंगे और साधु-संतों व शुद्ध मन वाले लोगों की रक्षा करेंगे। 
विज्ञापन

3 of 5
- फोटो : Social Media
पुराणों के मुताबिक कल्कि उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के संभल गांव में भगवान विष्णु के 10वें अवतार के रूप में अवतरित होंगे। इनके सभी भाई देवताओं के अवतार होंगे और धर्म की स्थापना में सहयोग देंगे। इस घटना का जिक्र श्रीमद्गागवत महापुराण के 12वें स्कंद के 24वें श्लोक में कहा गया है जिसके अनुसार गुरु,सूर्य और चन्द्रमा जब एक साथ पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तो भगवान कल्कि का जन्म होगा।
सम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।
भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति।।   

4 of 5
- फोटो : social media
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि का अवतरण कलियुग के अन्तिम समय में होगा। इनके अवतार लेते ही सतयुग का आरम्भ होगा। भगवान कृष्ण के प्रस्थान से कलियुग की शुरूआत हुई थी। नन्द वंश के राज से कलियुग में वृद्धि हुई, वहीं भगवान कल्कि के अवतार से कलियुग का अन्त होगा। कलयुग की अवधि 4,32,000 वर्ष बताई गई है। वर्तमान में कलियुग के 5,119 साल पूरे हो चुके है। भगवान श्री कल्कि निष्कलंक अवतार हैं। भगवान कल्कि के पिता भगवान विष्णु के भक्त होंगे, साथ में वह वेदों और पुराणों के ज्ञाता होंगे। उनके पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति होगा 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
इस दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर सर्वप्रथम व्रत का संकल्प लेना चाहिए। तत्पश्चात भगवान कल्कि जी के प्रतिमूर्ति के गंगाजल से स्नान कराना चाहिए। उन्हें वस्त्र पहनाएं। भगवान कल्किजी को चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। उसके बद धूप, दीव, नैवेद्य, पुष्प और अगरबत्ती से पूजा करें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें