अटल बिहारी वाजपेयी बड़े नेता होने के बावजूद बतौर सांसद जिम्मेदारी निभाने में कोई कोताही नहीं करते थे। गंभीर से गंभीर बात को इस तरह कह देते थे कि संदेश चला जाए लेकिन बुरा भी न लगे। अटल जी ने लखनऊ से ही चुनावी राजनीति शुरू की थी। पर, शुरू में कामयाबी नहीं मिली। बाद में उन्होंने लखनऊ से लड़ने से तौबा कर ली।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : amar ujala
इसकेे बाद वह 1991 में ही चुनाव लड़ने लखनऊ आए। महिला डिग्री कॉलेज में शिक्षक अमित पुरी बताते हैं, ‘देश में नरसिम्हाराव की सरकार थी। अटल जी नेता प्रतिपक्ष थे। सांसद निधि की नई शुरुआत हुई थी। सभी सांसदों को 50-50 लाख रुपये अपने-अपने क्षेत्रों में काम कराने के लिए मिले।
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Atal Bihari Vajpayee
लखनऊ में पानी की काफी समस्या थी। अटल जी ने अपने संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा के सभी क्षेत्रों में प्रत्येक में 12-12 हैंडपंप लगवाए। लालकुआं पर उनका कार्यक्रम था। अटल जी बोले, ‘लोगों को बताने से पहले हैंडपंप का उद्घाटन तो कर दूं।’
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अटलजी
- फोटो : डेमो
भाजपा नेता उन्हें मुरादअली लेन और सब्दलबाग लेकर गए। अटल जी ने एक गिलास मंगवाया और गिलास में पानी लेकर पिया। फिर सभा में आए। बोले, ‘मैने नल चलाकर देखा है। पानी भी निकल रहा है और पीने लायक है। मशीनरी का क्या भरोसा। कोई पेंच ढीला हुआ और पूरी मशीन बेकार। वह चाहे लोहे की हो या सरकार की। सोचा देख ही लूं।
हैंडपंप कागज से निकलकर जमीन पर पहुंच गए हैं या नहीं। सब दुरुस्त हैं। लखनऊ वालों ने मुझे अपना सांसद बनाने से पहले ‘खूब पानी पिलाया है।’ सोचा! मशीनरी की गड़बड़ से लखनऊ वाले फिर मुझे ‘पानी पिलाने लगें उससे पहले खुद ही पानी पीकर देख लूं।’