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Gaurav Diwas: अमर उजाला के 75 वर्ष पूरे होने पर शिमला में जश्न, कर्मचारी और परिजन हुए शामिल, देखें तस्वीरें

Tue, 18 Apr 2023 11:47 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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अमर उजाला के 75 वर्ष पूरे होने शोघी में हुआ कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मंगलवार को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शहरवासी, स्कूली बच्चे और गण्यमान्य लोग अखबार के कार्यालय आए। बच्चों और उनके परिवार ने अखबार बनने से लेकर छपने तक की प्रक्रिया देखी। इस दौरान खूब मौज-मस्ती भी हुई।

मंगलवार का दिन अमर उजाला स्टाफ और उनके परिवारों के लिए बेहद खास रहा। मौका था अमर उजाला के 75 वर्ष पूर्ण होने पर गरिमामयी समारोह का। गर्व मिश्रित इस मौके का संस्थान के कर्मचारियों ने अपने परिजनों के साथ जमकर लुत्फ उठाया। दिन हो या रात, हमेशा अखबार को तैयार करने की जद्दोजहद से रोजाना जूझने वाले कर्मचारी इस दौरान खुशनुमा माहौल में सहयोगियों और परिजनों के साथ चहकते दिखे। 

शिमला से सटे शोघी में अमर उजाला की आधुनिक प्रिंटिंग यूनिट में मंगलवार को अमर उजाला के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया गया। कार्यक्रम में अमर उजाला के कर्मचारियों और उनके परिजनों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। कर्मचारियों और उनके परिजनों की मंच पर दी गईं प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। 
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कर्मचारियों व परिजनों ने मनाया जश्न। - फोटो : अमर उजाला
  संस्थान के कर्मचारियों ने इस खास मौके पर गीत-संगीत, नृत्य और लेखन से जुड़ी अपनी छुपी हुई प्रतिभा का भी बखूबी प्रदर्शन कर सभी को आचंभित कर दिया। परिवारों से आए बच्चों की प्रस्तुतियों पर कर्मचारी फूले नहीं समाए और उन्होंने तालियां बजाकर उनकी खूब हौसला अफजाई भी की।
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एंजल बहल व आकर्षित उपवेजा - फोटो : अमर उजाला
एंजल बहल की पहाड़ी नाटी की प्रस्तुति ने मन मोहा। आकर्षित उपवेजा की गिटार के साथ फिल्मी और पहाड़ी गीतों की प्रस्तुति ने खूब वाहवाही लूटी। वंश धीमान और कुबेर धीमान ने गायत्री मंत्र प्रस्तुत किया। अश्मिता सिंह ने स्वलिखित कविता प्रस्तुत की, जबकि अमर उजाला प्रोडक्शन टीम के सदस्य आशीष पांडे ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम के आखिर में कर्मचारियों ने डीजे की धुन पर थिरकते हुए धमाल मचाया।

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बच्चों ने किया नृत्य। - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला के गौरवशाली सफर के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मंगलवार को राजधानी शिमला के शोघी स्थित प्रिंटिंग यूनिट में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अमर उजाला परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम में बौद्धिक प्रतियोगिताओं के साथ ही लोक संस्कृति के रंग भी खूब उड़े।
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रिधिमा, आकर्षित व एंजल। - फोटो : अमर उजाला
कविता में आकर्षित, स्केच में रिधिमा और पेंटिंग में एंजल ने मारी बाजी
अमर उजाला स्टाफ सदस्यों के परिवारों से बच्चों ने गीत-संगीत और लोक नृत्य की प्रस्तुति से समां बांधा। वहीं कविता लेखन, स्केच मेकिंग और पेंटिंग प्रतियोगिताओं में भी बढ़चढ़कर भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतिभागी बच्चों ने स्केच और पेंटिंग के माध्यम से अमर उजाला के गौरवशाली सफर की झलक भी पेश की। कविता लेखन प्रतियोगिता में आकर्षित उपवेजा ने पहला, अष्मिता सिंह ने दूसरा और कौस्तुभ शर्मा ने तीसरा स्थान हासिल किया।
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स्केच मेकिंग। - फोटो : अमर उजाला
स्केच मेकिंग में रिधिमा ने अमर उजाला के नवोन्मेषक अतुल माहेश्वरी का चित्र उकेरकर पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान पर रहे तनिष्क ने अपनी प्रस्तुति अमर उजाला के पाठक पर केंद्रित करते हुए बखूबी उकेरी। मन्नत शर्मा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चित्र उकेरकर तीसरा स्थान हासिल किया। पेंटिंग प्रतियोगिता में एंजल बहल को पहला, समरजीत सिंह को दूसरा और आराध्य को तीसरा स्थान मिला।
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अमर उजाला परिवार ने केक काटा। - फोटो : अमर उजाला
विजेता प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इससे पहले अमर उजाला के 75 साल पूरे होने पर शिमला के शोघी में आयोजित कार्यक्रम में केक काटा गया। प्रेस में पूजा-अर्चना भी की गई।

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कौस्तुभ ने अखबार बनने के काम में लिया हिस्सा। - फोटो : अमर उजाला
कौस्तुभ ने अखबार बनने के काम में लिया हिस्सा
दयानंद पब्लिक स्कूल शिमला में नौवीं कक्षा के छात्र कौस्तुभ शर्मा ने कहा कि अमर उजाला के इस समारोह का उसका अनुभव बहुत अच्छा रहा। कौस्तुभ ने कहा कि उन्होंने सीखा कि खबर कैसे बनती है। यह कैसे एडिट हाेती है। इसके बाद यह कैसे पेज पर डिस्प्ले की जाती है। यह भी सीखा कि इस खबर के साथ फोटो का डिस्प्ले कैसे होता है। उसने साहित्यिक स्पर्धा में भी हिस्सा लिया। एक लघु कथा ‘एक शहर ऐसा भी प्रस्तुत की’। इसमें उसे पुरस्कृत भी किया गया।  आज यह भी जान लिया कि अखबार में कैसे काम होता है।

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तनिष्क ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
पहली बार जानी अखबार बनने की प्रक्रिया
अमर उजाला के गौरवमयी 75वें वर्ष के उपलक्ष्य पर आयोजित समारोह में मैंने पहली बार अखबार बनने की प्रक्रिया जानी। विभिन्न क्षेत्रों से खबरें आने पर उन्हें संपादकीय टीम एडिटिंग करती है। उसके बाद ही पेज बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। अंत में मशीन में उसकी छपाई की जाती है। -तनिष्क ठाकुर, शिमला 

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दीपिका,प्रिया अत्री - फोटो : अमर उजाला
गौरवान्वित महसूस किया
शिमला के शोघी स्थित अमर उजाला की प्रिंटिंग प्रेस में आयोजित कार्यक्रम शानदार रहा। मैंने कार्यक्रम में परिवार सहित हिस्सा लिया। अमर उजाला के विभिन्न पड़ावों के बारे में जानने का मौका मिला। विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। -दीपिका

पता चला, कैसे बनती है खबर
अमर उजाला के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में एक खबर कैसे तैयार होती है और फिर खबरों से भरी अखबार के हम लोगों तक पहुंचने की प्रक्रिया के बारे में अहम जानकारी मिली। सच में यह प्रक्रिया बहुत ही अलग कार्य है। -प्रिया अत्री

 

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प्रिया शर्मा, शिमला। - फोटो : अमर उजाला
जाना...कैसे खबर से बनता है अखबार
आज पता लगा कैसे घटनाएं खबर बनती हैं और अखबार के पन्नों पर छपती हंै। छपाई से पहले खबरें कैसे जुटाई जाती हैं, एडिटिंग कैसे होती है, कैसे खबरों को आकर्षक बनाया जाता है। छपाई के बाद अखबार कैसे दूर दराज क्षेत्रों तक पहुंचता है आज इसकी जानकारी मिली। - प्रिया शर्मा, शिमला।
 

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अंजलि और बेटी अराध्या - फोटो : अमर उजाला
पहली बार देखी प्रिंटिंग प्रेस
आज पहली बार हमने प्रिंटिंग प्रेस देखी। अखबार तैयार करने में कितने लोगों की मेहनत लगी होती है, आज इसकी जानकारी मिली। इंटरनेट मीडिया पर अमर उजाला डिजिटल कैसे काम करता है, इसका भी आज पता लगा। अखबार तैयार करने की बारीकियों को जानकर बेटी भी खुश हुई। - अंजलि और बेटी अराध्या

