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Teacher Award: हिमाचल के इन शिक्षकों को मिलेगा राज्य स्तरीय पुरस्कार, ऐसे पाया मुकाम

Sat, 03 Sep 2022 03:30 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/कुल्लू/सिरमौर)बिलासपुर/ऊना/मंडी/धर्मशाला/हमीरपुर
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इन शिक्षकों को मिलेगा राज्य स्तरीय पुरस्कार। - फोटो : अमर उजाला
शिक्षकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान करने का मकसद उनके अनूठे योगदान की सराहना करना है। ऐसे शिक्षकों का सम्मान करना है, जिन्होंने अपनी परिश्रम से न सिर्फ स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया है, बल्कि स्कूल के विकास के लिए भी अहम योगदान दिया। इनकी वजह से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी, विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेकर बच्चों ने पुरस्कार जीते। स्कूल में छुट्टी के बाद भी बच्चों को पढ़ाया और उनकी हर शंका का समाधान किया।   प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 16 शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार दिया जाएगा।


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100 अंकों के आधार पर 51 आवेदनों में से 12 शिक्षकों का चयन किया गया है। तीन शिक्षकों को सरकार की गठित राज्य चयन कमेटी ने चुना है। बीते वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले सोलन के शिक्षक कमल किशोर को इस बार राज्य पुरस्कार मिलेगा। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर राजभवन शिमला में शाम 5:30 बजे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शिक्षकों को सम्मानित करेंगे।  जिला शिमला के हाजल प्राइमरी स्कूल की जेबीटी अनुराधा 81 अंकों के साथ चयनित 12 शिक्षकों में अव्वल रही हैं। कांगड़ा के प्राइमरी स्कूल भलाड़ के मुख्य अध्यापक संजीव कुमार 78 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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प्रिंसिपल गजेंद्र सिंह ठाकुर - फोटो : संवाद
गजेंद्र सिंह के प्रयासों से बना स्कूल भवन और सड़क 
 शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिए कुल्लू जिला के बराण स्कूल के प्रिंसिपल के गजेंद्र सिंह ठाकुर को भी राज्य शिक्षक पुरस्कार मिलेगा। अपने सेवाकाल में मुख्याध्यापक और प्रधानाचार्य के रहने के बावजूद स्कूलों में कक्षाएं लेते हैं। 2014 में प्रीणी स्कूल में मुख्याध्यापक होने के दौरान उन्होंने एक बिजली प्रोजेक्ट और ग्रामीणों की मदद से स्कूल भवन बनवाया। 2017 में बंजार के चनौन स्कूल में प्रधानाचार्य रहते हुए स्कूल तक सड़क का निर्माण करवाया। वहीं उच्च विद्यालय प्रीणी में मुख्याध्यापक रहते हुए विद्यार्थियों की गणित की कक्षाएं लीं। वहीं चनौन में प्रधानाचार्य होते हुए नवीं और दसवीं कक्षा के बच्चों की कक्षाएं उन्होंने स्कूल बंद होने के बाद भी गणित और विज्ञान की कक्षाएं लीं। 
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निशिकांत - फोटो : अमर उजाला
निशिकांत ने निजी स्कूलों को दी टक्कर
 राजकीय माध्यमिक पाठशाला लाणा मियू टीजीटी नॉन मेडिकल के पद पर तैनात निशिकांत शर्मा ने 28 मई 1999 राजकीय प्राथमिक स्कूल गागल शिकोर से बतौर जेबीटी अध्यापक सेवाएं शुरू कीं। एमएससी फिजिक्स, एमएड की शिक्षा प्राप्त करने वाले निशिकांत 20 जुलाई 2007 को बतौर टीजीटी नॉन मेडिकल प्रमोट हुए। राजकीय माध्यमिक पाठशाला मंडी खड़ाना से टीजीटी नॉन मेडिकल सेवा शुरू की। इसके बाद खरेटी, धरोट (सोलन), घड़ासर और वर्तमान में लाणा मियू स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। घड़ासर में कोरोना काल के दौरान सामुदायिक सहभागिता से स्कूल विकास के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए। निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए वह हमेशा बच्चों को तैयार करते रहे हैं। लाणा मियू स्कूल में रहते हुए जिला स्तर पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार, जबकि गढ़ासर स्कूल में सेवा के दौरान जिला स्तर पर उत्कृष्ट सेवा सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। निशिकांत शर्मा बताते हैं कि उन्हें किताबे पढ़ना, कविताएं लिखना, क्रिकेट व बैडमिंटन खेलना और संगीत सुनना अच्छा लगता है।

