दुनिया उन्हें एक राजनेता के तौर पर जानती है जो भारत के प्रधानमंत्री बने, लखनऊ उन्हें अपने सांसद की तरह देखता है, लेकिन स्वभाव से वे कवि ही हैं। मेरी नजर में उनकी लोकप्रियता कवि के रूप में ज्यादा है। राज्यपाल राम नाइक ने यह बातें संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में कहीं। इसमेें कवि कुंवर बेचैन, हरिओम पवार, अब्दुल गफ्फार, कविता तिवारी और कुमार विश्वास जैसे कवियों ने प्रस्तुतियां दीं, साथ ही अटल बिहारी को लेकर अपने संस्मरण भी सुनाए।
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कवि सम्मेलन
- फोटो : amar ujala
शुभारंभ राज्यपाल के वक्तव्य से हुआ, जिसमें उन्हाेंने बताया कि अटल बिहारी बात भी करते थे तो कई दफा वह कविता की शक्ल ले लेता है। भाजपा के पहले अधिवेशन में उन्हाेंने अपना लोकप्रिय भाषण ‘अंधेरा छंटेगा...’ दिया जो आज कविता की तरह बन चुका है। इसी तरह 92 में पद्म विभूषण से नवाजे जाने पर ‘मेरे प्रभु, मुझे इतना भी ऊंचा न कर देना...’ के जरिये अपने विनम्र कवि हृदय का परिचय दिया।
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वहीं, आयोजन में श्रोता कम संख्या में आए थे, इसे देखते हुए मेजबानी कर रहे कुमार विश्वास ने कहा कि लखनऊ में इस प्रकार के दृश्य देखने को नहीं मिलते, जहां कम संख्या में लोग आए हों। इसकी वजह शायद प्रचार की कमी रही। इस दौरान संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार, विशेष सचिव शिशिर और संयोजक आदित्य द्विवेदी मौजूद थे।
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अटल बिहारी के सांसद, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ राजनेता होने पर भी विनम्र स्वभाव को लेकर कुमार विश्वास ने लखनऊ के गन्ना संस्थान में आयोजित एक कवि सम्मेलन का संस्मरण सुनाया। इसमें छतरपुर के रहने वाले कवि श्रीप्रकाश पटेरिया ने उन्हीं की अनुमति से, उनके सामने, उनकी गिर चुकी सरकार की अपनी कविता से आलोचना की। इसमें बोल थे, ‘सोमनाथ से चला था रथ आपका, तो आपने कहा था कि बुलाया श्रीराम ने, जब 6 दिसंबर को ढांचा गिरा तो आपने कहा कि गिराया श्रीराम ने, जब पांच राज्यों में सरकार आई आपकी तो आपने कहा था कि जिताया श्रीराम ने, जब सारे काम राम द्वारा किए, तो मान लो कि आपको हराया श्रीराम ने।’ इस पर अटल ठहाका लगाकर हंस पड़े थे।
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देश प्रेम और पाकिस्तान को सबक का दिया संदेश
कवि अब्दुल गफ्फार और कविता तिवारी ने अपनी कविताओं में देश प्रेम और पाकिस्तान को सबक सिखाने का संदेश दिए। वहीं, कुंवर बेचैन ने ‘ये दुनिया सूखी मिट्टी है, तू प्यार के छींटे मार दे’ जैसी अपनी लोकप्रिय कविता से सभी को जोश से भर दिया। कवि हरिओम पंवार ने अपनी कविताओं में केंद्र सरकार को प्रेेरित करते हुए कहा ‘अब छोड़े डरते-डरते जीने को, दुनिया को अब तो दिखाओ 56 इंची सीने को’।
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मंच पर कुमार और हरिओम में तकरार
प्रस्तुति के दौरान हरिओम पंवार ने कुमार विश्वास और आम आदमी पार्टी के विवाद को लेकर कई दफा चुटकियां लीं। विश्वास के राज्यसभा नहीं पहुंच पाने पर उनसे सहानुभूति जताई। इस पर कुमार विश्वास ने उन्हें आगे और इस प्रकार की बात न करें। लेकिन पंवार नहीं रुके और दो-तीन टिप्पणियां और कर दीं, जिनमें पार्टी से उनके ताल्लुकात पर बात रखी। इस पर कुमार विश्वास ने कहा कि ‘अब मैं बदतमीज हो चुका हूं, आप आम आदमी पार्टी की बात न करें कविता पढ़ें।’ विश्वास के व्यवहार में रुखाई भांपते हुए पंवार ने बात को आगे नहीं बढ़ाया, बल्कि क्षमा मांगते हुए मंच छोड़ दिया और पीछे बैठकर विश्वास को सुना।
विश्वास ने साधा आप पर निशाना
अपनी कविता पाठ के समय कुमार विश्वास ने कहा कि वे किसी पार्टी का नाम लिए बगैर कविताओं में अपने विचार रखेंगे। उन्हाेंने निजी अनुभव से रचा गीत बताते हुए सुनाया ‘मुझे मारकर खुश है, सारा राज उस पर है, उसे जिद थी सिर झुकाओ तभी दस्तार बख्शूंगा, मैं अपना सिर बचा लाया, महल और ताज उस पर है।’