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रूस-यूक्रेन युद्ध: भूखे प्यासे रोमानिया बॉर्डर पहुंचे विद्यार्थियों को नहीं दी गई एंट्री, कीव लौटने को मजबूर

Sun, 27 Feb 2022 10:28 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला/रोहड़ू
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सोमालिया सीमा पर जुटे भारतीय छात्र। - फोटो : संवाद
एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गए रोहड़ू के करीब आधा दर्जन विद्यार्थी वहां के विभिन्न शहरों में फंसे हैं। भूखे प्यासे रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे विद्यार्थियों को एंट्री नहीं दी गई। ऐसे में उन्हें कीव लौटने पर मजबूर होना पड़ा। फोन पर परिजनों से बातचीत में बच्चों ने यह बात बताई है। इससे विद्यार्थियों के परिजनों की भी नींद उड़ गई है। रोहड़ू के दलगांव निवासी ईश्वर सिंह बांष्टू की बेटी स्वाभी बांष्टू ने फोन पर माता-पिता को बताया कि रोमानिया बॉर्डर पर बीते बारह घंटे से खडे़ हैं। भारतीय दूतावास सहयोग नहीं कर रहा। भीड़ अधिक होने से उन्हें वापस कीव लौटा दिया है। ऐसे में उनके पास यहां से निकलने का कोई विकल्प नहीं बचा है। उनके साथ भारत के करीब 70 बच्चे इस ग्रुप में हैं। इनमें तीन छात्राएं रोहड़ू से हैं।  उन्होंने पिता को फोन पर बताया कि शनिवार को रोमानिया सीमा के लिए किराये पर वाहन लेकर गए थे। माइनस तापमान में एक कैफे में रात गुजारने की कोशिश की। इस दौरान नाइजीरिया के कुछ छात्रों ने उनके साथ धक्कामुक्की की और कैफे से निकाल दिया। उनके पास खाने-पीने का जो सामान बचा था, वह भी छीन लिया। कई घंटे लाइन में लगने के बाद मची भगदड़ में दो लोगों के पैर में फ्रेक्चर आया है। उन्होंने बताया कि खाना नहीं मिलने के कारण कई विद्यार्थी बेहोश भी हो रहे हैं। 
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सोमालिया सीमा पर जुटे भारतीय। - फोटो : संवाद
बॉर्डर पर नहीं खाने-पीने की व्यवस्था, भारतीय दूतावास नहीं कर रहा सहयोग- स्वाभी बांष्टू ने फोन पर बताया कि भारतीय दूतावास सहयोग नहीं कर रहा। बॉर्डर पर खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है। स्वाभी ने बताया कि उनके साथ रोहड़ू क्षेत्र से अक्षिता नेगी और अमिशा तेगटा सहित कई सहयोगी हैं। यूक्रेन पर रूस ने 24 फरवरी को हमला किया था। उन्हें संस्थान से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। अगले दिन स्थिति खराब हुई तो ऑनलाइन कक्षाएं लगाने के निर्देश दिए गए। स्वाभी के पिता ईश्वर बांष्टू, माता रेखा बांष्टू ने बताया कि सरकार को फोन पर इसकी सूचना दी गई है। स्थानीय विधायक से भी आग्रह किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि यूक्रेन में फंसे उनके बच्चों को सुरक्षित लाया जाए। भारतीय दूतावास को भी रोमानिया में जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाएं।
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यूक्रेन में यूनिवर्सिटी की कैंटीन में खाना बनाते कुल्लू के छात्र। - फोटो : संवाद
मां के कहने पर बनाए थे परांठे, चार दिन से वही खा रही हूं- यूक्रेन के खारकीव और कीव में फंसे ऊना जिले के विद्यार्थियों के हालात खराब होते जा रहे हैं। इन इलाकों में रूसी सेना की गोलीबारी बढ़ती जा रही है। विद्यार्थियों के लिए भूखे रहने की नौबत आ गई है। यूक्रेन के खारकीव में फंसी ऊना शहर के विकास नगर की छात्रा सुनिधि ने बताया कि वह मेट्रो स्टेशन की बेसमेंट में दिन काट रही हैं। हालात दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। फायरिंग और बम धमाके बढ़ते जा रहे हैं। कहा कि चार दिन पहले हॉस्टल छोड़ने से पहले मां के कहने पर इकट्ठे परांठे बनाए थे। अभी तक उन्हीं से गुजारा चल रहा है। खाना खत्म होने वाला है और पानी भी थोड़ा ही बचा है। पता नहीं कब सब कुछ खत्म हो जाए। दुकानें और शॉपिंग माल बंद हैं। बाहर से मदद नहीं मिल रही।

