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आज का योग: इन स्वास्थ्य समस्याओं में बहुत फायदेमंद है भ्रस्तिका प्राणायाम, दिनचर्या में जरूर करिए इसे शामिल

Sun, 27 Mar 2022 11:07 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नियमित रूप से करें योगासन का अभ्यास - फोटो : Pixabay
शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजाना योगासनों का अभ्यास किया जाना आवश्यक माना जाता है। योग शरीर में रक्त और ऊर्जा के स्तर को बढ़ावा देने के साथ आपके फिटनेस को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। इसमें भी सांस वाले योगासन विशेषकर, प्राणायाम का रोजाना अभ्यास करना आपकी ऊर्जा को कई गुना तक बढ़ाने में सहायक हो सकता है। भस्त्रिका एक ऐसा ही प्राणायाम है जिसका नियमित रूप से अभ्यास करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कई प्रकार से लाभान्वित कर सकता है।

योग विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर के कई अंगों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ दिमाग को शांत रखने और सकारात्मक ऊर्जा के संचार को बढ़ाने में इस योग का नियमित अभ्यास करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। दिनचर्या में प्राणायाम को शामिल करके आप एक अलग सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति कर सकते हैं। इसके अलावा भस्त्रिका प्राणायाम को छाती और हृदय रोगों में भी काफी कारगर योगाभ्यास के रूप में देखा जाता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस योग से सेहत को होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।
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भस्त्रिका प्राणायाम है बेहद फायदेमंद - फोटो : iStock
भस्त्रिका प्राणायाम कैसे किया जाता है?
योग विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी आसन से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए उसका सही तरीके से अभ्यास करना बहुत आवश्यक होता है। किसी योग विशेषज्ञ से आसनों की सही प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेना बेहतर रहता है। भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठ जाएं। धीरे-धीरे सांस खींचते हुए अपनी सांस को बलपूर्वक छोड़ दें। इस प्राणायाम करते वक्त आपको अपनी छाती को फुलाना और पिचकाना है। आप शुरुआत धीमी गति से करें और इस प्रक्रिया को 4 से 5 बार दोहराएं।
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नियमित रूप से प्राणायाम के अभ्यास - फोटो : iStock
भस्त्रिका प्राणायाम करने के क्या लाभ हैं?
शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह की सेहत के लिए भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास को फायदेमंद माना जाता है।
  • शरीर और दिमाग की ऊर्जा को मिलता है बढ़ावा।
  • इस अभ्यास के दौरान फेफड़ों को प्रयोग में लाया जाता है, ऐसे में यह  प्राणायाम विषाक्त पदार्थों और अशुद्धियों को दूर करने में मदद करता है।
  • साइनस, ब्रोंकाइटिस और श्वसन संबंधी अन्य समस्याओं को कम करने में मदद करता है।
  • जागरूकता और इंद्रियों की शक्ति को बढ़ाने में मददगार है।
  • शारीरिक दोष और हार्मोन्स को संतुलित करने में मदद करता है।


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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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