बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने जारी किए गए बयान में मुसलमानों को समझाने का प्रयास किया कि समाजवादी पार्टी में पारिवारिक घमासान अभी भी थमा नहीं है, बस ऊपरी तौर पर ही सबकुछ ठीक दिखाने का प्रयास किया जा रहा है।
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उन्होंने अपने जारी किए गए बयान में गाजीपुर में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह की रैली को फ्लॉप बताया और कहा कि वहां पर सपा के दोनों गुटों के समर्थक आपस में लड़ रहे थे, उनमें आपस में कुर्सियां चल गईं।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था ध्वस्त है और जनता सपा सरकार के खोखले दावों से ऊब चुकी है। इसलिए मुसलमानो को सपा को वोट देकर अपने वोट खराब नहीं करना चाहिए।
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वहीं, भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने नोटबंदी से त्रस्त लोगों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने पर निंदा की और कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले से आम जनता में केंद्र के खिलाफ माहौल है। उन्होंने, फतेहपुर, संभल, मेरठ, आगरा व बागपत में बैंको के बाहर खड़े लोगों पर लाठीचार्ज करने को अन्याय की पराकाष्ठा बताया।
मायावती ने मुलायम के जन्मदिन का जश्न न मनाने पर कहा कि मुलायम ने नोटबंदी के कारण ही जन्मदिन नहीं मनाया। रेल दुर्घटना तो एक बहाना है। उन्होंने मुलायम की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह ऐसे ही हैं तो मुजफ्फरनगर दंगो के बाद सैफई में धूमधाम से अपना जन्मदिन क्यों मनाया था?