बाबा महाकाल का तांडव स्वरूप
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वर्ष में केवल एक बार होते हैं पांच रूपों में दर्शन
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि ऐसा इसलिए होता है कि यदि शिव नवरात्रि में बाबा के अलग-अलग रूप में दर्शन नहीं कर पाने वाले भक्त महाकाल बाबा के इन स्वरूप में दर्शन कर सके।
महाशिवरात्रि के बाद दूज के अवसर पर महाकाल के पांच स्वरूपों में दर्शन के लिए एक मान्यता यह भी है कि महाशिवरात्रि पर शिव विवाह के बाद भगवान शिव कई दिनों तक देवताओं को दिखाई नहीं दिए। इस पर देवताओं ने शिव के दर्शन करने के लिए प्रार्थना और तप किया। इस पर भगवान शिव ने दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए। इस मान्यता के अनुसार बाबा महाकालेश्वर के पांच स्वरूपों में दर्शन करने का विशेष महत्व हैं।