फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश की नवदुर्गा: मिलिए इन नौ महिलाओं से, जिन्होंने हर क्षेत्र में नारी शक्ति को दिया बल

Wed, 13 Oct 2021 01:54 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 10
देश की नवदुर्गा - फोटो : Istock
नवरात्रि में लोग माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। हर दिन नारी का हर रूप देश भर में पूजा जाता है। नवरात्रि मात्र आध्यात्म से जुड़ा पर्व नहीं बल्कि ये नारी शक्ति का प्रतीक भी है। नवरात्रि के नौ दिन और अंत में कन्या पूजन संदेश देता है-नारी के सम्मान का। नवरात्रि की माता दुर्गा का हर रूप भी हर एक क्षेत्र में उनके पराक्रम, उनकी शक्तियों को दर्शाता है। माता कभी काली बन सकती हैं, तो कभी अन्नपूर्णा बन सकती हैं। देवी मां सरस्वती बन शिक्षा का आशीर्वाद दे सकती हैं तो लक्ष्मी बन सुख समृद्धि ला सकती हैं। विश्व की महिलाएं भी देवी के नौ रूपों की तरह ही हैं। वह घर संभाल सकती हैं, तो देश भी संभाल सकती हैं। बच्चों का लालन पालन कर सकती हैं तो सीमा पर देश की रक्षा भी कर सकती हैं। भारत में भी हर क्षेत्र में देवी के अनेक रूपों की तरह कई महिलाएं हैं। चलिए मिलते हैं देश की नवदुर्गा से, जिन्होंने हर क्षेत्र में महिला शक्ति को दिया बल और अपने अपने क्षेत्रों में कर रहीं हैं नेतृत्व
विज्ञापन

2 of 10
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
हमारे देश में लगभग हर घर में लड़कियों को मितव्ययिता सिखाई जाती है। ये सिर्फ घर चलाने नहीं बल्कि देश चलाने के लिए भी जरूरी है। निर्मला सीतारमण का नाम आज देश ही नहीं विदेश में भी प्रसिद्ध है। देश की पहली पूर्णकालिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मोदी सरकार में पद मिला। उसके बाद से वह लगातार देश की वित्त मामलों को संभाल रही हैं। सीतारमण केवल वित्त मंत्री ही नहीं बल्कि देश की रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं।  
विज्ञापन

3 of 10
किरण बेदी - फोटो : Instagram/kiranbediofficial
किरण बेदी

भारत की पहली महिला आईपीएस अफसर किरण बेदी का नाम कौन नहीं जानता। किरण बेदी ने बतौर महिला पुलिसकर्मी बहुत नाम कमाया। बाद में रिटायरमेंट के बाद किरण बेदी सामाजिक राजनीतिक एक्टिविस्ट बन गयीं। दिल्ली में हुए अन्ना आंदोलन में शामिल हुईं और यहां से राजनीति में कदम रखा। वर्दी में समाज की रक्षा करने वाली किरण बेदी जब राजनीति में आईं तो रणनीति से समाज को सुधारने के काम में जुट गयीं। साल 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में किरण बेदी भाजपा के टिकट से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार बनी। चुनाव तो न जीत सकीं लेकिन बाद में पुडुचेरी की उपराज्यपाल बनाई गईं। फिलहाल अब किरण बेदी इस पद पर नहीं हैं।

4 of 10
ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 

राजनीति में अगर इन दिनों किसी महिला की आवाज इतनी बुलंद है जो सत्ता, विपक्षी दलों और जनता तक पहुंच सके तो वह है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की। ममता बनर्जी महिला सशक्तिकरण का सबसे जबरदस्त उदाहरण हैं। एक महिला जो न केवल अपनी पार्टी की लीडर है, बल्कि प्रदेश की भी मुखिया है। लगातार तीन बार से किसी राज्य का मुख्यमंत्री बने रहना बड़ी बात होती है, वो भी एक महिला के लिए। ममता केंद्र में लगातार दो बार रेल मंत्री भी रह चुकी हैं।
विज्ञापन

5 of 10
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह - फोटो : Twitter/IAF_MCC
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह

हवाई जहाज उड़ाने से लेकर भारत की वायुसेना में फाइटर जेट उड़ाने तक के क्षेत्र में देश की बेटियों की हिस्सेदारी है। पिछले साल भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल शामिल हुए। फ्रांस से आए दमदार लड़ाकू विमान राफेल को उड़ाने वाली पहली महिला पायलट शिवांगी सिंह बनी। बनारस की शिवांगी सिंह ने मिग-21 की उड़ान भरी। लड़ाकू विमान के जरिए देश की रक्षा करने के मामले में महिलाएं पीछे नहीं हैं ,ये शिवांगी सिंह ने साबित कर दिया।  
 
विज्ञापन

6 of 10
हरी चांदना दसारी - फोटो : facebook/IASHarichandanaFans
आईएएस हरी चांदना दसारी