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यूक्रेन में यूनिवर्सिटी की कैंटीन में खाना बनाते कुल्लू के छात्र। - फोटो : संवाद
न ही भारतीय दूतावास से कोई सहायता मिली। खारकीव में ही बंकर में दिन काट रहीं चरूड़ू गांव की काजल ने बताया कि हालात ठीक होते नहीं दिख रहे हैं। न ही यहां कोई मदद के लिए पहुंच रहा है। खारकीव में करीब पांच हजार भारतीय विद्यार्थी फंसे हैं। उम्मीद खत्म हो रही है। शहर में रूसी सैनिक हिंसा पर उतर आए हैं। कोई पता नहीं कब बंकर भी असुरक्षित हो जाएं। यूक्रेन सीमाओं पर भारतीय विद्यार्थियों के साथ हिंसा की खबरें आ रही हैं। ऊना के शानु राणा ने बताया कि कीव शहर में भी रूसी आर्मी हिंसा पर उतर आई है। उनके सामने वाले हॉस्टल को आर्मी ने मिसाइल से टारगेट लिख दिया है। इन विद्यार्थियों ने भारत सरकार ने जल्द मदद की अपील की है। 


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पिता के साथ आकांक्षा। - फोटो : संवाद
दिल्ली एयरपोर्ट पर बेटी आकांक्षा को देख छलके माता-पिता के आंसू- रूस-यूक्रेन में छिड़े युद्ध के बीच रविवार देर शाम गगरेट के नंगल जरियाला गांव की आकांक्षा भारत लौट आई हैं। रविवार सुबह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली में बेटी को देखकर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक गए। आकांक्षा हंगरी के रास्ते से होते हुए पहुंची हैं। माता-पिता ने आकांक्षा को गले से लगा लिया। आकांक्षा परिजनों के साथ निजी वाहन में नंगल जरियाला गांव आ रही हैं। वह रविवार रात को घर पहुंचेंगी। आकांक्षा ने बताया कि उनके साथ 240 विद्यार्थी फ्लाइट में आए हैं। उन्हें निशुल्क एयरलिफ्ट किया गया है। इस फ्लाइट में आने वाली आकांक्षा अकेली हिमाचली हैं। बताया कि वह यूक्रेन के उदरेस शहर में थीं। अभी जो हालात कीव और खारकीव में बने हैं, वैसे हालात उदरेस में नहीं हैं। भारतीय विद्यार्थियों में दहशत का माहौल है। उन्हें हॉस्टल में ही रखा गया था। भारतीय दूतावास से करीब 240 विद्यार्थियों को भेजने की सूची आने पर उन्हें उदरेस से सड़क मार्ग से पहले हंगरी लाया गया। वहां से दिल्ली भेजा गया। यूनिवर्सिटी ने उन्हें ऑनलाइन कक्षाएं लगाने को कहा है। बताया कि यूक्रेन में भारतीय दूतावास हर भारतीय का पता लगाकर उन्हें वहां से निकालने का प्रयास कर रहा है। आकांक्षा के पिता राकेश कुमार पूर्व सैनिक रहे हैं। उन्होंने बताया कि बेटी को एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन भेजा था, लेकिन रूस-यूक्रेन में छिड़े युद्ध के चलते उन्हें बेटी की चिंता थी।
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- फोटो : संवाद
घर पहुंची कलजन, बैंक से लिया 30 लाख ऋण, अब डिग्री की चिंता- हमीरपुर जिले की कलजन पुत्री केवल सिंह निवासी काही दी बाहल डाकघर पनयाली तहसील गलोड़ यूक्रेन से सकुशल अपने घर पहुंच गई हैं। घर पहुंचने पर परिवार ने राहत की सांस ली। कलजन एमबीबीएस के पांचवें सेमेस्टर की छात्रा हैं। कलजन ने बताया कि अब उन्हें अपनी डिग्री की चिंता सताने लगी है कि अब उनके भविष्य का क्या होगा? एमबीबीएस करने के लिए पांच साल यूक्रेन में लगा दिए। माता-पिता ने बैंक से लोन लेकर 30 लाख रुपये खर्च किए। अब यूक्रेन में युद्ध के चलते वहां के हालात खराब होने से भविष्य की चिंता सताने लगी है। कलजन के पिता केवल सिंह ने बताया कि भगवान की कृपा से बेटी सकुशलता घर आ गई। परिवार ने घर पहुंचने पर राहत की सांस ली है। हालांकि, कलजन युद्ध से पूर्व ही 23 फरवरी को यूक्रेन से बाहर निकल आई थीं और दिल्ली में अपने रिश्तेदारों के पास ठहरी हुई थी। 
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शिमला पहुंचीं यूक्रेन में फंसी छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
यूक्रेन से दो विशेष विमानों से मुंबई और वहां से दिल्ली लाए गए राज्य के 33 एमबीबीएस विद्यार्थी रविवार को घर पहुंचे। दिल्ली से प्रदेश के विभिन्न रूटों पर रवाना होने वाली हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की वोल्वो और साधारण बसों से विद्यार्थियों को घर पहुंचाया गया। निगम के जीएम (ऑपरेशन) पंकज सिंघल ने बताया कि बसों से 30 विद्यार्थी आए, जबकि तीन अपनी परिवहन व्यवस्था करके प्रदेश लौटे। 

