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सुहागरात की वजह से बर्बाद हो गई इन महिलाओं की जिंदगी

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रिश्ता
शादी को लेकर पूरी दुनिया में लोगों में बहुत उत्सुकता रहती है। लेकिन, दुनिया के कुछ हिस्सों में शादी से जुड़े कुछ जश्न, बहुत से जख्म दे जाते हैं। उनकी शादी की पहली रात ऐसी गुजरती है, जिसकी बुरी यादें ताजिंदगी उनका पीछा करती हैं। कई अरब और मुस्लिम देशों में ये उम्मीद की जाती है कि शादी की पहली रात को महिलाएं कुंवारी हों।

बीबीसी अरबी ने अलग-अलग सामाजिक तबक़े से आने वाली कई महिलाओं से इस बारे में बात की और ये समझने की कोशिश की कि शादी से जुड़े इस रिवाज का उनकी शादीशुदा जिंदगी पर क्या असर पड़ा और किस तरह सेक्स एजुकेशन की कमी ने उनकी शादी पर प्रभाव डाला।

ये उन महिलाओं से हुई बातचीत के संक्षिप्त अंश हैं, जिस में वो ये बता रही हैं कि सुहागरात के साथ ही उनकी जिंदगी किस तरह उलट-पुलट हो गई।
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सोमैया, उम्र-33 साल
सोमैया ने अपने ब्वॉयफ्रैंड इब्राहिम से शादी करने के लिए परिवार से लंबी लड़ाई लड़ी थी। परिवार इसके लिए राजी नहीं था। लेकिन, सोमैया, इब्राहिम से बेइंतिहा मोहब्बत करती थीं और उसे किसी भी लड़की के लिए आदर्श शौहर मानती थीं। लेकिन, सोमैया को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उन्हें बहुत बड़ा सदमा लगने वाला है।

शादी के बाद इब्राहिम के साथ पहली रात को ही कुछ ऐसा हुआ, जब सोमैया की सारी मोहब्बत काफूर हो गई। शादी के बाद पहली रात या सुहागरात को 'प्रवेश की रात' भी कहते हैं। उस रात सोमैया के कौमार्य को लेकर उठे सवाल ने उसके दिल से इब्राहिम के लिए मोहब्बत को हमेशा के लिए मिटा दिया।

उस वक्त सोमैया की उम्र 23 बरस थी। वो सीरिया की राजधानी दमिश्क की यूनिवर्सिटी में अरबी साहित्य में पढ़ाई कर रही थी। उसकी डिग्री पूरी ही होने वाली थी। लेकिन, वो इब्राहिम से बहुत प्यार करती थी। इब्राहिम ने भी सोमैया से वादा किया था कि कुछ भी हो जाए, लेकिन वो उसे पढ़ाई पूरी करने देगा।

सोमैया का परिवार चाहता था कि वो पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर ले। साथ ही सोमैया के परिवार को इस बात से भी दिक्कत थी कि इब्राहिम के पास अपना घर नहीं था। फिर भी सोमैया, इब्राहिम से शादी के लिए अड़ी हुई थीं। उन्होंने अपने पूरे परिवार के विरोध का डट कर मुकाबला किया। यहां तक कि ये भी कह दिया कि वो इब्राहिम की मां के पास रहने चली जाएंगी, जिन्हें वो अपनी मां की तरह ही मानती थीं।
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लेकिन, सुहागरात को सोमैया को जबरदस्त सदमा लगा। अभी सोमैया शादी की रस्में निपटा कर ठीक से सांस भी नहीं ले पाई थीं कि उनका शौहर शारीरिक संबंधों के लिए जोर डालने लगा। सोमैया के पति इब्राहिम को बस उनका कौमार्य जांचने की जल्दी थी। 

इब्राहिम ने उसे ये कहकर समझाने की कोशिश की कि ये तो उसकी सोमैया के प्रति मोहब्बत है, जो वो उसे पाने के लिए इतना उतावला हुआ जा रहा है। सोमैया कहती हैं, 'मैं थकी हुई थी लेकिन मैंने सहयोग किया। उसकी जिद के आगे मैं झुक गई।'

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixa
'जब अचानक हवा हो गया रोमांस'
लेकिन, सोमैया का रूमानी एहसास तुरंत ही हवा हो गया। सोमैया को लग गया कि उसके पति को उसके कौमार्य पर शक हो गया है। इब्राहिम को ये लग रहा है कि वो वर्जिन नहीं है।

पहली बार यौन संबंध बनाने पर ज्यादातर महिलाओं को खून निकलता है। इसकी तादाद अलग-अलग महिलाओं में अलग होती है। इसकी वजह होती है, पेशियों की झिल्ली जिसे हाइमेन कहते हैं। लेकिन, डॉक्टरों और जानकारों के मुताबिक, पहली बार यौन संबंध बनाने पर हर लड़की को खून निकले, ये जरूरी नहीं है क्योंकि हाइमेन भी अलग-अलग तरह के होते हैं।

सोमैया अपने शौहर की प्रतिक्रिया के बारे में बताती हैं, "उसकी आंखों के खंजर मेरे सीने में चुभ रहे थे। उसने ये जाना ही नहीं कि उस नजर ने मेरी हस्ती को मिटा दिया।"

सोमैया बताती हैं, "इब्राहिम ने मुझसे बात करने की भी कोशिश नहीं की। मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं संदिग्ध हूं और मुझ पर मुकदमा चलने वाला है। शादी से पहले हमने बहुत सी बातों पर चर्चा की थी। यहां तक कि हम ने सुहागरात के बारे में भी बातें की थी, जो हमारी जिंदगी की सबसे हसीन रात होनी चाहिए थी। हमें ये लगता था कि हम एक-दूसरे के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। लेकिन, जब सुहागरात को खून नहीं निकला, तो सारी मोहब्बत हवा हो गई।"
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
'खून से सनी चादरें'
हालांकि, जिस समाज से सोमैया ताल्लुक रखती है, वहां ऐसी बातें आम हैं। लेकिन, सोमैया को इसका कतई अंदाजा नहीं था कि खुद उन्हें भी ऐसे तजुर्बे से गुजरना पड़ेगा। सोमैया को लगता था कि नई पीढ़ी के लोगों का नजरिया ऐसी बातों पर बदला है। उनका होने वाला पति भी अक्लमंद है, खुले जहन का है और उसने यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की है। लेकिन, जब शादी के अगले दिन इब्राहिम ने सलाह दी कि सोमैया के कौमार्य की तस्दीक के लिए उन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए, तो वो हैरान हो गई।

लड़कियों का कौमार्य परीक्षण, बहुत पुरानी परंपरा है। लेकिन, इसका मकसद और वर्जिनिटी जांचने का तरीका, दोनों ही हर जगह और समाज के हिसाब से बदल जाते हैं। बहुत से रुढ़िवादी परिवारों में किसी लड़की की शादी वाली रात को उसके कुंवारी साबित होने का जश्न बड़े जोर-शोर से मनाया जाता है। मसलन, दूल्हा और दुल्हन के परिवार को खून के धब्बों वाली चादर दिखाई जाती है। कई बार तो कौमार्य की तस्दीक होने पर खास आयोजन भी किए जाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वहीं, कौमार्य के सबूत हासिल करने के भी कई तरीके प्रचलित हैं। अगर किसी लड़की का हाइमन फट गया है, तो उसे सर्जरी के माध्यम से दोबारा सिला जा सकता है। फिर चीन में बने हुए प्रोस्थेटिक हाइमेन भी आते हैं। हालांकि महिलाओं को फिर भी अलग तरह के हालात का सामना करना पड़ सकता है। अगर उनका कौमार्य शादी वाली रात को साबित नहीं हुआ तो, उनकी सम्मान के नाम पर हत्या भी की जा सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
'जब सेक्स से नफरत हो गई'
शादी के अगले दिन सोमैया और उनका पति एक डॉक्टर से मिले। जिसने जांच के बाद बताया कि सोमैया का हाइमेन काफी मोटा था और ये तभी फटेगा, जब वो कुदरती तौर पर किसी बच्चे को जन्म देगी। ये जानकर सोमैया के खाविंद ने राहत की सांस ली और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

सोमैया ने मन बना लिया था कि वो इब्राहिम से जितनी जल्द हो सके तलाक लेंगी। तलाक लेने में इतनी देर करने के बारे में सोमैया बताती हैं, "मेरा पति मेरे लिए पूरी तरह से अजनबी बन चुका था। मुझे इस बात ने बहुत परेशान कर दिया था कि उसकी सोच भी वैसी ही थी, जैसी समाज के अन्य लोगों की।

वो भी वर्जिनिटी को लेकर वही सोच रखता था, जो दूसरे लोग। मुझे अब इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि वो अब आगे क्या कर सकता है। कुछ भी हो सकता था। मैं अब उसके साथ रह कर खुद को महफूज नहीं महसूस करती थी। उसने बरसों की मोहब्बत का कुछ ही लम्हों में कत्ल कर दिया था।"

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कुछ देर ठहर कर सोमैया आगे बताती हैं, "हकीकत तो ये है कि मुझे ये भी नहीं पता कि मैं अपना हाल कैसे बयां करूं। मैं उस रात के बाद उसके बारे में कैसा महसूस करती थी। लेकिन, जिस दिन से उसने मेरी हस्ती को महज एक मामूली हाइमन तक समेट दिया था, उस दिन से मेरे लिए उसके साथ एक-एक पल गुजारना दुश्वार हो गया था। आखिर मैं एक इंसान हूं, एक मांसपेशी का टुकड़ा तो नहीं।"

इस तरह उस दिन के बाद से सोमैया का जहनी सुकून छिन गया था। उन्होंने लोगों से मिलना-जुलना छोड़ दिया था। वो कहीं भी आने जाने से बचती थीं। उन्हें लगता था कि वो किसी आम महिला जैसी जिंदगी ही जी रही हैं, जहां पर पत्नी, अपने शौहर की रजामंदी के बगैर कमजोर होती है। उसकी अपनी कोई हस्ती नहीं होती।

अगले तीन महीनों तक वो बेमन से इब्राहिम के साथ शारारिक संबंध बनाती रहीं। सोमैया बताती हैं, "जब वो मेरे साथ हमबिस्तर होता था, तो मुझे अंदर से घिन आती थी। मैं उसे नहीं चाहती थी। मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता था क्योंकि मेरा सारा उत्साह सुहागरात को ही खत्म हो चुका था।

मैं बस उसके काम निपटाने का इंतजार करती थी, ताकि वो मुझे तन्हा छोड़ दे। उसके साथ किसी भी तरह का संबंध मुझे गंदा और धोखेबाजी जैसा लगता था। मेरे लिए ये एक काम था। एक जिम्मेदारी थी, जो निभानी होती थी। ये मोहब्बत नहीं थी।"

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शादी की रात के लिए सलाह
सोमैया, जिस समाज से ताल्लुक रखती हैं, वहां ऐसी बातें आम हैं। उनकी जैसी बहुत-सी महिलाएं हैं, जो मजबूती से बंद दरवाजों के पीछे खुद को खुद से छुपाए हुए जिंदगी जी रही हैं, ताकि समाज के तानों और नफरत भरे बोलों से खुद को बचा सकें। लेकिन, ऐसी शादियों से होने वाले बच्चों और परिवारों पर ऐसी बातों का बहुत बुरा असर होता है।

खासतौर से जब ऐसे मसलों पर खुल कर चर्चा नहीं होती। अमल अल-हामिद एक मनोचिकित्सक हैं। उन्होंने बीबीसी से इस बारे में बात की और बताया कि शादी की रात किसी लड़की की हालत कैसी होती है।

अमल, ऐसी तमाम लड़कियों को और जोड़ों को मशविरे देती हैं, जिनकी शादी होने वाली होती है ताकि अनचाही परेशानियां न पैदा हों।

अमल कहती हैं, "हमारे समाज में आम तौर पर मनोवैज्ञानिक सलाह नहीं ली जाती क्योंकि इसे लेकर कई तरह के पूर्वाग्रह हैं।" अमल अल-हामिद मानती हैं कि शादी से पहले ऐसे सलाह-मशविरों से शादीशुदा जिंदगी की शुरुआत कड़वाहट से नहीं होती। क्योंकि किसी भी शादीशुदा जिंदगी की बुनियाद एक-दूसरे से खुलकर बात करने और समझने से ही अच्छी बनती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अमल कहती हैं, "शादी करने वाले जोड़ों को चाहिए कि वो निकाह से पहले काम की बातें जान लें और कोई भी बात चाहे कितनी भी निजी क्यों न हो, उसके बारे में पूछें। जैसे कि हाइमेन के अलग-अलग प्रकार और ये सुनिश्चित करना की पहली बार संबंध कैसे करें, ताकि लड़कियों को इस से जीवन भर के लिए जख्म न मिलें। लेकिन, हकीकत में होता इसके उलट है। महिलाओं के लिए सुहागरात, जिंदगी की सबसे बुरी रात बन जाती है।"

अमल बताती हैं, "बहुत से मामलों में ऐसी समस्याओं को सुलझाने के बजाय, जख्म रिसने के लिए छोड़ दिए जाते हैं, जो आगे चल कर और परेशानी का सबब बन जाते हैं।"