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सुरेंद्र चौहान - फोटो : संवाद
सुरेंद्र ने सामूहिक समन्वय से बेहतर बनाया शैक्षणिक माहौल
पच्छाद क्षेत्र के सराहां निवासी सुरेंद्र सिंह को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा जाएगा। सुरेंद्र चौहान वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सराहां में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। सुरेंद्र कुमार ने शिक्षा विभाग में बतौर टीजीटी अध्यापक 1990 से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गलाना घाट से सेवाएं शुरू हुई। सुरेंद्र सिंह आठ वर्ष तक बीआरसी कार्यालय सराहां में बीआरसी के पद पर तैनात रहे। उसके बाद चार वर्षों तक बनाहां की सेर स्कूल में मुख्य अध्यापक के पद पर सेवाएं दीं। उसके बाद डेढ़ साल तक प्रधानाचार्य निरीक्षण के पद पर तैनात रहे। दौरान सुरेंद्र चौहान ने पूरे सिरमौर के स्कूलों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि पुरस्कार की घोषणा से बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने हमेशा सामूहिक समन्वय स्थापित कर न केवल स्कूल प्रबंधन बल्कि शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने के प्रयास किए। 
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अध्यापिका अच्छर लता - फोटो : संवाद
अंग्रेजी में पढ़ाई शुरू करवाई, एलईडी भी दिया
 बिलासपुर से स्टेट टीचर अवार्ड के लिए सदर खंड के राजकीय प्राथमिक पाठशाला कोटला की अध्यापिका अच्छर लता का नाम चयन हुआ है। अच्छर लता ने 2016 से अंग्रेजी माध्यम में कक्षाएं शुरू करर्वाइं। उसके बाद स्कूल के लिए एलईडी  दान कर स्मार्ट कक्षाएं शुरू कीं।  उनके कार्यकाल में इनके वर्तमान स्कूल में निजी स्कूल से 50 फीसदी बच्चे शिक्षा ग्रहण करने पहुंचे। इस समय लगभग 90 विद्यार्थी इनके स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने एमए बीएड की पढ़ाई की है। 25 साल के सेवाकाल के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया जा रहा है।
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चमन लाल - फोटो : संवाद
चमन लाल ने छुट्टियों में भी पढ़ाई जारी रखी
 ऊना जिले से इस साल संस्कृत विषय के अध्यापक चमन लाल को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा जाएगा। चमन लाल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाल में तैनात हैं। चमन लाल बच्चों को जीवन मूल्यों के बारे में शिक्षित करते आ रहे हैं। स्कूल में छुट्टी के बाद और छुट्टियों में भी चमन लाल ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। बच्चों से संपर्क साधकर उनकी शंकाएं दूर कीं। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के अलावा ऑफलाइन बच्चों का मार्गदर्शन किया। पढ़ाई के साथ खेलों में भी बच्चों का मार्गदर्शन किया। चमन लाल का कहना है कि राज्य स्तर का अवार्ड मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानाचार्य कश्मीर सिंह, स्टाफ तथा विशेषकर विद्यार्थियों को दिया है। वहीं, प्रधानाचार्य कश्मीर सिंह ने बताया कि चमन लाल अपने विषय के अलावा विद्यालय में चल रही किसी भी गतिविधि में सबसे आगे होकर हिस्सा लेते हैं।
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 रॉय सिंह रावत - फोटो : संवाद
रावत हर साल जरूरतमंद पांच छात्रों की पढ़ाई का उठाते हैं खर्च
 रॉय सिंह रावत कुपवी स्कूल में प्रवक्ता (अर्थशास्त्र) हैं। वह 25 सालों से शिक्षण कार्य कर रहे है। पांच सालों से अपने स्कूल का सौ फीसदी परिणाम दे रहे हैं। हर साल नवीं से बारहवीं कक्षा तक के पांच जरूरतमंद विद्यार्थियों की फीस, कॉपी, किताब का खर्च उठाने के अलावा छात्रों को ट्रैक सूट बांटने के साथ ही स्कूल में जरूरत के अनुसार बच्चों की मदद करते रहे है। उनकी एक छात्रा बॉबी रंजना ने भाषण में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान पाया है। रावत ने कोरोना काल में बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं के लिए मोबाइल देकर पढ़ाई में मदद की। वह मूलत: गांव डिम्मी तहसील कुपवी के रहने वाले हैं। 

