शहीद का पार्थिव शरीर करीब 2.42 बजे घर पहुंचा। शहीद को देखकर पत्नी ममता बेसुध हो गई, जबकि राकेश कुमार की मां, बहनों और बच्चों का रो रो कर बुरा हाल था। उनके पिता चिरंजी लाल चुपचाप आंगन में बैठे रहे।
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अंतिम रस्में निभाईं गई। पिता को तिरंगे में लिपटा देखकर दोनों बेटे की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। सेना के जवानों ने उन्हें ढांढस बंधाया। 3.16 बजे अंतिम यात्रा शुरू हुई। भारत की जय और जब तक सूरज चांद रहेगा राकेश तेरा नाम रहेगा के नारों से माहौल गुंजायमान हो गया। राकेश कुमार अमर रहे के नारे भी लगाए गए।
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तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव झंडूता चुनाव क्षेत्र के घमारपुर पहुंचे शहीद हवलदार राकेश कुमार को देखकर हर किसी की आंख नम थी। यहां उनकी मां कौशल्या देवी ने तिलक लगाकर और पत्नी ममता ने गाल चूमकर जांबाज को अंतिम विदाई दी। सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से शहीद हवलदार राकेश कुमार को अंतिम विदाई दी।
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बड़े बेटे मनीष ने पिता की चिता को 3.59 बजे सहरयाली खड्ड किनारे मुखाग्नि दी। सेना की टुकड़ी ने कै. अविनाश कुमार की अगुवाई में और जिला पुलिस टीम ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बुधवार को किन्नौर में हिमखंड की चपेट में आने से 7 जेके राइफल में हवलदार राकेश कुमार शहीद हो गए।
शुक्रवार दोपहर 1.45 पर सेना के हेलीकॉप्टर से हवलदार राकेश कुमार की पार्थिव देह शाहतलाई पहुंची। सैकड़ों लोग हेलीपैड पर पहुंचे थे। पूरा गांव चीखों पुकार से गूंजने लगा।