देश की प्रशासनिक सेवा में भी महिला अफसरों का दबदबा है। हर साल यूपीएससी की परीक्षा में सैकड़ों लड़कियां पास होती हैं, जो देश के अलग अलग क्षेत्रों में कार्यरत रह कर देश सेवा करती हैं। इन्हीं में से एक हैं आईएएस हरी चांदना दसारी। हरी चांदना देसारी उन अधिकारियों में से हैं, जो लाइमलाइट से दूर भारत की एक बड़ी समस्या को हल करने के दिशा में काम कर रही हैं। हरी चांदना दसारी ने इस पद तक पहुंचे के लिए अपनी विदेश में एक सम्मानजनक नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज पास किया। जहां लोग विदेश जाने के लिए आतुर रहते हैं तो वहीं हरी चांदना ने कड़ी मेहनत की ताकि यूपीएससी की परीक्षा पास करके देश की आईएएस अधिकारी बन सकें। उसके बाद हैदराबाद में वेस्ट प्लास्टिक बोतलों के जरिए सड़को और पार्कों को पौधों से सजा दिया। उन्होंने कचरे का री यूज करके शहर का कायाकल्प करने का काम किया।
विज्ञापन

7 of 10
IPS Sanjukta Parashar - फोटो : Facebook/Sanjukta Parashar
आईपीएस संजुक्ता परासर 

असम की तेज तर्रार महिला आईपीएस संजुक्ता पराशर उन दबंग अफसरों में से हैं, जिनके नाम कई उपलब्धियां हैं। उन्हें लेडी सिंघम के नाम से जाना जाता है। मात्र 15 महीनों में 16 एनकाउंटर करके न केवल संजुक्ता पराशर ने साथी पुलिस कर्मियों के लिए एक रिकार्ड सेट कर दिया बल्कि खूंखार बदमाशों और उग्रवादियों के मन में खौफ भी पैदा कर दिया। संजुक्ता पराशर पुलिस विभाग की लेडी सिंघम हैं। असम के लोग उन्हें आयरन लेडी ऑफ असम कहते हैं। 

8 of 10
मीराबाई चानू - फोटो : PTI
मीरा बाई चानू

देश के हर क्षेत्र में महिलाओं का दबदबा है। खेल के क्षेत्र में भी कई दमदार महिला खिलाड़ियों ने परचम लहराया है। इस साल हुए ओलंपिक खेलों में महिला एथलेटिक्स का नाम हर किसी की जुबान बन रहा। इन्हीं में से एक भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में भारत को पहला मेडल दिला दिया है। चानू ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल लाने वाली पहली भारतीय एथलीट हैं। उन्होंने 49 किलोग्राम भार में यह पदक जीता। 

9 of 10
हेतल और लेखनी देसाई - फोटो : Instagram/lekhinee26
बिजनेस वीमेन लेखनी देसाई 

बिजनेस के क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों से कंधें से कंधा मिलाकर चल रही हैं। मां बेटी की जोड़ी ने 50 हजार में बिजनेस शुरू किया और आज 10 करोड़ की वैल्यू बना ली। हेतल और उनकी बेटी लेखनी देसाई ने अपने शौक को व्यवसाय का रूप दे दिया। दोनों ने साथ मिलकर ब्रांड एथनिक की शुरुआत की। साल 2016 में लेखनी अपने बिजनेस डिग्री को लेने के बाद मां के साथ डिजाइनिंग का काम शुरू किया। इसके लिए उन्होंने फैब्रिक के कुशल कारिगर से 50 हजार रुपए में अजरक के फैब्रिक की खरीदारी की। उन्होंने उस फैब्रिक से कुछ कपड़ों को सिलवाया। कपड़ों को तैयार करने के बाद दोनों मां बेटी ने सोशल मीडिया पर उसकी मार्केटिंग स्टार्ट की। धीरे - धीरे उन्हें इस बिजनेस में लाभ होने लगा। साल 2016 से लेकर 2018 के बीच इस बिजनेस का ब्रांड टर्नओवर करीब 24 लाख रुपए था। बाद में ये बढ़कर करीब 1 करोड़ रुपए हो गया। 
विज्ञापन

10 of 10
चंदना दत्त - फोटो : Social media
शिक्षिका चंदना दत्त

बेटियों की शिक्षा के लिए काम कर रहीं बिहार की शिक्षिका चंदना दत्त मे मुहिम छेड़ी। बेटियों को पढ़ाने के लिए माता-पिता को जागरूक करना शुरू कर दिया। उन्हीं की मेहनत का नतीजा है कि आज जिस स्कूल में वह पढ़ाती हैं, वहां के कुल बच्चों में 60 फीसदी लड़कियां हैं। चंदना दत्त के शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए साल 2021 के नेशनल टीचर अवार्ड के लिए उनका चयन हुआ। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें