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पंचतत्व में विलीन हुए नेताजी : अखिलेश ने दी मुखाग्नि, कई प्रदेशों के सीएम, पूर्व मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

Tue, 11 Oct 2022 09:10 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

अंतिम संस्कार के वक्त श्रद्धांजलि देने वालों में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य, राजस्थान केमुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव मौजूद रहे।
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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके बेटे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंत्रोच्चार के बीच मुखाग्नि दी। सैफई में हुए अंतिम संस्कार के दौरान कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री व अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें विदाई दी। जिस मिट्टी में वह खेलकूद कर सियासी ऊंचाई हासिल की, उसी जमीं पर जब उनकी चिता में अग्नि समर्पित की गई तो विभिन्न स्थानों से आए लोगों की आंखें नम हो गईं।
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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का शव मंगलवार सुबह सैफई स्थित आवास से गगनभेदी नारों केसाथ करीब पांच सौ मीटर दूर स्थित सैफई पांडाल ले जाया गया। इस दौरान शव वाहन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रो रामगोपाल यादव, शिवपाल यादव सहित पूरा परिवार साथ रहा। घर से लेकर पांडाल तक जाते वक्त मुलायम सिंह की शान में कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए पुष्पवर्षा करते रहे।
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शिवपाल और रामगोपाल ने मुलायम सिंह यादव को दी अंतिम श्रद्धांजलि - फोटो : एएनआई
सियासी पटल पर धुर विरोधी माने जाने वाले प्रो रामगोपाल और शिवपाल नेताजी पार्थिव शरीर के सामने न सिर्फ एक साथ नजर आए बल्कि साथ-साथ श्रद्धांजलि दी। यह देख मंच पर मौजूद परिवार के लोगों की आंखों से आंसू निकल आए। दरअसल हुआ यह कि मुलायम सिंह की पार्थिव देह पांडाल में दर्शन के लिए रखी गई।  पहले पार्टी का झंडा, फिर तिरंगा ओढाने के बाद  श्रद्धांजलि देने का क्रम शुरू हुआ। मंच पर मौजूद स्वामी प्रसाद ने श्रद्धांजलि देकर शिवपाल को आगे आने का इशारा किया। शिवपाल ने पुष्प चक्र उठाया तो बगल में खड़े प्रो रामगोपाल ने भी उसे पकड़ लिया। फिर दोनों ने साथ-साथ पुष्प चक्र अर्पित किया। इसके बाद शिवपाल ने पुष्प चढाए तो प्रो रामगोपाल ने भी पुष्प चढाया। यह देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई। लोगों का कहना था कि परिवार की एकजुटता केलिए नेताजी हमेशा सक्रिय रहे। आज उनकी अंतिम यात्रा में पूरा परिवार साथ-साथ है।

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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
सैफई पांडाल में राजकीय सम्मान के साथ उन्हें तिरंगा ओढाया गया। विधायकों व अन्य नेताओं ने पुष्पांजलि दी। इस दौरान हर किसी की आंखें नम हो जा रही थीं। लोग उनकी एक झलक पाने को बेताब नजर आए।
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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
विभिन्न दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी और अखिलेश यादव को ढांढस बंधाया। इस दौरान कोई हाथ पकड़ कर सुबकता नजर आया तो कोई अखिलेश को गले लगाकर सांत्वना देता रहा।
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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
दोपहर बाद करीब तीन बजे ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कराया। अखिलेश यादव ने जनेऊ धारण किए और पिण्डदान किया। जल आचमन के वक्त डिंपल यादव मंच पर आई तो दोनों की आंखों में आंसू छलक पड़ा। यह देख मंच पर मौजूद अन्य नेताओं की आंखों में भी आंसू टपकने लगा।
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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
कुछ देर बाद यहां से उनकी पार्थिव देह रामलीला ग्राउंड पर ले जाया गया। जहां 3.56 बजे अखिलेश यादव ने मुखाग्नि दी। जैसे ही मुलायम सिंह यादव की चिता को अग्नि समर्पित की गई कार्यकर्ता मुलायम सिंह अमर रहे, धरतीपुत्र अमर रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा, मुलायम तेरा नाम रहेगा के नारे लगाते रहे।