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आकर्षित उपवेजा - फोटो : अमर उजाला
कविता
कुछ दोस्त बुहत याद आते हैं

इन पुरानी तस्वीरों में ,
ये मेरे साथ खड़े नजर आते हैं,
मुड़के देखूं मैं अगर,
ताे कुछ दाेस्त बहुत याद आते हैं।।

उनके साथ बिताए पल,
मेरे दिल में घर कर जाते हैं,
मुड़के देखूं मैं अगर,
ताे कुछ दाेस्त बहुत याद आते हैं।।

लाेगों के लिए कैसे भी थे,
मेरे लिए वाे खास थे,
न जाने ऐसा क्या था उनमें,
जाे मेरे दिल के इतने पास थे।।

वो हंसना, लड़ना-झगड़ना,
वाे साथ खेलना याद आता है,
वाे दाेस्त, वाे क्लास,
वाे आखिरी बैंच याद आता है।
पर हमसे ज्यादा वाे बैंच शायद,
हमारे टीचर काे भाता था,
तभी हर सवाल का जवाब,
हमसे ही पूछा जाता था।।
अब जवाब न आने पर,
हम क्या ही कर सकते थे,
बस मन ही मन साेचते कि,
यार किसी और से भी पूछ सकते थे,
ऐसे हंसते-खेलते कई माैसम ढल गए,
हमारी दाेस्ती के बीज, एक पेड़ में बदल गए,
फिर कुछ रास्ते जिंदगी के,
माेड़ने पड़ गए,
जिनके साथ हंसता-खेलता था,
वाे दोस्त छोड़ने पड़ गए,
अब बस तस्वीराें में ही हम साथ, 
मुस्कुराते नजर आते,
मुड़के देखूं मैं अगर,
ताे कुछ दाेस्त बहुत याद आते हैं।।
-आकर्षित उपवेजा (शिमला)

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अमय शर्मा (धर्मशाला) - फोटो : अमर उजाला
 कविता
 कारवां 
राह में मुश्किलें हजार रही हाेंगी,
फिर भी आप कदम बढ़ाते गए,
1948 में एक सपना लिए आंखाें में,
हिम्मत और लगन काे बनाकर राेशनी 
हर अंधेरे काे चीरते हुए आप कदम बढ़ाते गए,
आप चलते गए, आप चलते गए।।
बैठकर सपनाें की नाव में, पतवार चलाना सीख गए,
खुद ही राह बनाई आपने, लहराें से लड़ना सीख गए,
अर्जुन सा रख निशाना, लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते गए,
आप चलते गए, आप चलते गए।।
आप थके नहीं, कभी रुके नहीं,
मुड़े नहीं कभी हटे नहीं,
निरंतर चलते गए और कारवां बनते गए,
75 वर्षाें की अब तक की इस सफल यात्रा में 
कितने ही परिवार आपसे जुड़ते गए,
जुड़ते गए, जुड़ते गए।।
- अमय शर्मा (धर्मशाला)
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अश्मिता सिंह - फोटो : अमर उजाला
कविता
 मिट्टी है अनमोल


मिट्टी के हैं रंग हजार 
लाल, पीली, काली, भूरी
पर है बड़ी ही गुणवान
देती है हमको सबकुछ 
रोटी, कपड़ा और मकान
आओ, हम सब करें मिट्टी का सम्मान
नहीं बदलने दे इसका रंग रूप
प्रण जीवन में हर कोई ये ले
तब हो जीवन में खुशहाली की बौछार
मिट्टी है जीवन का आधार
आज हम ले चलो ये प्रण
नहीं करेंगे मिट्टी की गुणवत्ता को कम
आओं-आओं बड़े, बूढ़े, बच्चे और जवान
सब करें मिलकर मिट्टी का सम्मान
पेड़-पौधे हैं इस धरा की शान
इन सबकी जान है मिट्टी में
मिट्टी है इस जग की शान
-अश्मिता सिंह, पुत्री- भूपिंद्र सिंह
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