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Eid ul Adha in India 2021: बकरीद से जुड़ी 10 महत्वूर्ण बातें, क्यों और कैसे दी जाती है कुर्बानी

Wed, 21 Jul 2021 06:35 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : अमर उजाला
बकरीद इस्लाम मजहब का प्रमुख त्योहार है। मुसलमान लोग इस त्योहार को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। लेकिन इस बार भी कोरोना संक्रमण के चलते बकरीद की चमक फीकी रह जाएगी। मान्यता के अनुसार, बकरीद को ईद-उल-अजहा, ईद-उल-जुहा, बकरा ईद, के नाम से जाना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हर साल बकरीद 12वें महीने की 10 तारीख को मनाई जाती है। बकरीद रमजान माह के खत्म होने के लगभग 70 दिनों के बाद मनाई जाती है। इस ईद में कुर्बानी देने की प्रथा है। बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग साफ-पाक होकर ईदगाह मे नमाज पढ़ते हैं। नमाज के बाद कुर्बानी दी जाती है। ईद के मौके पर लोग अपने रिश्तेदारों और करीबों लोगों को ईद की मुबारकबाद देते हैं। ईद की नमाज में लोग अपने लोगों की सलामती की दुआ करते हैं। एक-दूसरे से गले मिलकर भाईचारे और शांति का संदेश देते हैं। बाजारों में भी रौनक दिखाई देती है। आइए जानते हैं बकरीद से जुड़ी दस महत्वपूर्ण बातें... 
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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : internet
1. इस्लाम मजहब की मान्यता के अनुसार, कहा जाता है अल्लाह ने हजरत इब्राहिम से सपने में उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी थी। हजरत इब्राहिम अपने बेटे से बहुत प्यार करते थे, लिहाजा उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया। 
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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : net
2. अल्लाह के हुक्म की फरमानी करते हुए हजरत इब्राहिम ने जैसे ही अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाही तो अल्लाह ने एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी। कहते हैं तभी से बकरीद का त्योहार मनाया जाने लगा। इसलिए ईद-उल-अजहा यानी बकरीद हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में ही मनाया जाता है। 

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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : अमर उजाला
3. बकरीद के मौके पर बकरे की कुर्बानी एक प्रतीकात्मक कुर्बानी होती है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर किसी को इस मौके पर बकरे की कुर्बानी देनी ही होती है। इंसानियत के नाते आप अपना समय और धन भी कुर्बान कर सकते हैं।
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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : Pixabay
4. बकरीद मे ऐसे जानवर की कुर्बानी नहीं दी जा सकती जिसमें कोई शारीरिक बीमारी या भैंगापन हो, सींग या कान का अधिकतर भाग टूटा हो या जो शारीरिक तौर से बीमार हो। बहुत छोटे पशु की भी बलि भी नहीं दी जा सकती। कम-से-कम उसे दो दांत यानि एक साल या फिर चार दांत का होना चाहिए।
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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : Social Media
5. कुरान में कहा गया है कि अल्लाह के पास हड्डियां, मांस और खून नहीं पहुंचता है। बल्कि पहुंचती है तो खुशु यानी देने का जज्बा। इसलिए बकरीद में बकरे की कुर्बानी महज आपकी कुर्बानी का प्रतीक मात्र है। 
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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : जी पाल
6. कुर्बानी ईद की नमाज के बाद की जाती है, इससे पहले कुर्बानी नहीं दी जा सकती। कुर्बानी के बाद मांस के तीन हिस्से होते हैं। एक खुद के इस्तेमाल के लिए, दूसरा गरीबों के लिए और तीसरा रिश्तेदारों के लिए। 

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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : amar ujala
7. फुका में कुर्बानी का एक बड़ा नियम यह है कि जिनके पास 613 से 614 ग्राम चांदी हो यानी आज के हिसाब से इतनी चांदी की कीमत के बराबर जिनके पास धन हो उस पर कुर्बानी फर्ज है यानी उसे कुर्बानी देनी चाहिए।

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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : अमर उजाला
8. कुर्बानी देने वाले के ऊपर उस समय कर्ज नहीं होना चाहिए साथ ही उसके पास उस समय यह धन उपलब्ध होना चाहिए चाहे वह फिक्स डिपॉजिट ही क्यों न हो।

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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : Twitter
9. अगर कोई व्यक्ति कुरान के नियमानुसार अपनी कमाई का ढ़ाई प्रतिशत दान देता है इसके बाद सामाजिक कार्यों में अपना धन कुर्बान करता है तो यह जरुरी नहीं है कि वह बकरे की कुर्बानी दे।
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बकरीद मुबारक 2021 - फोटो : PTI
10. कुर्बानी में बकरे की लाख बड़ी कीमत क्यों न हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मतलब है कुर्बानी के जज्बे से। जो इंसान दूसरे इंसान का भला करता है अल्लाह सबसे अधिक उसे प्यार करते हैं। जो प्याऊ लगता है उसकी कुर्बानी उसकी बड़ी मानी जाती है।
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