कपूरथला के गांव माना तलवंडी में बुधवार को शहीद नायब सूबेदार जसविंदर सिंह का पार्थिव शरीर पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन हो गया। शहीद नायब सूबेदार जसविंदर सिंह की 71 वर्षीय मां मनजीत कौर का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। परिवार का फौज से नाता बेहद पुराना है। पति, बेटों के बाद वह अपने पोते विक्रमजीत सिंह (शहीद जसविंदर सिंह का 13 वर्षीय बेटा) को फौज में भेजेंगी। उन्होंने कहा कि वह तो फौजियों की मां है। बेटे के जाने का दुख जरूर है, लेकिन उसने देश की खातिर अपनी जान न्यौछावर की है। तिरंगे में लिपटे बेटे के पार्थिव शरीर का मुंह मां ने बार-बार चूमा। बहादुरी के लिए सेना मैडल हासिल कर चुके शहीद जसविंदर सिंह 11 अक्तूबर को श्रीनगर के पुंछ में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। सुबह भारतीय सेना उनके पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ गांव माना तलवंडी में लाई। जहां कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह, प्रशासकीय, पुलिस व भारतीय सेना के उच्चाधिकारियों सहित हजारों लोगों ने जसविंदर सिंह की शहादत को नमन किया।
‘हाय...ओए...मैंनू तां तू धोखा दे गया, कहंदा सी 15 दिन बाद घर आवांगा...पर हमेशा लई छड्ड के चला गया’। यह शब्द रोती बिलखती शहीद नायब सूबेदार जसविंदर सिंह की पत्नी राज कौर के हैं। जो ऐसे बोलते-बोलते बार बार बदहवास हो रही थीं। उसे परिजन बार-बार जहां सांत्वना दे रहे थे। वहीं, बार-बार पानी पिलाकर इस दुख की घड़ी में संभलने की बात भी कह रहे थे। घर से लेकर श्मशानघाट तक शहीद की पत्नी का मार्मिक विलाप ही सुनाई दे रहा था।
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अर्थी को कंधा देता मृतक का बेटा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भुलत्थ के विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि केंद्र सरकार को शहीद जसविंदर सिंह के परिवार को एक करोड़ और एक सदस्य को नौकरी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूबा सरकार की ओर से 50 लाख रुपये और सरकारी नौकरी शहादत के आगे नाकाफी हैं।
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अंतिम बार बेटे को चूमती मां।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने कहा कि शहीद नायब सूबेदार जसविंदर सिंह के बेटा-बेटी की पढ़ाई का खर्च एसजीपीसी उठाएगी। उन्होंने कहा कि चाहे तो परिवार दोनों बच्चों को एसजीपीसी के स्कूल में दाखिल करवा दे या फिर जहां भी वह उन्हें पढ़ाने चाहते हैं, उनका पूरा खर्च एसजीपीसी वहन करेगी। उन्होंने कहा कि शहीद की शहादत को भुलाया नहीं जा सकता है।
बेटे को सलामी देती मां।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बुधवार सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर जैसे ही सैन्य अधिकारी शहीद नायब सूबेदार जसविंदर सिंह का पार्थिव शरीर गांव माना तलवंडी पहुंचा तो पूरा गांव में ‘शहीद जसविंदर सिंह अमर रहे’ के नारे गूंज उठे। पूरा गांव शहीद की शहादत को सलाम करने के लिए उमड़ा। गांव माना तलवंडी में पूरे मिलिट्री सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद की चिता को मुखाग्नि उनके 13 वर्षीय बेटे विक्रमजीत सिंह ने दी।