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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
परिसर में मौजूद महिलाएं दहाड़ मार कर रोने लगी तो कार्यकर्ता एक-दूसरे को दिलासा देते रहे। जब तक उनकी चिता जलती रही तब तक कोई हाथ जोड़े खड़ा रहा तो कोई उनकी चिता को एकटक निहारता रहा।

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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
सैफई पांडाल में अंतिम संस्कार के वक्त श्रद्धांजलि देने वालों में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार व उनकी बेटी सुप्रिया सुले, पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रफुल्ल पटेल, कारोबारी अनिल अंबानी, तेलगूदेशम पार्टी अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू  नायडू, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खडगे, प्रमोद तिवारी, वरुण गांधी, जयंत चौधरी, जयाबच्चन, अभिषेक बच्चन, राकेश टिकैत, सुब्रत राय सहारा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव अब नहीं है। ऐसे में समाजवादी पार्टी के सामने कई तरह की चुनौतियां भी  हैं। परंपरागत वोटबैंक को बढाकर केंद्रीय राजनीति में दखल देनी होगी ताकि क्षेत्रीय दलों में नेताजी के जमाने में मिला रूतबा कायम रहे। इसके लिए पार्टी को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।

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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
समाजवादी पार्टी ने 30 साल का सफर पूरा कर लिया है। प्रदेश में पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ी है। वोटबैंक में बेतहाशा वृद्धि हुई है। लेकिन केंद्रीय राजनीति में ताकत कम हुई है। पिछले दिनों राष्ट्रीय सम्मेलन में पांच साल केअंदर राष्ट्रीय पार्टी बनने का संकल्प लिया गया है।

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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
सियासी जानकारों का कहना है कि इसके लिए पार्टी को अपनी रणनीति भी बदलनी होगी। परंपरागत वोट को संभालने के साथ दूसरी जातियों के वोटबैंक को जोड़ना होगा। यह सही है कि सपा दलित वोटबैंक को रिझाने की भरकस कोशिश कर रही है। इसका फायदा मिल सकता है, लेकिन यह सच्चाई भी स्वीकारनी होगी कि सपा के परंपरागत वोटबैंक यादव- मुस्लिम पर दूसरे दल डोरे डाल रहे हैं।

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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
समाजवादी आंदोलन से निकले तमाम नेता या तो इस दुनिया से रुखसत हो चुके हैं अथवा दूसरे दलों में जा चुके हैं। ऐसे में मुलायम सिंह की सियासी रणनीति से सबक लेते हुए सभी जातियों के गुलदस्ते को सजाने का प्रयास करना होगा। प्रदेश की सियासत पर नब्ज रखने वालों का साफ कहना है कि सपा शीर्ष नेतृत्व को नए और पुराने वफादारों की शिनाख्त करनी होगी। पार्टी सत्ता से दूर है। ऐसे में हर वर्ग के लोगों को जोड़ने की दिशा में अभियान चलाना होगा।
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पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह यादव जिस वक्त राजनीति के सफर पर निकले थे, उस वक्त उनके साथ पूरा परिवार था। तब किसी में न राजनीति महत्वाकांक्षा थी और न ही कुछ खोने का डर। अब हालात बदल गए हैं। परिवार से लेकर रिश्तेदार तक राजनीति में सक्रिय हैं। शिवपाल अलग राह पर हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी मुखिया को दोहरी जिम्मेदारी निभानी होगी। एक तरफ राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी तो दूसरी तरफ परिवार की। मुलायम सिंह के भाई अभयराम ने कुछ समय पहले इस बात को स्वीकार किया था कि मुलायम सिंह के फैसले पर उनके सभी भाइयों की सहमति होती थी।
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