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इन कोरोना फाइटर्स को सलाम, बोले- कोरोना वार्ड में ड्यूटी करना अलग तरह का अनुभव

Mon, 01 Jun 2020 06:15 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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कोरोना फाइटर्स - फोटो : amar ujala
हौसला बुलंद हो तो हर जंग जीती जा सकती है। कुछ इसी अंदाज में लखनऊ में एसजीपीजीआई की टीम मरीजों के इलाज में लगी हुई है। कोई बच्चों को अकेला छोड़ कर आया है तो किसी को पूरे परिवार की चिंता है। इन तमाम पारिवारिक परेशानियों के बावजूद पीजीआई के नर्सिंगकर्मी पूरी तन्मयता से अपनी जिम्मेदारी निभाने में जुटे हुए हैं। नर्सिंगकर्मियों ने बताए अपने अनुभव।



 
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नर्स पूनम। - फोटो : amar ujala
शादी के माहभर बाद ही ड्यूटी
नर्स पूनम की शादी के कुछ दिन बाद ही उनकी ड्यूटी कोविड वार्ड में लग गई। वह बताती हैं कि मुश्किल है पर कोई शिकायत नहीं है। मुझे गर्व है कि बुरे वक्त में मैं देश और समाज के लिए कुछ कर पा रही हूं। व्हाट्सएप के जरिए परिवार से वीडियो कॉल कर हालचाल लेती रही। यहां ड्यूटी करके नर्सिंग की पढ़ाई सफल हो गई। वह कहती है कि हर एक दिन चुनौती भरा होता है, लेकिन वह चुनौती नहीं मेरी जिम्मेदारी है, जिसे मैं हर हाल में पूरा करती हूं। 


 
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नर्स राजकुमार। - फोटो : amar ujala
नींद नहीं आती
कोविड वार्ड में काम कर रहे मेल नर्स राजकुमार ने बताया कि वार्ड में ड्यूटी के दौरान एक तरफ मरीजों कि चिंता तो दूसरी तरफ घर में मौजूद दो छोटे बच्चे की चिंता रहती है। ऐसे में नींद ही नहीं आती। सात दिन की ड्यूटी के बाद 14 दिन क्वारंटीन में रहना अपने आप में अलग अनुभव है।


 

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नर्स सीमा। - फोटो : amar ujala
पति के हवाले घर 
नर्स सीमा कहती हैं कि उनकी तीन बेटियां हैं। दो अभी छोटी हैं, लेकिन काम तो करना है ताकि मरीजों की राहत मिले। जिस दिन यह प्रोफेशन चुना था, उसी दिन तमाम विकट परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार कर लिया था। पति पूरा सहयोग कर घर पर बच्चों को देख रहे हैं। बड़ी बेटी भी मदद कर रही है। अब क्वारंटीन के बाद ही उनसे मुलाकात होगी।



 
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नर्स वीरेंद्र। - फोटो : amar ujala
पीपीई किट पहनना मुश्किल लग रहा था 
स्टाफ मेल नर्स वीरेंद्र को जब शुरू में वार्ड में लगाया गया तो उनके लिए सबसे मुश्किल पीपीई किट पहनकर चलना था। क्योंकि वार्ड में भर्ती मरीज की तबीयत गंभीर हो जाती है तो दौड़कर मरीज के पास जाना होता है। मगर दो दिन बीतने के बाद वह पीपीई अब उनके आभूषण हो गए हैं। वह ज्यादातर समय पीपीई किट में रहते हैं। ड्यूटी के दौरान खाना भी नहीं खाते। घर वाले ही उनकी हिम्मत हैं। 
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