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Christmas celebration: धार्मिक सीमाओं से परे सबके जीवन में रंग भरते हैं ये सेंटा क्लाज, जानें- इनके बारे में

Sun, 26 Dec 2021 05:33 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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Christmas - फोटो : amar ujala
आ गया वो दिन जब सबकी इच्छाएं पूरी करने को सेंटा आएंगे। क्रिसमस एक ऐसा त्योहार है, जिसे मसीही समुदाय के लोग तो मनाते ही हैं, पर समाज का हर वर्ग, बच्चे, नौजवान इसमें हिस्सा लेते हैं और खुशियां बांटते हैं। क्रिसमस और सेंटा का गहरा रिश्ता है। बचपन से यही कहानियां बच्चों को सुनाई जाती हैं कि रात को पर्ची पर विश लिख कर तकिये के नीचे रख दो, सेंटा वो पूरी कर देगा।

आज भी माता-पिता क्रिसमस पर बच्चों को यही कह कर उन्हें खुश रखने के लिए मनपसंद उपहार मंगाते हैं। समाज का एक तबका ऐसा भी है, जिनकी नियति में अभाव लिखा है। ऐसे लोगों की इच्छा पूरी करने वाले, समय-समय पर उनमें खुशियां बांटने वाले लोग भी उनके लिए किसी सेंटा से कम नहीं। क्रिसमस के मौके पर आइए बात करते हैं ऐसे ही सेंटा क्लाज के बारे में।
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ग्यानेश वर्मा, रवीश चौधरी, आरपी तिवारी और मोहित गोयल। - फोटो : amar ujala
दान नहीं अधिकार की बात करते हैं ये
ग्यानेश वर्मा, रवीश चौधरी, आरपी तिवारी, मोहित गोयल....। जरूरतमंदों की मदद करने वालों की फेरहिस्त में कई ऐसे नाम हैं, जिन्होंने मदद करने, दान करने जैसे शब्दों को नया आयाम देने की कोशिश की है। ये जताते नहीं बस हर दिन इनकी कोशिश जारी है। सीए हेल्पिंग फाउंडेशन के इन सदस्यों ने तय कर रखा है कि जन्मदिन कभी वृद्धाश्रम में मनाएंगे या अनाथालय या फिर जरूरतमंदों के साथ। दूसरी अहम बात ये सामान बांटते नहीं रख देते हैं और हर किसी को ये अधिकार होता है कि अपनी जरूरत के हिसाब से ले ले।
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रश्मि सिंह और एकता खत्री। - फोटो : amar ujala
हर माह के बजट में शामिल होता है सेवा खर्च भी
रश्मिी सिंह, एकता खत्री और उनकी टीम ने कोरोना काल में अपने लिए एक नियम बनाया है। दरअसल टीम में सारी महिला सदस्य हैं और घर खर्च चलाना, बजट तय करना उनके ही जिम्मे है। ऐसे में उन्होंने तय किया है कि हर महीने घर खर्च का जो बजट बनता है, उसमें एक मद सेवा खर्च का होता है। इस पैसे से जहां और जब जरूरत होती है, वो जरूरत का सामान लेकर पहुंच जाती हैं। चाहे रक्तदान करने वालों की सेवा करनी हो। वृद्धों की सेवा करनी हो या फिर निर्धन बच्चों को खिलौने-चॉकलेट देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना हो, बिना सुर्खियां बटोरे ये अपना मकसद पूरा करती रहती हैं।

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- फोटो : amar ujala
पॉकेट मनी का थोड़ा हिस्सा इन बच्चों के नाम
नेता जी सुभाष चंद्र बोस गर्ल्स कॉलेज की स्वाति साहू, कलर्स तिवारी, जाह्नवी पांडेय, अंजू गौतम, साक्षी दुबे और कंचन प्रजापति समेत एकल ग्रुप के कई सदस्य रोजाना कुछ बच्चों के शैक्षिक विकास और व्यक्तित्व विकास पर काम करते हैं। स्वाति बताती हैं कि अपनी पॉकेट मनी का थोड़ा हिस्सा हम सहेज कर रखते हैं, इन बच्चों के लिए।
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अपर्णा नारायण - फोटो : amar ujala
बेटियों के आत्मनिर्भर होने की विश कर दी पूरी
बीकेटी के बेहटा गांव में रहने वाली युवतियां अपने पैरों पर खड़े होना चाहती थीं। उनकी इच्छा थी कि आय का कोई स्थायी जरिया हो। इस इच्छा को पूरा किया नई राहें संस्था ने। इसके लिए पैसे का प्रबंध किया लखनऊ राउंड टेबल 136, लेडीज सर्किल 84 और लखनऊ टाइगर्ज लेडीज सर्कल 137 ने। अध्यक्ष अपर्णा नारायण के नेतृत्व में कोशिश शुरू हुई, जिसमें सहयोग किया जस्टिस एससी वर्मा (रिटायर्ड) आशिमा, अर्चना, अश्विनी, प्रियंका, पंखुरी ने। क्रिसमस से पूर्व गांव में ब्यूटी पार्लर खुलवाए गए। इसके अलावा ये टीम लगातार युवतियों-महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने को काम कर रही है।
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