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Amla Navmi 2021: आंवला नवमी पर आज करें आंवला वृक्ष की पूजा, माता लक्ष्मी और श्री विष्णु बरसाएंगे कृपा

Fri, 12 Nov 2021 08:51 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आंवला नवमी 2021: शास्त्रों में वर्णित है कि अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिवजी का निवास होता है और इस दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। - फोटो : अमर उजाला
Amla Navmi 2021 Puja Vidhi : सनातन धर्म में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस साल आंवला नवमी 12 नवंबर, शुक्रवार को है। पदम पुराण के अनुसार आंवला नवमी के दिन दान करने से पुण्य का फल इस जन्म के साथ अगले जन्म में भी मिलता है। मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन आंवला के वृक्ष की पूजा करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है एवं आरोग्यता व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन इस वृक्ष के नीचे बैठने और भोजन करने से सभी आदि-व्याधियों का नाश होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिवजी का निवास होता है और इस दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। आंवले का दर्शन, स्पर्श तथा उसके नाम का उच्चारण करने से वरदायक भगवान श्री विष्णु अनुकूल हो जाते हैं।
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आंवला नवमी पूजा विधि, सामग्री और कथा - फोटो : istock
आंवला नवमी पूजन विधि
प्रात: सूर्योदय से पूर्व स्नान करके पूरे विधि-विधान के साथ आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवले पर जल, कच्चा दूध चढ़ाने के बाद कुमकुम, हल्दी-चावल, आंवला, फूल एवं कुछ मीठा अर्पित करें।फिर वृक्ष के मोली लपेटकर दीप प्रज्वलित करें। तत्प्श्चात आंवला के पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें। पेड़ के नीचे बैठकर कुछ देर तक माता लक्ष्मी,भगवान विष्णु एवं गौरी-शंकर का ध्यान करें और पेड़ को प्रणाम करें। आवंला नवमी की कथा भी सुन सकते हैं। इसके बाद परिवार सहित आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करें। लेकिन यदि आज आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन न कर पाएं तो आंवला खाएं। आंवला नवमी के दिन आंवला वृक्ष का पूजन कई यज्ञों के बराबर शुभ फल देने वाला बताया गया है।
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आंवला नवमी कथा
पदम पुराण के अनुसार जगत के पालनहार भगवान विष्णु की प्राणप्रिया माता लक्ष्मी प्रभु की आज्ञा से  पृथ्वी पर भ्रमण करने आईं। जब वे पृथ्वी पर चारों तरफ भ्रमण कर रहीं थी तभी उनके मन में भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा एकसाथ करने की इच्छा हुई। लक्ष्मी माँ ने बहुत विचार किया कि एकसाथ विष्णु और शिव की पूजा कैसे हो सकती है। तभी आकाशवाणी हुई कि तुलसी और बेल के  गुण एक साथ आंवले में हैं और आंवला वृक्ष भगवान शिव और विष्णु का प्रतीक है । तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है और बेल शिव को। आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिह्न मानकर माँ लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष की पूजा की। पूजा से प्रसन्न होकर विष्णुजी और शिवजी  प्रकट हुए । लक्ष्मी  माता ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर भगवान विष्णु और  शिव को भोजन कराया । इसके बाद स्वयं ने भोजन किया। जिस दिन यह घटना हुई उस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी थी, तभी से आंवला पूजन की  शुरुआत हुई।
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आंवला नवमी
आंवला नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त
12 नवंबर 2021 दिन शुक्रवार को सुबह 06 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक पूजन का शुभ मुहूर्त है।
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