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धर्मशाला: चेतावनी देते रहे प्रदर्शनकारी, पानी की बौछार करते ही भड़क उठे, कर दी पत्थरबाजी, जानें दिनभर क्या-क्या हुआ

Fri, 10 Dec 2021 10:45 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला

सार

तपोवन विधानसभा भवन के मुख्य गेट पर सामान्य वर्ग आयोग के गठन की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारियों ने डीजीपी संजय कुंडू और मुख्य सचिव से बात करते समय पसीने छुड़ा दिए। प्रदर्शनकारियों ने सीएम से मिलने के लिए मरने-मारने तक की धमकियां दे डालीं। सामान्य वर्ग  के गठन की मांग को लेकर सुबह से नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारी किसी की बात मानने के मूड में नहीं थे।  जानें दिनभर क्या-क्या हुआ...
 
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प्रदर्शनकारियों को रोकती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश विधानसभा सत्र के पहले ही दिन सामान्य वर्ग आयोग के गठन की मांग को लेकर सुबह से नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारी किसी की बात मानने के मूड में नहीं थे। पहले जिला प्रशासन, डीजीपी, मुख्य सचिव से लेकर वरिष्ठ मंत्री और फिर मुख्यमंत्री उन्हें मनाने का प्रयास करते रहे लेकिन उन्हें आश्वासन नहीं लिखित आदेश चाहिए थे। प्रदर्शनकारी तपोवन विधानसभा परिसर से एक किलोमीटर पीछे जोरावर स्टेडियम में करीब 11:30 बजे हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचे। इसके बाद करीब सवा 12 बजे 100 मीटर आगे तपोवन रोड पहुंचे।

यहां पुलिस ने जोरावर स्टेडियम पहुंचाने के लिए दूसरे रास्ते का विकल्प दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी पुलिस की नफरी को लांघते हुए वहां से आगे बढ़ गए। थोड़ी देर गहमागहमी के बाद पुलिस ने फायर बिग्रेड की गाड़ी सड़क पर तिरछी खड़ी कर दी। प्रदर्शनकारी फायर बिग्रेड की गाड़ी पर चढ़ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की भी हुई। इसके लिए दो बजे तक का समय दिया। दो बजे उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया तो प्रदर्शनकारियों ने विस परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने पानी की बौछारें शुरू कर दीं। 
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पुलिस ने पानी की बौछारें डालीं। - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद गुस्साए लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पत्थरबाजी में पुलिस जवान, कुछ पत्रकार सहित अन्य लोग भी घायल हुए। पुलिस, अग्निशमन की गाड़ी सहित वहां खड़ी एएसपी के वाहन को भी नुकसान पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने स्टेडियम की लोहे और पत्थर की दीवार को गिराकर विस परिसर का रुख कर दिया। पुलिस उन्हें रोकने में नाकाम रही। इसके बाद भीड़ नारेबाजी करते विधानसभा परिसर के मुख्य गेट पर 2.05 बजे पहुंच गई। 
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सामान्य वर्ग के लोगों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
विस परिसर के बाहर सैकड़ों पुलिस कर्मचारियों ने प्रदर्शनकारियों का रास्ता रोक दिया। गेट पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी बुलाने पड़े। भीड़ को बेकाबू होता देख पुलिस अधिकारियों ने पुलिस की गाड़ी गेट के बीच में खड़ी कर दी। इसके बाद करीब 2.20 बजे मंत्री महेंद्र ठाकुर और सुरेश भारद्वाज गेट के पास पहुंचे। प्रदर्शनकारी सीएम से बातचीत की मांग पर अड़े रहे। उसके बाद राकेश पठानिया भी प्रदर्शनकारियों से मिले, लेकिन उन्हें भी नहीं लौटना पड़ा। 

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सामान्य वर्ग का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
डीजीपी संजय कुंडू और डीसी कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल लगातार प्रदर्शनकारियों से आग्रह करते रहे। इसके बाद तीन बजकर 17 मिनट पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के आना पड़ा। सीएम ने सामान्य वर्ग आयोग के गठन का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी लिखित में मंजूरी पर अड़े रहे। करीब सवा चार बजे सीएम ने आयोग गठन की मांग को लेकर लिखित रूप में पत्र जारी किया। 
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सामान्य वर्ग के लोगों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
गोली मारो या आग लगा दो, सीएम से मिले बिना नहीं लौटेंगे
 तपोवन विधानसभा भवन के मुख्य गेट पर सामान्य वर्ग  आयोग के गठन की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारियों ने डीजीपी संजय कुंडू और मुख्य सचिव से बात करते समय पसीने छुड़ा दिए। प्रदर्शनकारियों ने सीएम से मिलने के लिए मरने-मारने तक की धमकियां दे डालीं। डीजीपी और डीसी से बात करते हुए प्रदर्शनकारियों ने दोटूक कहा कि हमें गोली मार दो या आग लगा दो, लेकिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिले बिना यहां से नहीं लौटेंगे। 
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प्रदर्शनकारियों ने तोड़े बैरिकेड। - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री को आयोग का गठन करना होगा। सीएम को उनसे मिलने आना ही पड़ेगा। अगर मुख्यमंत्री नहीं आए तो सभी विधानसभा परिसर से अंदर जाकर उनसे मिलेंगे। चाहे इसके लिए जान ही क्यों न चली जाए। डीसी कांगड़ा और डीजीपी ने कहा कि उनमें से तीन-चार लोगों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिल सकता है, लेकिन प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री को बाहर बुलाने पर अड़े रहे। डीजीपी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि यह प्रोटोकाल के तहत नहीं आता कि मुख्यमंत्री परिसर के बाहर आकर किसी से बात करें।
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आयोग गठन की घोषणा के बाद जश्न। - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनकारी बोले - या मुख्यमंत्री प्रोटोकाल का पालन कर लें या लोगों का आक्रोश झेलने को तैयार रहें। कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले भी चार-पांच बार कोरे आश्वासन दिए हैं। इस तरह उन्होंने सामान्य वर्ग लोगों के साथ छल किया है। करीब सवा घंटे की जद्दोजहद में प्रशासन से लेकर मंत्रियों, प्रदर्शनकारियों को मनाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा लिया। आखिरकार सवा तीन बजे मुख्यमंत्री को प्रोटोकोल तोड़कर प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए परिसर से बाहर आना पड़ा। मुख्यमंत्री से लिखित आश्वासन के बाद हजारों प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक लौट गए। 
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