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शिमला पहुंचीं यूक्रेन में फंसी छात्राएं। - फोटो : संवाद
दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे इन विद्यार्थियों से सहायक रेजिडेंट कमिश्नर ने संपर्क साधा और इसके बाद उनके दस्तावेजों की जांच करके इनको एचआरटीसी की बसों से मुफ्त यात्रा सुविधा देकर प्रदेश में लाया गया है। रविवार सुबह 7:14 बजे दिल्ली-पालमपुर रूट पर चलने वाली वोल्वो बस में छह विद्यार्थी सवार हुए। इनमें से दो लठियानी, तीन हमीरपुर और एक ऊना में उतरा। 9:25 बजे दिल्ली-शिमला वोल्वो बस में सात विद्यार्थी सवार हुए। इनमें चार चंडीगढ़, एक सोलन और दो शिमला पहुंचे। 10:15 बजे दिल्ली-धर्मशाला वोल्वो में एक विद्यार्थी धर्मशाला पहुंचा। 

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- फोटो : संवाद
मुंबई से हिमाचल भवन दिल्ली पहुंचे अंकुश, मंडी के लिए रवाना- यूक्रेन से वतन वापसी पर मंडी जिले के धर्मपुर के अंकुश ने बताया कि वे रोमानिया से मुंबई पहुंचे। यहां उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सभी यात्रियों का स्वागत किया। उसके बाद हिमाचल भवन दिल्ली लाया गया। यहां आवभगत के बाद वे अपने प्रदेश हिमाचल के लिए रवाना हुए। सिंहन गांव के अंकुश ठाकुर के साथ हिमाचल प्रदेश के दो और युवा भी वतन लौटे हैं। इनमें एक सरकाघाट तो दूसरा सोलन से है। अंकुश ठाकुर सोमवार को ही अपने गांव पहुंचेंगे। रविवार को वह मंडी में अपनी बहन के पास रुकेंगे। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया। उधर बहरी पंचायत और धर्मपुर के युवक अभी भारत में नहीं पहुंचे हैं। अंकुश के पिता कश्मीर सिंह ने सरकार का आभार जताया। कहा कि भगवान के आशीर्वाद से बेटा सुरक्षित लौट आया है। 
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यूक्रेन से शिमला पहुंची बेटी को गले से लगाते परिजन। - फोटो : संवाद
सड़कों पर गाडि़यां छोड़ भाग गए लोग, 10 किमी पैदल चल पहुंचे बॉर्डर तक- यूक्रेन से रविवार दोपहर अपने घर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी बद्दी पहुंची छात्रा आकांक्षा ने बताया कि भारत सरकार ने बोकोगनियल स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से लेकर बॉर्डर तक बस की व्यवस्था की थी। बमबारी के चलते राजधानी कीव और अन्य स्थानों पर सड़कों पर गाडि़यां खड़ी कर भाग गए। ऐसे में कड़ाके की ठंड में 10 किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया के बॉर्डर पर पहुंचे। यहां एक पेट्रोल पंप में ठहराया गया। ठंड की वजह से कुछ की तबीयत खराब हो गई। लोग यहां आकर जान बचाने के लिए घुस गए।  पासपोर्ट न होने की वजह से वह घर वापस नहीं आ सकते थे लेकिन भारत सरकार ने यहां से निकालने के लिए न केवल बस की व्यवस्था करवाई बल्कि एयर टिकट से लेकर खाने पीने तक की भी अच्छी व्यवस्था थी। उनकी बस पर भारत का झंडा लगाया गया था जिसके चलते उन्हें कोई समस्या नहीं आई। रोमानिया से छह घंटे की फ्लाइट के बाद सुबह तीन बजे  दिल्ली पहुंचे। आकांक्षा ने बताया कि कुल 240 छात्र थे जिनका केंद्रीय उड्डयन ज्योतिराव सिंधिया समेत सैकड़ों लोगों ने स्वागत किया। 
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