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Ganesh Chaturthi 2021: गणपति बप्पा के तीन सबसे अनोखे मंदिर, बेहद रोचक है यहां का इतिहास

Fri, 10 Sep 2021 12:02 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बप्पा के मंदिर - फोटो : iStock
भगवान गणेश को न जाने कितने ही नामों से जाना जाता है। कुछ लोग उन्हें गणपति बप्पा भी कहते हैं। यूं तो उनके कई रूप हैं और देशभर में उनके अनेक मंदिर भी हैं, जहां लोग उनके दर्शन के लिए जाते हैं, अपनी मनोकामनाएं लेकर जाते हैं। भगवान गणेश के चमत्कारों की कई कहानियां पुराणों में मौजूद हैं। दरअसल, 10 सितंबर से गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरू हो रहा है, जो पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि इस बार कोरोना महामारी की वजह से लोगों को सलाह दी गई है कि वे घर पर ही गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना कर लें, क्योंकि बाहर जाने पर संक्रमण का खतरा है। कहीं भी भीड़ नहीं जुटानी है, वरना कोरोना एक बार फिर अपने रौद्र रूप में आ जाएगा और तबाही मचाना शुरू कर देगा। जब कोरोना खत्म हो जाए, तब आप कहीं भी आराम से आ-जा सकते हैं। आइए इस गणेश चतुर्थी के मौके पर हम आपको भगवान गणेश के कुछ अनोखे मंदिरों के बारे में बता दें, जिनका इतिहास बेहद ही रोचक है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
मोती डूंगरी गणेश मंदिर  
  • यह देश के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक है, जो राजस्थान के जयपुर में स्थित है। यहां स्थापित गणेश जी की प्रतिमा का इतिहास 500 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है। हालांकि वर्ष 1761 में यह प्रतिमा जयपुर के राजा माधोसिंह की रानी के पैतृक गांव मावली (गुजरात) से लाई गई थी।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
गढ़ गणेश मंदिर
  • वैसे तो सूंड भगवान गणेश की पहचान है, लेकिन इस मंदिर में बिना सूंड वाले गणेश जी की पूजा होती है। यह मंदिर भी जयपुर में ही स्थित है। यह राजस्थान के प्राचीन गणेश मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह द्वितीय ने कराया था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कनिपकम गणेश मंदिर 
  • आंध्रप्रदेश में चित्तूर जिले में स्थित इस मंदिर को पानी के देवता का मंदिर भी कहा जाता है। कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में चोल राजा कुलोठुन्गा चोल प्रथम ने करवाया था, जबकि 1336 ईस्वी में विजयनगर के राजा ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। यहां स्थापित भगवान गणेश जी की मूर्ति के बारे में कहा जाता है कि इसका आकार हर साल चमत्कारिक रूप से बढ़ रहा है।
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