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स्वतंत्रता सेनानी यशपाल की जमीन पर हो गया कब्जा, वाइसराय की रेलगाड़ी के नीचे किया था बम विस्फोट

Tue, 03 Dec 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
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Yashpal - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल का गौरव माने जाने वाले और देश की आजादी की लड़ाई में सरदार भगत सिंह के साथी रहे महान क्रांतिकारी और लेखक यशपाल को हिमाचली बताने और राज्य स्तरीय समारोह करवाने वाली प्रदेेश सरकार को यही मालूम नहीं है कि उनका घर कहां है? सरकार ने हमीरपुर जिले के नादौन में यशपाल की प्रतिमा लगाई है या यशपाल चौक बनाया है।

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नादौन में ही यशपाल साहित्य सदन भवन का निर्माण भी करवाया है। इसमें पुस्तकालय भी चल रहा है। कहानीकार और उपन्यासकार यशपाल को भारत सरकार ने वर्ष 1970 में पद्मभूषण से नवाजा। इनकी स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया। इस बार भी विभाग धर्मशाला में मंगलवार को उनकी राज्यस्तरीय जयंती समारोह मना रहा है। यशपाल के पुत्र कनाडा निवासी आनंद पिछले कई सालों से जिला प्रशासन और सरकार से अपने पिता के पैतृक गांव का राजस्व रिकॉर्ड लेने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।

उन्होंने बताया कि पिता और दादा ने बताया था कि हमीरपुर के उपमंडल भोरंज के टिक्कर खातरियां में उनका घर था। भूंपल में दादी की बहन रहती थीं। राजस्व अधिकारियों ने बताया कि कई सालों तक यहां नहीं रहने के चलते उनके राजस्व रिकॉर्ड में लाल लकीर लगी है। बताया जा रहा है कि किसी दूसरे व्यक्ति ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। 

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यशपाल को 28 वर्ष की उम्र में सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा

उधर, जिला राजस्व अधिकारी पवन कुमार शर्मा ने बताया कि यशपाल के पुत्र आनंद गत दिवस हमीरपुर कार्यालय आए थे। उन्होंने रिकॉर्ड की मांग की है। रिकॉर्ड बहुत पुराना है। उर्दू भाषा जानने वाले पूर्व कानूनगो को बुलाया गया है। यशपाल को जब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, तब वह सिर्फ 28 वर्ष के थे। उनका जन्म 3 दिसंबर 1903 को फिरोजपुर (पंजाब) में हुआ था। उनके पूर्वज हमीरपुर के भूंपल गांव के थे। दादा गरडूराम विभिन्न स्थानों पर व्यापार करते तथा भोरंज तहसील में टिक्कर भरियां और खर्वारियां के निवासी थे।

पिता हीरालाल दुकानदार तथा तहसील के हरकारे थे। वह जिला महासू के अंतर्गत रियासत अर्की के चांदपुर ग्राम से हमीरपुर में शिफ्ट हुए थे। वर्ष 1937 में यशपाल को जेल से मुक्त तो कर दिया गया। उनके पंजाब प्रांत जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लखनऊ जेल से रिहाई के बाद यशपाल ने संयुक्त प्रांत की राजधानी लखनऊ में ही बस जाने का निर्णय ले लिया था। यशपाल का निधन 26 दिसंबर, 1976 को अपने संस्मरणों सिंहावलोकन का चौथा भाग लिखते समय हुआ था।
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ब्रिटिश वाइसराय लॉर्ड इरविन की रेलगाड़ी के नीचे बम विस्फोट किया

यशपाल ने महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में भाग लिया था। नेशनल कॉलेज लाहौर में पढ़ाई के दौरान उनकी मित्रता सरदार भगत सिंह से हुई। यशपाल ने भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के साथ आजादी के आंदोलनों में भाग लिया। कई जगह बम बनाने के लिए गुप्त रूप से विस्फोटक तैयार किए।

1929 में उन्होंने ब्रिटिश वाइसराय लॉर्ड इरविन की रेलगाड़ी के नीचे बम विस्फोट किया। लाहौर में बोर्सटल जेल से भगत सिंह को मुक्त कराने का प्रयत्न या। 1932 में इलाहाबाद में पुलिस से मुठभेड़ के समय पिस्तौल में गोलियां समाप्त होने पर यशपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें केवल सशस्त्र मुठभेड़ के दंड के रूप में आजीवन कारावास दिया गया।  
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