लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही लखनऊ की सड़कों से लेकर गलियों तक पुलिस मुस्तैद है। क्या दिन, क्या रात, पुलिसकर्मी हर वक्त सड़कों और गलियों में नजर आने लगे। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ ही खाने-पीने का इंतजाम करने का जिम्मा भी इन लोगों ने उठा रखा है। सुरक्षा का दायित्व भी पुलिस बखूबी निभा रही है। पुलिसकर्मियों के लिए उनका फर्ज परिवार से भी बड़ा है। हालात यह है कई पुलिस वाले लगभग एक महीने से अपने माता-पिता, पत्नी व बच्चों से मिल तक नहीं पा रहे हैं। समय मिलते ही मोबाइल पर वीडियो कॉलिंग कर हालचाल लेते हैं। कुछ इंस्पेक्टर तो वीडियो कॉलिंग के जरिए अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं।
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प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह
- फोटो : amar ujala
लॉकडाउन में परिवार के साथ सामंजस्य कठिन
प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह को मार्च के पहले सप्ताह में हजरतगंज में तैनाती मिली। कुछ दिन में थानाक्षेत्र के बारे में जानकारी हासिल ही कर सके थे कि लॉकडाउन की घोषणा हो गई। वे अपने फर्ज के साथ ही परिवार की हर जरूरत के लिए मोबाइल का सहारा ले रहे हैं। करीब एक महीने से अधिक समय हो गया लेकिन घर नहीं जा सके हैं। परिवार कानपुर में रहता है। उन्हें परिवार और ड्यूटी के बीच सामंजस्य बैठाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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दरोगा प्रमोद सिंह
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राशन बंटवाने से लेकर गश्त तक का जिम्मा
दरोगा प्रमोद सिंह हजरतगंज के डालीबाग चौकी के प्रभारी हैं। लॉकडाउन के दौरान झुग्गी बस्तियों में खाना वितरण से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना भी उनकी जिम्मेदारी है। वहीं सुबह-शाम इलाके में गश्त कर रहे हैं। इसके अलावा पूरा दिन 1090 चौराहे पर बनी बैरिकेडिंग पर निगरानी करते गुजर रही है। हालात यह है कि घर भी महज चंद घंटों के लिए ही जाते हैं। वहां भी नहाने के बाद ही घर में प्रवेश करते हैं, ताकि बच्चों व परिवार को संक्रमण से बचाया जा सके।
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प्रभारी निरीक्षक अंजनी कुमार पांडेय
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वीडियो कॉलिंग कर बच्चों को पढ़ा रहे
हुसैनगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक अंजनी कुमार पांडेय ने 20 मार्च से ही परिसर में डेरा जमा लिया है। वह कृष्णानगर स्थित आवास पर नहीं जा रहे हैं। वहां बूढ़ी मां, भाभी और पत्नी के अलावा दो बेटे और दो भतीजे हैं। भाई भी कानपुर में बतौर इंस्पेक्टर तैनात हैं। लॉकडाउन में थानाक्षेत्र के अलावा परिवार की भी जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। हालात यह है कि पिछले 27 दिनों से वह घर नहीं गए हैं। रात को समय निकालकर वे वीडियो कॉलिंग कर 7वीं व 8वीं में पढ़ने वाले दोनों बेटों को पढ़ा रहे हैं। बुधवार को बेटे का जन्मदिन था। बेटे की कॉल आई, उसने घर आने को कहा। ड्यूटी और कोराना संक्रमण को देखते हुए मना कर दिया। इस पर पत्नी घर पर केक बनाकर दोनों बेटों के साथ आधी रात को थाने पहुंचीं और पति को भी केक खिलाया।
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प्रभारी निरीक्षक शारदा चौधरी
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ड्यूटी के साथ घर की जरूरतों का भी ध्यान
महिला थाने में तैनात प्रभारी निरीक्षक शारदा चौधरी के पति सीतापुर में तैनात हैं। लॉकडाउन में उनके ऊपर बूढ़ी सास के अलावा दो बच्चों की भी जिम्मेदारी है। राजधानी में इकलौता महिला थाना होने के कारण यहां महिलाओं से जुडे़ काफी मामले आते हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्हें बैरिकेडिंग व चौराहों पर भी मुस्तैद रहना है। फिर भी वह ड्यूटी से कभी समझौता नहीं करतीं। वहीं बीच-बीच में अधिकारियों के निर्देश पर जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए भी जाती हैं। बच्चे भी जरूरतों के लिए कॉल करते हैं। इसके बाद देर रात को घर पहुंचकर खाना बनाने की भी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं।
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सुल्तानगंज चौकी प्रभारी महेंद्र सिंह
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प्रशिक्षण खत्म होते ही लॉकडाउन में तैनाती
हजरतगंज के ही सुल्तानगंज चौकी प्रभारी महेंद्र सिंह का होली के दूसरे दिन से निरीक्षक पद का प्रशिक्षण सीतापुर में था। वहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर निकले। इसके बाद बाराबंकी स्थित घर गए, मगर वहां सिर्फ अपना सामान रखा, वर्दी पहनी और ड्यूटी पर मुस्तैद हो गए। थाना परिसर में बने हॉस्टल में ही रहना और मेस में खाना हो रहा है। लॉक डाउन के दौरान सिर्फ दो बार ही घर जा सके हैं, वह भी कुछ घंटों के लिए। बच्चों का हालचाल मोबाइल पर ही लेते हैं।
संवेदनशील स्थानों पर रहती है ड्यूटी
राजधानी में विशेष सुरक्षा क्षेत्र बनाया गया था। इसमें विधानसभा, राजभवन, लोक भवन, सचिवालय व बापू भवन सहित कई महत्वपूर्ण हिस्से आते हैं। प्रभारी इंस्पेक्टर रंजना सचान को बनाया गया। रंजना घर की चिंता छोड़कर सुबह 6 बजे से देर रात तक ड्यूटी पर मुस्तैद रहती हैं। उनकी बेटी दिल्ली में पढ़ाई करती है। उसकी भी चिंता सताती हैैं। विशेष सुरक्षा क्षेत्र की जिम्मेदारी होने के कारण अक्सर देर रात को भी घर से निकलना पड़ता है। सके हैं, वह भी कुछ घंटों के लिए। बच्चों का हालचाल मोबाइल पर ही ले लेते हैं।