रोहतांग दर्रा में तापमान माइनस 20 डिग्री। बर्फीली हवाओं के बीच करीब चार घंटे तक लगभग 150 यात्री फंसे रहे। यात्रियों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे। देखिए कैसे बची मौत से जिंदगी।
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-20 डिग्री तापमान, पांच घंटे जब सिर्फ दिख रही थी मौत
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रोहतांग दर्रा में तापमान माइनस 20 डिग्री। बर्फीली हवाओं के बीच करीब चार घंटे तक लगभग 150 यात्री फंसे रहे। यात्रियों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे। देखिए कैसे बची मौत से जिंदगी। लगातार पांच घंटे तक जवान बर्फ को हटाते रहे।
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फौजी ने पैदल ही पार कर लिया दर्रा: बर्फीले तूफान के कारण कोई वाहन रोहतांग दर्रा आरपार नहीं कर पाया। जबकि सूचना है कि भारतीय सेना के एक जवान ने अपनी जान जोखिम में डालकर रात को पैदल ही दर्रा पार लिया। मढ़ी स्थित रेस्क्यू पोस्ट में रुकने के बजाए यह फौजी अकेले ही पैदल चलकर आधी रात को मनाली पहुंचा। बताया जा रहा है कि फौजी छुट्टी पर घर आया था और अवकाश समाप्त होने के बाद बॉर्डर से सटे समदो में ड्यूटी ज्वाइन करनी थी।
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पांच घंटे की मशक्कत के बाद रोहतांग दर्रा यातायात के लिए बहाल हो पाया। कोकसर रेस्क्यू दल के प्रभारी लुदर सिंह ने रोहतांग टॉप से अमर उजाला को दूरभाष पर बताया कि बीआरओ ने दर्रे में बर्फीले तूफान से बंद हुए मार्ग को बहाल कर दिया है। सभी को बचा लिया गया है। लाहौल की चंद्रभागा नदी जो पूरी तरह से जम गई है।
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लाहौल स्पीति भाजपा के महामंत्री जवाहर शर्मा ने बताया कि सीमा सड़क संगठन के जवानों की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि रोहतांग में घंटो भूखे प्यासे फंसे यात्री सुरक्षित निकल पाए। बीआरओ के कमांडर कर्नल केपी राजेन्द्र ने बताया कि तेज हवाओं के कारण बर्फ सड़कों पर जम रही है। यातायात बाधित हो रहा है।