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बाली की लेट नाइट पार्टी से हो गए हों बोर तो इन मंदिरों में करें दर्शन, मिलेगा सुकून

Fri, 19 Apr 2019 08:07 PM IST
प्रशांत राय लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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बाली का जैसे ही कोई नाम लेता है हर किसी के मन में पार्टी और नाइटलाइफ का ख्याल आता है। और ख्यालआना लाजमी है। क्योंकि वहां के पर्यटन के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। लेकिन इस शोर-शराबे के अलावा बाली अध्यात्म का एक बढ़िया केंद्र है। यहां हर ओर बहुत सारे प्राचीन मंदिर है यह जान कर आप हैरान हो जाएंगे। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं बाली में मौजूद प्राचीन हिंदू मंदिरों के बारे में जहां दर्शन कर आपको सुकून और शांति मिलेगी। ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का पावन संगम हेमाश ही बाली के हिंदू धर्मों में विश्वास करने वालों के लिए पूजनीय रहा है। बाली में घूमने योग्य कई मंदिर हैं। 
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तमन अयून मंदिर
पुरा तमन अयून बाली के बडूंग रीजेंसी में मौजूद एक मंदिर परिसर है जहां मंदिरों के साथ-साथ बाग-बगीचे और एक छोटा तालाब भी है। बाली द्वीप पर सबसे सुंदर मंदिर परिसर माने जाने वाले इस परिसर में एक हजार से ज्यादा मंदिर तो है ही साथ ही करीने से तराशी हुई घास वाले बगीचे भी हैं। 
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गुनुंग कावी मंदिर
गुनुन्ग कावी का मंदिर उबूद, बाली में शमशान परिसर के रूप में भी जाना जाता है। लेकिन यहां का मुख्य आकर्षण उदयन वंश के राजा वंगसू और उनकी रानियों को समर्पति दस मंदिर हैं जो चट्टान को काट कर बनाए गए हैं। इस मंदिर के पूर्व दिशा की ओर जाएंगे तो उत्तरी दीवार की ओर खुदे शिलालेख पर हाजी लुमाहिंग जुलु लिखा हआ आपको मिलेगा। 

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गोवा गज
इस मंदिर के आगे वाले हिस्से पर खूब सारे राक्षसों के चेहरों को शिल्पकारी द्वारा उकेरा हुआ है। लेकिन यहां का इतिहास उतना भयानक नहीं है। नक्काशी किए हुए चेहरों में मुख्य चेहरा एक हाथी का भी हो इसलिए इस हाथी गुफा भी कहते हैं। मंदिर में एक विशाल स्नानागार भी है जिसकी खुदाई साल 1950 के दशक में हुई थी। मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था। 
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पुरा तमन सरस्वती
कला और ज्ञान की देवी कहे जाने वाली सरस्वती मां को ये मंदिर समर्पित है। यह मंदिर बहुत ही छोटा है। लेकिन इस मंदिर परिसर में एक बहत बड़ा तालाब मौजूद है। जिसमें हजारों कमल के फूल खिले हुए हैं। इसलिए बाली जाएं तो यहां दर्शन जरुर करें। मंदिर में प्रवेश करने से पहले आपको यहां की पारंपरिक वेशभूषा सरोन्ग पहनना बहुत जरूरी है। 
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