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'कुंवारी होने का सबूत'
बीबीसी ने 20 लोगों से पूछा कि अगर, उन्हें पहली बार शारीरिक संबंध बनाते समय बीवियों में 'कौमार्य के सबूत' नहीं मिले, तो वो क्या करेंगे। इन लोगों की उम्र 20 से 45 बरस के बीच थी। इनमें से कई शादीशुदा थे और कई तो पढ़े-लिखे तबके से ताल्लुक रखते थे, जो डॉक्टर थे, अध्यापक थे और खुद के 'खुले जहन वाला' होने के दावे करते थे।

और इनके जवाब क्या थे? ज्यादातर के जवाब सीधे या घुमा-फिराकर नकारात्मक ही थे। ज्यादातर आदमियों ने चादर पर खून के दाग को लड़की के कुंवारी होने का सबूत माना। उनके मुताबिक ये खुशहाल शादीशुदा जिंदगी की बुनियाद थी, जो भरोसे और आपसी समझ के साथ शुरू होती थी।

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वहां न प्यार बचा था, न जुनून
शादी के कुछ महीनों बाद सोमैया ने अपने शौहर से तलाक लेने की ख्वाहिश जताई और साथ ही उसने ये भी कहा कि कोई भी बात उनका फैसला नहीं बदल सकती है, क्योंकि उन्हें, इब्राहिम के आस-पास अपनी जान को खतरा लगता है और पहली रात को जो हुआ, उसके बाद दोनों के बीच अब न प्यार बचा था और न ही जुनून।

सोमैया ने इब्राहिम को ये भी बताया कि उसके शक ने किस तरह उनके किरदार को नीचा दिखाया था और उन्हें अपमानित किया था।

सोमैया बताती है, "मेरी बातों से इब्राहिम को जबरदस्त झटका लगा था। उसे ये लगता था कि मर्द होने के नाते उसे इस बात का पूरा अख्तियार था कि वो अपनी बीवी से ये पूछे कि शादी से पहले उसके यौन संबंध थे या नहीं।

उसने कहा कि वो मुझे ताउम्र तलाक नहीं देगा। उसने मुझे सलाह दी कि मैं अपने फैसले के बारे में सावधानी से विचार करूं और अपने बागी तेवरों के बारे में दोबारा सोचूं क्योंकि इस कदम से मुझे बाद में अफसोस और पछतावा ही होगा।"

सोमैया कहती हैं, "हमारा समाज दोगला है। जहां मर्दों के तमाम महिलाओं से संबंध बनाने को अच्छा माना जाता है, उसकी तारीफ होती है वहीं, जब बात महिलाओं की आती है, तो ऐसे बर्ताव को समाज नकार देता है। कई बार इसकी सजा मौत के रूप में भी दी जाती है।"

सोमैया कहती हैं, "मेरा पूर्व पति ऐसा ही इंसान था। वो अपने दोस्तों को तो ये बातें बढ़-चढ़ कर बताता था कि उसने कई महिलाओं से संबंध बनाए लेकिन, मैंने एक मजाक भी किया तो वो गुस्से से उबल पड़ता था।" सोमैया के परिवार ने भी इब्राहिम से तलाक लेने में उसकी मदद से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि वो जिस बात को इतना बड़ा मसला बना रही हैं, वो मामूली और दरकिनार की जाने वाली बात है। इसके बाद सोमैया ने सीरिया छोड़ दिया और यूरोप चली गईं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जुमना, उम्र-45 बरस
जुमना ने अपनी जिंदगी का पेशतर हिस्सा सीरिया के अलेप्पो शहर के अलबाब मुहल्ले में बिताया था। 2016 में वो रहने के लिए बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स आ गई थीं। जुमना ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने शौहर से तलाक लेने के लिए 20 बरस तक इंतजार किया था।

वो बताती है, "मैं उस वक्त केवल 19 साल की थी जब मेरे अब्बा ने मेरी शादी मेरे चचेरे भाई से तय कर दी। मेरी इस शादी में कतई दिलचस्पी नहीं थी। मैं उसे पसंद नहीं करती थी। मैं पढ़ना चाहती थी। लेकिन, मेरे परिवार ने मुझ पर दबाव बनाया कि वो ही मेरे लिए सबसे सही शौहर है और धीरे-धीरे मैं उसे पसंद करने लगूंगी। बाद में प्यार हो ही जाएगा।"

