फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lungs Problem: फेफड़ों की बीमारियों का संकेत हो सकते हैं ऐसे छोटे-छोटे लक्षण, बिल्कुल न करें इन्हें अनदेखा

Mon, 16 Sep 2024 07:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
फेफड़ों की बीमारी - फोटो : istock
शरीर के सभी अंगों को ठीक से काम करते रहने के लिए नियमित रूप से ऑक्सीजन युक्त रक्त की आवश्यकता होती है। बिना ऑक्सीजन के अंगों की कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने और ऑर्गन फेलियर का खतरा हो सकता है। सभी अंगों तक निरंतर ऑक्सीजन पहुंचता रहे, इसके लिए जरूरी है कि आपके फेफड़े स्वस्थ हों और ठीक तरीके से काम करते रहें।

फेफड़ों में होने वाली किसी भी तरह की दिक्कत संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई प्रकार के पर्यावरणीय और दिनचर्या में गड़बड़ी से संबंधित कारकों के चलते फेफड़ों की बीमारियां बढ़ रही हैं।

डॉक्टर कहते हैं,  फेफड़ों की बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं। कभी-कभी लोग सोचते हैं कि सांस लेने में तकलीफ होना सिर्फ बढ़ती उम्र के साथ होने वाली समस्या है। पर कम उम्र में भी आपको ये दिक्कतें हो सकती हैं। इस तरह के लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि ये फेफड़ों की बीमारी के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं।

फेफड़ों के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने और दुनियाभर में फेफड़ों की बेहतर देखभाल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 25 सितंबर को विश्व फेफड़ा दिवस (World Lung Day) मनाया जाता है। आइए उन शुरुआती संकेतों के बारे में जानते हैं जिनपर ध्यान देकर आप फेफड़ों की गंभीर समस्याओं से बचे रह सकते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
फेफड़ों की समस्याएं - फोटो : istock
फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं खतरनाक

आंकड़ों से पता चलता है कि फेफड़ों से संबंधित तमाम प्रकार की बीमारियों के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। क्रोनिक रेस्पिरेटरी डिजीज (सीआरडी) दुनियाभर में मौत का तीसरा प्रमुख कारण है, साल 2019 में लगभग 4 मिलियन (40 लाख) लोगों की इसके कारण मौत हो गई। बढ़ता वायु-प्रदूषण और धू्म्रपान की आदत को इन बीमारियों के लिए प्रमुख कारक माना जाता है। बच्चों को भी इस गंभीर समस्या का शिकार पाया जा रहा है।

आइए फेफड़ों की बीमारियों या सीआरडी के शुरुआती संकेतों के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन

3 of 5
अक्सर खांसी आने की समस्या - फोटो : istock
लंबे समय से खांसी बने रहने

अगर आपको आठ सप्ताह या उससे ज्यादा समय से खांसी है, तो इसे क्रोनिक कफ की दिक्कत माना जाता है। यह एक महत्वपूर्ण शुरुआती लक्षण है जो बताती है कि आपके श्वसन तंत्र में कुछ गड़बड़ है। अस्थमा,  क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी) हो या टीबी जैसी गंभीर श्वसन समस्या, इन सभी में खांसी होते रहना प्रमुख लक्षण रहा है। इसमें डॉक्टरी सलाह जरूरी है। 

इसके अलावा यदि आपको खांसी के साथ खून आने की दिक्कत हो रही है, तो इसे भी गंभीर स्वास्थ्य संकेत माना जाता है, जिसमें आपातकालीन चिकित्सा प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है। ऐसे लक्षणों को अनदेखा न करें।

4 of 5
सांस की तकलीफ - फोटो : istock
बिना किसी मेहनत के सांस फूलना

व्यायाम करने के बाद, लंबे समय तक वॉक करने या किसी मेहनत का काम करने के बाद सांस फूलना सामान्य है। हालांकि बहुत कम या बिना किसी मेहनत के सांस फूलना फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी का संकेत हो सकता है। इसके साथ आपको सांस लेने में तकलीफ या कठिनाई महसूस हो सकती है। इस तरह की दिक्कतें गंभीर श्वसन बीमारियों का संकेत मानी जाती हैं, जिनपर तुरंत ध्यान दिया जाना जरूरी हो जाता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
श्वसन की समस्याएं - फोटो : istock
बलगम बनना और घरघराहट होना

बलगम जिसे कफ भी कहा जाता है, ये संक्रमण या जलन के खिलाफ बचाव के रूप में वायुमार्ग द्वारा निर्मित सुरक्षाकवच है। यदि आपको कुछ दिनों से बहुत अधिक बलगम आ रहा है तो ये स्पष्ट संकेत है कि फेफड़ों या श्वसनमार्ग में कोई संक्रमण हो सकता है। संक्रमण के लक्षणों को अनदेखा करने से इसके फैलने का खतरा रहता है, इसलिए एक हफ्ते से अधिक बलगम-खांसी की दिक्कतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है।

इसके अलावा सांस लेने के दौरान अगर फेफड़ों से घरघराहट की आवाज आती है तो ये संकेत हो सकता है कि कुछ असामान्य आपके फेफड़ों के वायुमार्ग को अवरुद्ध कर रहा है। समय रहते इस तरह के लक्षणों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।



-------------
स्रोत और संदर्भ
Warning Signs of Lung Disease

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें