गमजदा परिवार के लोग खुद साथ लेकर आ रहे कब्र खोदने वाले मजदूर
यह विडंबना ही है कि एक तरफ बैकुंठधाम, गुलाला घाट पर शवों का दाह संस्कार चुनौती बन गया है, वहीं शहर के कब्रिस्तान में कब्र खोदने वाले कम पड़ रहे हैं। ऐशबाग, सुप्पा, निशातगंज, सर्वोदय नगर, गंजे शहीदां उजरियांव (गोमतीनगर) कब्रिस्तान का संचालन करने वाली कमेटी अंजुमन इस्लाहुल मुसलमिन के पदाधिकारियों का कहना है कि महामारी के दौर में शवों की बढ़ती संख्या के कारण बाहर से मजदूर किराए पर लाने पड़ रहे हैं और हालात ऐसे भी हैं कि गमजदा परिवार को खुद मजदूर लाने पड़ रहे हैं। खोदाई का रेट भी तिगुना देना पड़ा रहा है। इसके अलावा कब्रिस्तानों की सफाई व सैनिटाइजेशन की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, इसके लिए समिति ने नगर निगम से मदद मांगी है।
समिति के संयुक्त सचिव मुशर्रफ हुसैन का कहना है कि सामान्य दिनों में ऐशबाग कब्रिस्तान में 5 से 6 मय्यत आती थीं, अप्रैल में प्रतिदिन आने वाली मय्यतों का औसत 30-35 है। इसमें से 4-5 कोरोना संक्रमित होते हैं। इसी तरह सुप्पा कब्रिस्तान बुलाकी अड्डा में सामान्य दिनों में एक या दो मय्यत दफन होने आती थीं, लेकिन मौजूदा वक्त में ये संख्या 12-15 हो गई है। यही स्थिति क्रमश: अन्य कब्रिस्तान की है। पहले एक कब्र खोदने के लिए 500 रुपये देने पड़ते थे, अब 1200 से 1500 रुपये तक का भुगतान करना पड़ रहा है।