बहुत से रुढ़िवादी परिवारों में, ख़ासतौर से ग्रामीण इलाकों में, दूल्हे और दुल्हन के बुजुर्ग रिश्तेदार (फिर चाहे वो महिलाएं हों या मर्द) नए शादीशुदा जोड़े के घर में लड़की के कौमार्य की तस्दीक होने का इंतजार करते हैं।

जुमना को अपनी सुहागरात का वाकिया अच्छी तरह से याद है। वो उसके बारे में बहुत तकलीफ के साथ इस तरह बात करती हैं, जैसे वो अभी कल की ही बात हो।

जुमना कहती हैं, "मेरे पति ने दरवाजा बंद किया और कहा कि हमें जल्दी करनी चाहिए, क्योंकि परिवार के बुजुर्ग वर्जिनिटी के सबूत के लिए हमारा इंतजार कर रहे हैं।"

जुमना बताती हैं, "मुझे वो बहुत ही खराब लगा था। मेरे शौहर ने मुझसे एक मिनट बात तक नहीं की। उसे इस बात की परवाह ही नहीं थी। वो तो बस अपना काम पूरा करने में जुट गया, जबकि मैं डर और घिन से कांप रही थी।" वो कहती हैं, "शारीरिक तकलीफ़ और जज्बाती तनाव के बावजूद, मेरे शौहर को फिक्र थी तो खून के कुछ धब्बों की।"

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
शर्मिंदगी
जुमना बताती हैं, "उस रात मुझे खून नहीं निकला और तब मेरे पति ने रात के सन्नाटे को चीरने वाली चीख के साथ कहा कि खून नहीं निकला। उसने मुझे इतनी भद्दी-भद्दी गालियां दी, जो मैं अपनी जुबान से निकाल भी नहीं सकती। उसकी आंखें अंगारों की तरह दहक रही थीं, जो मुझे किसी भी वक्त खाक कर सकती थीं।"

करीब एक घंटे तक जुमना भयंकर सदमे में थीं। उनकी जुबान से एक भी लफ्ज नहीं निकला। उन्होंने सुबह तक भी इंतजार नहीं किया और उनका कौमार्य परीक्षण करने के लिए उसी रात एक डॉक्टर के पास गए, जो उनके कुंवारी होने की तस्दीक कर सके। जुमना बताती हैं, "मुझे याद है कि वो डॉक्टर मुझे इस तरह सांत्वना दे रहा था,जैसे वो मेरा पिता हो। वो मेरे पति को उसकी करतूत के लिए फटकार लगा रहा था।"

जुमना को अगले कई सालों तक अपने उस शौहर के साथ रहना पड़ा, जिसने उसे सबके सामने जलील किया था। क्योंकि न जुमना का परिवार और न ही उनके आस-पास के लोग, तलाक के लिए उनका साथ देने को तैयार हुए। न तो उस रात किसी ने जुमना का समर्थन किया और न ही अगले बीस साल की शादीशुदा जिंदगी के दौरान।

20 साल और चार बच्चे होने के बाद भी जुमना उस जलालत को भूल नहीं पाई हैं। जैसे ही वो अपने बच्चों के साथ ब्रसेल्स पहुंची, उन्होंने अपनी शादी पर पूर्ण विराम लगा दिया ताकि वो अपने शौहर और उस समाज से बदला ले सके, जिसने उन्हें नीचा दिखाया था।

जुमना कहती हैं कि ब्रसेल्स की जिंदगी उन्हें और उनके बच्चों के लिए बेहतर है। अब वो दोबारा शादी नहीं करना चाहतीं। इसके बजाय वो अपनी पढ़ाई का सपना पूरा करना चाहती हैं, जिससे उन्हें पहले महरूम कर दिया गया था। वो अपने बच्चों को वैसी तरबीयत देना चाहती हैं, जो खुद उन्हें नहीं मिल सकी।

जुमना बताती हैं, "मैं अब खुश हूं, क्योंकि मैं अपनी दो बेटियों को भी अपने साथ यहां ला सकी। मैंने अपने शौहर को सिर्फ तलाक नहीं दिया। मैंने उस मआशरे को भी अलविदा कह दिया, जिसने मेरे साथ इंसाफ नहीं किया।"

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रोजाना और अमीना: हाइमेन की मरम्मत की सर्जरी
एक अन्य महिला रोजाना बताती हैं कि आखिर वो क्यों पांच साल बाद अपने मंगेतर से अलग हुईं। रोजाना कहती हैं, "मैं उस पर भरोसा करती थी और उससे बहुत प्यार करती थी। हमारी तमाम मुलाकातों के दौरान एक बार उसने मुझसे सेक्स करने के लिए जिद की।

