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कोरोना फाइटर्सः मोर्चे पर डटीं ये महिला अफसर, बोलीं- बच्चों को भी देंगे वक्त, पहले कोरोना से निपट लें

Wed, 22 Apr 2020 04:08 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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कोरोना फाइटर्स - फोटो : amar ujala
कोरोना के खिलाफ जंग में नगर निगम की महिला अफसर खुद फील्ड में उतर कर कर्मचारियों का हौसला बढ़ा रही हैं। इन अधिकारियों पर घर, परिवार की दोहरी जिम्मेदारी है। उन पर बच्चों के देखभाल का जिम्मा भी है, लेकिन फिलहाल वे बच्चों को वक्त नहीं दे पा रही हैं। यह दूसरों के लिए सीख का मौका है। प्रशासनिक सेवा और निकाय की केंद्रीय सेवा की ये महिला अफसर कहती हैं कि यह काम उनकी जिम्मेदारी है। वे वार्डों में सफाई व्यवस्था देखने, हॉटस्पॉट के साथ ही शहर में अन्य इलाकों में सैनिटाइजेसन कराने जैसी जिम्मेदारी निभा रही हैं। वे कम्युनिटी किचन में खाना बनवाने से लेकर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचने और उसके बाद कंट्रोल रूम व अन्य जगहों से आने वाली जनशिकायतें भी सुन रही हैं। ऐसे में ये सुबह से रात तक व्यस्त रहती हैं। इनके पास न खुद के लिए समय है न परिवार के लिए।
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अर्चना द्विवेदी, अपर नगर आयुक्त। - फोटो : amar ujala
काम सिर्फ बताना नहीं करके दिखाना भी है
हम अपने नीचे के कर्मचारियों को काम को लेकर आदेश और निर्देश तो हमेशा देते हैं, लेकिन इस बार जंग कोरोना से है। उसमें खुद भी एक सैनिक की तरह लड़ना है। जब हम फील्ड में रहकर काम करेंगे तो हमारे कर्मचारियों का भी उत्साह बढ़ेगा। साथ मिलकर काम करने से ही कोरोना को हरा सकेंगे। घर पर बच्चे हैं, उनका ख्याल तो हमेशा लगा रहता है। उसके लिए उनसे कई बार दूरी भी बनानी पड़ती है।  - अर्चना द्विवेदी, अपर नगर आयुक्त
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सविता शुक्ला, तहसीलदार - फोटो : amar ujala
बच्चे भी देते हैं जिम्मेदारी निभाने का हौसला
कोरोना की इस लड़ाई में कई तरह की जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। सफाई, सैनिटाइजेशन से लेकर जरूरतमंदों को खाना और राशन पहुंचाने के लिए जाना पड़ता है। यह काम इतना है कि 12 घंटे कहां गुजर गए, पता नहीं चलता। इस बीच बच्चों को समय नहीं दे पाती हूं। कई बार तो बच्चे खुद मास्क और सैनिटाइजर लाकर देते हैं। उससे हौसला और बढ़ जाता है। उसी हौसले के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने में कोई चिंता नहीं रहती है। - सविता शुक्ला, तहसीलदार

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संगीता कुमारी, उप नगर आयुक्त - फोटो : amar ujala
कई बार भूलनी पड़ती हैं अपनी दिककतें
कई बार ऐसा समय आता है, जब अपनी दिक्कतों को भूलना पड़ता है। कोरोना संक्रमण का यह समय ऐसा ही है। शहरवासियों को बचाना है तो उसके लिए त्याग तो करना ही होगा। दो छोटे बच्चे हैं, लेकिन इस वक्त उनको समय नहीं दे पाती हूं। सुबह छह बजे सफाई और कम्युनिटी किचन को लेकर आना पड़ता है। जाने का कोई समय नहीं है। घर से निकलने से पहले और रात में घर के अंदर जाने से पहले संक्रमण से बचाव के लिए एहतियात बरतते हैं। - संगीता कुमारी, उप नगर आयुक्त
 
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अम्बी बिष्ट, जोनल अधिकारी। - फोटो : amar ujala
कभी-कभी आता है कुछ करने का मौका
फील्ड में निकलकर काम करते समय संक्रमण का खतरा तो रहता है, लेकिन सब लोग घर बैठ जाएंगे तो काम कौन करेगा। जो आपात सेवा से जुड़े हैं, सभी काम कर रहे हैं तो फिर हमें भी जिम्मेदारी निभानी है। हां मगर इस कोरोना के डर के कारण अपनी सबसे प्यारी पेाती से नहीं मिल पाती हूं। घर जाते ही वह लिपटने को दौड़ती है, लेकिन संक्रमण के कारण तीन चार-घंटे बाद ही उससे गले लगा पाती हूं। - अम्बी बिष्ट, जोनल अधिकारी


 
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जेहरा अंदलीब, राजस्व निरीक्षक - फोटो : amar ujala
कोरोना से डरने के बजाय सतर्कता बरतें
मैं यहां अकेले रहती हूं। मेरा परिवार प्रयागराज में है। जरूरतमंदों के लिए खाना बनवाने, पैक कराने से लेकर उसे बंटवाने तक सभी काम करती हूं। हर दिन 12 घंटे से अधिक काम करना पड़ता है, लेकिन यह तो हमारा फर्ज है। कोरोना से डरने के बजाय सतर्क रहना होता है। हॉटस्पॉट इलाकों में जिम्मेदारी निभाने से कोई घबराहट नहीं होती है। परिवार दूर है, लेकिन फोन पर बात करने से हिम्मत बनी रहती है। - जेहरा अंदलीब, राजस्व निरीक्षक



 
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