पंजाब
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कारागार में आंदोलन
सजा तो सिर्फ शुरुआत थी, भगत सिंह का आंदोलन जेल की सलाखों के पीछे भी जारी रहा। उन्होंने लेख लिखकर अपने क्रांतिकारी विचार जाहिर किए। वह हिंदी, पंजाबी, उर्दू, बंग्ला और अंग्रेजी के जानकार थे, ऐसे में उन्होंने देशभर में अपना संदेश पहुंचाने का प्रयास जारी रखा। वहीं अदालत की कार्यवाही के दौरान जब कोर्ट में पत्रकार होते, तो भगत सिंह आजादी की मांग को लेकर जोशीली बातें करते, जो अगले दिन अखबारों के पन्ने पर नजर आतीं और हर नागरिक का खून आजादी के लिए खौल उठता।