भारत में खेल संघों पर राजनेताओं के प्रभाव पर एथलीट मिल्खा सिंह का कहना है कि पूरी दुनिया में अध्यक्ष या दूसरे पदाधिकारियों का चुनाव वोट कराकर होता है। ऐसे में कम से कम सलाहकार के तौर पर पूर्व खिलाड़ियों व खेल विशेषज्ञों को अध्यक्ष अपने साथ रख सकता है। लखनऊ के देवा रोड पर एक आवासीय स्कूल के वार्षिक समारोह में शुक्रवार को मुख्य अतिथि बनकर आए मिल्खा सिंह ने अपनी जिंदगी, खेलों के विकास और राजनीति जैसे मुद्दों पर बात की।
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उन्होंने कहा, अब कलमाड़ी के आगे मैं चुनाव लडूं तो मुझे दो-तीन वोट भी नहीं मिलेंगे। यहां पहले ही तय हो जाता है कि वोट किसे देना है? हॉकी फेडरेशन का चुनाव परगट सिंह हार जाते हैं और उनके खिलाफ चुनाव एक 85 साल की महिला जीत जाती है जिसका हॉकी से कोई लेना देना नहीं।
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कम से खेलों के विशेषज्ञ जैसे पीटी ऊषा, श्रीराम सिंह, कपिल देव को बतौर सलाहकार तो अध्यक्ष अपने साथ रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि गोपीचंद ने एक मिसाल पेश की है। उन्होंने पीवी सिंधू जैसी खिलाड़ी देश को दी। दूसरे पूर्व खिलाड़ियों को भी ऐसा करना चाहिए।
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एशियन खेलों में पदक जीतने वाले 80 वर्षीय मिल्खा सिंह राजनीति में आने पर कहते हैं कि अगर मुझे इस क्षेत्र में आना होता तो 1958 में ही आ चुका होता। जब पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने मुझे ऑफर दिया था। लेकिन यह ऑफर न स्वीकारने की सिर्फ एक ही वजह थी कि मैं एक खिलाड़ी हूं, राजनीति से मेरा कोई वास्ता नहीं है।
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पूर्व प्रधानमंत्री ने यह ऑफर मुझे कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्णपदक जीतने के बाद एक मुलाकात में दिया था। मौजूदा समय में किसी राजनीतिक पार्टी से ऑफर मिलने की बात से उन्होंने इन्कार किया।
इस उम्र में भी तंदुरुस्त नजर आ रहे मिल्खा सिंह का कहना था कि युवाओं से मेरी एक ही उम्मीद है कि देश के लिए मेडल जीतें। इसके लिए सेहतमंद रहना जरूरी है। पंजाब में ड्रग्स के उपयोग पर उनका कहना था कि अब वहां की युवा पीढ़ी भी संभल चुकी है। नशे का उपयोग कम हुआ है।