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अनुराधा - फोटो : संवाद
अनुराधा को सच्ची लग्न ने दिलवाया सम्मान 
राजकीय प्राथमिक पाठशाला हाजल में 16 सालों से समर्पण भावना से शिक्षण कार्य ने अनुराधा को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार दिलवाया है। अनुराधा ने लगातार पांच वर्ष तक छात्र-छात्राओं की एकांकी को राज्य स्तर पर पहला पुरस्कार दिलवाया। एकांकी से समाज में फैली कुरीतियों को लेकर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया, जिसके लिए उन्हें राज्यपाल के हाथों प्रशस्ति पत्र भी मिला है। अनुराधा ने अपने हाजल स्कूल सहित आसपास के स्कूली बच्चों को भी लोक नृत्य, एकांकी में पुरस्कार दिलवाए हैं। उन्होंने स्कूल में आर्ट एंड क्राफ्ट में बेकार सामान से उपयोगी वस्तुओं का बनाने का हुनर सिखाने का कार्य करने के साथ प्ले वे तकनीक से बच्चों को पढ़ाने का कार्य किया। यही नहीं, स्वयं शिक्षण कार्य में उपयोगी सामग्री तैयार कर अन्य स्कूलों के शिक्षकों को भी सिखाने का कार्य किया। उन्होंने अपने स्तर पर ही हाजल स्कूल में प्री प्राइमरी कक्षाओं को शुरू करने का प्रयोग भी सफलतापूर्वक किया। अनुराधा ने कहा कि उन्हें इस सम्मान के मिलने से एक नई ऊर्जा, स्फूर्ति मिली है। वह और बेहतर करने का प्रयास करेंगी। 

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प्रधानाचार्य सतीश कुमार - फोटो : संवाद
सतीश ने छात्रों को तैयार कर दिलवाई छात्रवृत्ति
 घणाहट्टी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के प्रधानाचार्य सतीश कुमार ने विभिन्न स्कूलों में प्रधानाचार्य रहते हुए लगातार दस साल तक दर्जनों छात्र-छात्राओं को नेशनल मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए तैयार किया और उन्हें छात्रवृत्ति दिलवाने में मदद की। उन्होंने कभी अपने बच्चों और उनके स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में भेद नहीं किया। छात्रों के लिए हरसंभव बेहतरीन शैक्षणिक माहौल प्रदान करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि स्कूल में रहते हुए उन्होंने हमेशा अपने काम से प्रेम किया, पूरी निष्ठा के साथ उसे पूरा करने, छात्रों को सुविधाएं मुहैया करवाने में प्रयास किया। उनका कहना है कि राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने पर वह और अधिक लग्न से कार्य करेंगे, जिससे उनके स्कूल के छात्र आगे बढ़ें और हर मोर्चे पर अपनी प्रतिभा का अच्छा प्रदर्शन करें। 

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शिक्षक हरीश कुमार - फोटो : संवाद
हरीश ने कोविड काल में घरों में जाकर पढ़ाए विद्यार्थी
 सराज क्षेत्र के की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धरोटधार में कार्यरत शिक्षक हरीश कुमार पिछले 16 वर्ष से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह गणित पढ़ाते हैं तथा 16 सालों में लगातार उनकी कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा है। पिछले साल इनके एक छात्र ने गणित में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने कोविड-19 के दौर में भी स्कूल की पढ़ाई को बाधित नहीं होने दिया तथा वह छात्रों को पढ़ाने के लिए घर द्वार तक पहुंचकर पढ़ाई करवाई। कोविड के प्रति छात्रों के साथ साथ ग्रामीणों को भी जागरूक किया।

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कला अध्यापक चमन लाल शर्मा - फोटो : संवाद
चमन ने सरकारी स्कूलों में दाखिले को प्रेरित किए अभिभावक
 राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गोहर के कला अध्यापक चमन लाल शर्मा पिछले 29 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 2018 में स्कूल को जिला स्वच्छता पुरस्कार दिलाया। 2020 में चमन लाल शर्मा ने कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित कला विषय को हर घर पाठशाला में शामिल करवाया। हर घर पाठशाला में कोरोना के समय नौवीं और दसवीं कक्षा में नोडल अधिकारी के रूप में सेवाएं दी। उन्होंने घर घर जाकर बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला करवाने के लिए अभिभावकों को प्रेरित किया। 60 बच्चों के अभिभावकों ने उनसे प्रेरित होकर निजी स्कूल को सरकारी स्कूल में दाखिला लिया। उनकी शिक्षा की बात करें तो उन्होंने मैट्रिक के बाद आर्ट एंड क्राफ्ट डिप्लोमा रोहतक से किया है।