तकनीकी तौर पर तो मैं उसे अपना पति ही मानती थी, तो मैं उसकी जिद के आगे झुक गई और हमने संबंध बनाए।" छह महीने बाद रोजाना और उसके मंगेतर के परिवार के बीच भयंकर झगड़ा हो गया। इसके बाद तब और कयामत आ गई, जब खुद रोजाना और उसके मंगेतर अलग हुए।

वो बताती हैं, "हमारे समाज में कौमार्य गंवाने पर क्या सजा होगी इस पर कोई बहस ही नहीं है। इसकी सजा सिर्फ मौत होती है।" रोजाना ने कहा, "ख़ुशकिस्मती से उनकी दोस्त उनके साथ थीं। उन्होंने मुझे चुपके से किसी महिला डॉक्टर से मिलने की सलाह दी और कहा कि मैं सर्जरी कर के बिल्कुल नई चाइनीज हाइमेन लगवा लूं। उस छोटी-सी सर्जरी के बगैर मैं कब की मर चुकी होती।"

इसी तरह अमीना के साथ बचपन में एक हादसा हुआ था, वो बाथरूम की सीढ़ियों पर गिर पड़ी थीं और उन्हें थोड़ा खून निकला था। अमीना एक रूढ़िवादी और काफी गरीब परिवार से आती हैं। उन्हें उस वक्त एहसास नहीं हुआ कि क्या हुआ है, लेकिन अमीना ने ये बात अपनी मां को बताई। मां, अमीना को फौरन एक महिला डॉक्टर के पास ले कर गईं। जांच में पता चला कि अमीना का हाइमेन फट गया है।

अमीना बताती हैं, "वो दिन मेरी मां के लिए बहुत तकलीफ भरा था उन्हें सूझ ही नहीं रहा था कि क्या करें। मेरी तीन खालाओं से मशविरे के बाद एक डॉक्टर से हाइमेन की सर्जरी करने का समय लिया गया। ऐसे ऑपरेशन बहुत चोरी से किए जाते हैं, क्योंकि हमारे देश में ये गैर कानूनी हैं। फिर चूंकि ज्यादातर लोगों को इस बात पर यकीन नहीं होता कि मेरी योनि की झिल्ली गिर जाने की वजह से फटी है, तो वो लोग मेरी वर्जिनिटी पर ताजिंदगी सवाल उठाते।"
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वर्जिनिटी टेस्ट
कई अरब और मुस्लिम देशों में बहुत-सी महिलाओं को शादी से पहले वर्जिनिटी टेस्ट से गुजरना पड़ता है। इसके बाद ही होने वाली दुल्हन को कुंवारी होने का तमगा मिलता है।

ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने इंडोनेशिया और अन्य अरब और मुस्लिम देशों में होने वाले इस तकलीफदेह 'वर्जिनिटी टेस्ट' की कड़ी निंदा की थी। ऐसे देशों में आम तौर पर बुजुर्ग महिलाओं को इसकी जिम्मेदारी दी जाती है कि वो होने वाली दुल्हनों की योनि में दो उंगलियां डाल कर ये पता लगाएं कि उनकी योनि की झिल्ली महफूज है या नहीं।

ये रिवाज मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देशों में बहुत आम है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने 2014 में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में इसे लैंगिक हिंसा का एक रूप करार दिया था, जो महिलाओं के प्रति अमानवीय भेदभाव और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

बीबीसी के एक अध्ययन के मुताबिक भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, मिस्र, जॉर्डन, लीबिया, मोरक्को और दूसरे अरब देशों के साथ दक्षिण अफ्रीका, जैसे देश वर्जिनिटी टेस्ट में सबसे आगे हैं।

ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक मिस्र, मोरक्को, जॉर्डन और लीबिया में कौमार्य परीक्षण बहुत ज्यादा आम है। एचआरडब्ल्यू की रिपोर्ट के जवाब में मोरक्को और मिस्र ने ऐसे दावों से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दोहराया कि ऐसे रिवाज पूरी तरह से गैरकानूनी हैं, और ये चोरी-छुपे अवैध तरीके से किए जाते हैं।

नोट- पहचान गुप्त रखने के लिए इस स्टोरी में शामिल किए गए चारों नाम महिलाओं के अनुरोध पर बदल दिए गए हैं।
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