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... जब पूर्व सीएम ने कहा, संपादक ही तय करेगा मुझे कहां छपना, पढ़ें ये पूरा माजरा

Fri, 01 Mar 2019 04:52 PM IST
Amulya Rastogi अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ
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चंद्रभानु गुप्त - फोटो : डेमो
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चंद्रभानु गुप्त देखने में जितने सख्त लगते थे अंदर से उतने ही कोमल थे। कांग्रेस में टकराव व मतभेद तो जवाहर लाल नेहरू के समय से ही शुरू हो गए थे, पर इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस दो हिस्सों में बंटकर रही। बात कांग्रेस के विभाजन के बाद की है। प्रदेश में गुप्तजी कांग्रेस (संगठन) में थे और अन्य दलों के सहयोग से बनी सरकार के मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस (संगठन) ने लखनऊ से ‘हमारा संघर्ष’ नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रकाशन का फैसला किया।
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समाजवादी चिंतक और डॉ. राममनोहर लोहिया के लंबे समय तक निजी सचिव रहे नंदकिशोर उसके संपादक बनाए गए और डॉ. दाऊजी गुप्त प्रकाशक। पूर्व महापौर डॉ. दाऊ जी बताते हैं, ‘एक बार मुख्यमंत्री के रूप में चंद्रभानु गुप्त ने एक लेख छपने के लिए अखबार में भेजा।

नंदकिशोर जी ने इस लेख को अखबार के तीसरे पृष्ठ पर छापा। उनसे ईर्ष्या रखने वाले चापलूस किस्म के लोगों को तो गुप्त जी से नंदकिशोर जी की शिकायत करने के मौके की तलाश ही थी। पहुंचे गए उनके पास और कहा, ‘गुप्ता जी! नंदकिशोर बहुत मनमानी कर रहे हैं। उन्हें आपका भी कोई लिहाज नहीं है।
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कान भरने आए लोगों की लगाई लताड़

देखिए! आपने जो लेख भेजा उसे समाचार पत्र के तीसरे पृष्ठ पर छापा।’ गुप्त जी ने पूरी बात सुनी और फिर कान भरने आए लोगों को लताड़ते हुए कहा, ‘क्यों भाई! आप लोगों को इतना कष्ट क्यों हो रहा है। मैं मुख्यमंत्री हूं तो क्या पहले पृष्ठ पर छपने का अधिकारी हो गया।

यह तो संपादक ही तय करेगा कि कौन सा लेख या समाचार अखबार में कहां छपेगा। इससे क्या फर्क पड़ता कि वह किसने लिखा है। आप लोगों का काम पूरा हो गया हो तो अब यहां से जाइए।’ गुप्त जी बाद में अखबार के दफ्तर भी आए, लेकिन कभी इस घटना का कोई जिक्र नहीं किया।
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