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डीपीई विनोद कुमार - फोटो : संवाद
विनोद ने हिमाचल को दिलाए कई पुरस्कार
 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल स्कूल भंगरोटू में कार्यरत डीपीई विनोद कुमार 20 सालों से अध्यापन कार्य में हैं। वह अब तक कई स्कूलों में सेवाएं दे चुके हैं और उनके नेतृत्व में कई स्कूलों की टीमों ने खेलकूद स्पर्धाओं में जीत हासिल की और पदक जीते। उन्होंने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक वर्ष 2014 में प्राप्त किया। नेशनल बॉक्सिंग में चार कांस्य पदक प्राप्त किए हैं। बॉक्सिंग में गवर्नर अवार्ड छह फरवरी 1995 में हरियाणा राज्य भवन चंडीगढ़ में प्राप्त किया है। वहीं इनके नेतृत्व में सरकारी स्कूलों के कई छात्र छात्राओं ने खेलकूद प्रतियोगिताओं में बहुत ही उपलब्धियां हासिल करके खेल कोटे में नौकरियां भी प्राप्त की हैं।

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लेक्चरर कुलदीप सिंह - फोटो : संवाद
500 से ज्यादा जरूरतमंद बच्चों की फीस भर चुके हैं कुलदीप
 वर्ष 1992 से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे पलियार स्कूल के लेक्चरर कुलदीप सिंह अब तक 500 से ज्यादा जरूरतमंद बच्चों की फीस दे चुके हैं। वहीं अब पलियार स्कूल में भी ग्यारहवीं कला संकाय के सभी आठ बच्चों की फीस के साथ-साथ मुफ्त किताबें दे रहे हैं।  वह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत हर बेटी के जन्मदिन पर उपहार भेंट करते हैं। इसके अलावा ‘कजो नैण मिलाए ओ दिला मेरेया’ जैसे लोकप्रिय पहाड़ी गानों को लिखने के साथ-साथ 70 से अधिक गानों को आवाज दे चुके हैं। आकाशवाणी से लेकर दूरदर्शन पर वह कई प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उन्होंने बताया कि कोविड काल के बाद बच्चों की लिखाई काफी बिगड़ चुकी है। इसके सुधार के लिए वह प्रयास करेंगे।

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संजीव कुमार - फोटो : संवाद
संजीव ने लोगों की सहभागिता से स्कूल में शुरू करवाई थी कम्प्यूटर की पढ़ाई
 वर्ष 1995 से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं देने वाले पलाड़ स्कूल के शिक्षक संजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने भरोली जदीद स्कूल में स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित करते हुए दो कम्प्यूटर दान करवाकर कम्प्यूटर शिक्षा की शुरुआत करवाई। प्रगोड़ स्कूल में सेवाएं देते हुए उनके स्कूल को जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। शिक्षा के साथ-साथ वह बैडमिंटन में राज्य स्तर के कई खिलाड़ी दे चुके हैं। उन्होंने बताया कि मेरा सपना है कि आने वाले समय में वह अपने स्कूल में एलईडी के सहारे क्लास रूम में बेहतर शिक्षा मुहैया करवाना चाहते हैं।
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जेबीटी शिक्षक मोहन लाल शर्मा - फोटो : संवाद
स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करवाई
हमीरपुर जिले की राजकीय प्राथमिक पाठशाला पल्लवीं के जेबीटी शिक्षक मोहन लाल शर्मा भी राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयनित हुए हैं। वह बताते हैं कि जब उन्होंने ज्वाइन किया तो तब स्कूल में 25 से कम विद्यार्थी थे और स्टाफ भी कम था। स्कूल में बच्चों की संख्या कम हो रही थी। उन्होंने पीटीए पर शिक्षक रखकर स्टाफ की कमी को दूर करवाया। 2013 से स्कूल में प्री-प्राइमरी कक्षाएं और इंग्लिश माध्यम में पढ़ाई भी शुरू करवाई। जबकि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 से अधिकारिक रूप से स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करवाई हैं। स्कूल के शिक्षकों की ही मेहनत है, जिसके परिणाम स्वरूप आज स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 55 से ऊपर है। 
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