उधर, जिला राजस्व अधिकारी पवन कुमार शर्मा ने बताया कि यशपाल के पुत्र आनंद गत दिवस हमीरपुर कार्यालय आए थे। उन्होंने रिकॉर्ड की मांग की है। रिकॉर्ड बहुत पुराना है। उर्दू भाषा जानने वाले पूर्व कानूनगो को बुलाया गया है। यशपाल को जब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, तब वह सिर्फ 28 वर्ष के थे। उनका जन्म 3 दिसंबर 1903 को फिरोजपुर (पंजाब) में हुआ था। उनके पूर्वज हमीरपुर के भूंपल गांव के थे। दादा गरडूराम विभिन्न स्थानों पर व्यापार करते तथा भोरंज तहसील में टिक्कर भरियां और खर्वारियां के निवासी थे।
पिता हीरालाल दुकानदार तथा तहसील के हरकारे थे। वह जिला महासू के अंतर्गत रियासत अर्की के चांदपुर ग्राम से हमीरपुर में शिफ्ट हुए थे। वर्ष 1937 में यशपाल को जेल से मुक्त तो कर दिया गया। उनके पंजाब प्रांत जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लखनऊ जेल से रिहाई के बाद यशपाल ने संयुक्त प्रांत की राजधानी लखनऊ में ही बस जाने का निर्णय ले लिया था। यशपाल का निधन 26 दिसंबर, 1976 को अपने संस्मरणों सिंहावलोकन का चौथा भाग लिखते समय हुआ था।
यशपाल ने महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में भाग लिया था। नेशनल कॉलेज लाहौर में पढ़ाई के दौरान उनकी मित्रता सरदार भगत सिंह से हुई। यशपाल ने भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के साथ आजादी के आंदोलनों में भाग लिया। कई जगह बम बनाने के लिए गुप्त रूप से विस्फोटक तैयार किए।
1929 में उन्होंने ब्रिटिश वाइसराय लॉर्ड इरविन की रेलगाड़ी के नीचे बम विस्फोट किया। लाहौर में बोर्सटल जेल से भगत सिंह को मुक्त कराने का प्रयत्न या। 1932 में इलाहाबाद में पुलिस से मुठभेड़ के समय पिस्तौल में गोलियां समाप्त होने पर यशपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें केवल सशस्त्र मुठभेड़ के दंड के रूप में आजीवन कारावास दिया गया।