फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदी दिवस 2021: जितनी आप सोचते हैं, उतनी भी कठिन नहीं है हिंदी, बस इन बातों का रखें ध्यान

Tue, 14 Sep 2021 05:56 PM IST
Abhilash Srivastava लाइफ स्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
हिंदी दिवस 2021 - फोटो : pixabay
भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा भले ही न प्राप्त हो, लेकिन आधे से ज्यादा देश को इसी भाषा ने जोड़ रखा है। देश के कई हिस्सों में हिंदी मातृभाषा है तो बाकी जगह कार्यभाषा है। यूं शासकीय स्तर पर ऑफिशियल लैंग्वेज का दर्जा हिंदी को दिया गया है लेकिन असल में हिंदी जन-जन की भाषा है क्योंकि हिंदी का जो स्वरूप आमतौर पर अपनाया जाता है उसमें कई सारी भाषाओं और बोलियों की मिठास मिली हुई है। और असल में हिंदी के इसी स्वरूप को अपनाने की जरूरत भी है। जानिए कैसे कुछ सामान्य बातों को समझकर आप आसानी से हिंदी को अपना सकते हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
हिंदी दिवस 2021 - फोटो : iStock
जैसा बोलें-वैसा लिखें
ये हिंदी का सबसे बड़ा गुण है। आप हिंदी को जैसे बोलेंगे वैसे ही उसको लिख सकते हैं। अब यहां गड़बड़ इसलिए होती है क्योंकि हमारे यहां प्रांतीय स्तर पर अलग भाषाओं और बोलियों का असर हिंदी पर हो जाता है। इसी वजह से बोली गई हिंदी जब लिखी जाती है तो गड़बड़ हो जाती है। जैसे बांग्ला में पानी को भी खाने का अनुरोध किया जाता है और चाय को भी। इसी तरह दक्षिण भारतीय भाषाओं में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग के लिए जिन शब्दों का प्रयोग होता है उसे हिंदी में बदलते समय वे असमंजस में आ जाते हैं। यदि आप सही हिंदी लिखना चाहते हैं तो सिर्फ सही हिंदी बोलने पर ध्यान केंद्रित करें।
विज्ञापन

3 of 5
हिंदी है बेहद आसान - फोटो : Pixabay
हिंदी की बिंदी
ये सामान्य गड़बड़ अक्सर लोग करते हैं। यहां तक कि जिन राज्यों में हिंदी ज्यादा बोली जाती है वहां भी ये गलती होती है। खासकर उन शब्दों को लिखते हुए जो अंग्रेजी के हैं। जैसे 'रोड' में बिंदी लगा देना और उसको 'रोड़' बना देना या 'मैं', 'में' और 'हैं' की बिंदी हटा देना। बिंदी लगाने का यह मामला भी बोलने पर ही निर्भर करता है। अगर आप बोलेंगे तो लिखेंगे भी वही। इसलिए लगातार सही बोलने की आदत डालें। इस तरह सही जगह बिंदी लगाने की आदत भी पड़ जाएगी। 

4 of 5
हिंदी में मात्राओं का महत्व - फोटो : iStock
मात्राओं का झोल
छोटी और बड़ी मात्राएं अक्सर लोगों को असमंजस में डालती हैं। हालांकि यहां भी बोलने के तरीके पर ही सबकुछ निर्भर करता है लेकिन इसको सुधारने के लिए बचपन से कोशिश की जा सकती है। जैसे कई डेयरी उत्पाद बेचने वाली जगह पर लिखा होता है 'यहां दुध मिलता है'। अब जरा रुक कर सोचिए कि क्या आप दूध बोलते हैं या दुध? यहां छोटी मात्रा लगनी चाहिए या बड़ी?  बस इसी तरह जब आप बच्चे को हिंदी पढ़ा रहे होते हैं तब उसे बड़ी मात्राओं पर जोर देकर पढ़ाएं और छोटी मात्राओं पर कम जोर देते हुए। इससे हमेशा उसकी आदत रहेगी कि वह मात्रा का सही उपयोग करे।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
हिंदी पर गर्व करें - फोटो : Pixabay
अपनी भाषा पर गर्व करें
ये सबसे महत्वपूर्ण बात है। हिंदी कैसी बोलनी है, सही होगी या नहीं, लोग हिंदी बोलने पर मजाक तो नहीं उड़ाएंगे, ये सब बातें दिमाग से निकाल दें। अंग्रेजी बोलने के समय भी तो कई लोगों से गलतियां होती हैं। फिर भी लोग बोलने की कोशिश करते हैं। फिर हिंदी बोलने में हिचक कैसीय़ कोशिश करें कि जैसी भी हिंदी आपको आती है उसमें गर्व से बात करें। हिचकें या शर्माएं नहीं। किसी भी देश की भाषा उसकी पहचान होती है। इसलिए हिंदी बोलें, मन से बोलें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें