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World Heart Day 2023: एक नहीं हार्ट में हो सकती हैं कई तरह की बीमारियां, इनके बारे में जानते हैं आप?

Wed, 27 Sep 2023 01:35 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हृदय रोगों की समस्या - फोटो : Istock
कोरोना महामारी के बाद विश्वभर में हार्ट संबंधी बीमारियां तेजी से सामने आई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की डेटा की मानें तो 2020 में हृदय रोगों से दुनियाभर में 18.6 मिलियन लोगों की मौत हो गई, जो सभी मौतों का 32% है और यह आंकड़ा डराने वाला है। 

इधर भारत में बीते दो सालों में अचानक हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। खासतौर पर कम उम्र के बच्चे और अधिकांश युवा हार्ट संबंधी बीमारी का शिकार हुए हैं और देखने में आया है कि उनकी मृत्यु तक हुई है। भारत में आम धारणा के अंतर्गत हार्ट संबंधी बीमारियों को केवल हार्ट अटैक या फिर कार्डियक अरेस्ट तक ही सीमित करके देखा जाता है लेकिन हार्ट संबंधी बीमारियां केवल हृदय की गति का रुक जाना ही नहीं होता बल्कि ऐसी कई दूसरी समस्याएं भी होती हैं जिनका सीधा संबंधी हार्ट की सेहत से होता है।

ऐसी बीमारियों में रोगी को लक्षण महसूस होते हैं लेकिन उन्हें पता ही नहीं चल पाता है कि उन्हें हार्ट संबंधी बीमारी है और जब तक रोगी इलाज के लिए पहुंचे हार्ट को बहुत क्षति पहुंच सकती है। दरअसल, हृदय रोग केवल लाइफस्टाइल की ही नहीं बल्कि अन्य दूसरे पहलुओं से भी जुड़ी बीमारी है। 

बहरहाल, आइए जानते हैं हार्ट संबंधी ऐसी कौन सी बीमारियां हैं जिन पर सामान्य तौर हमारा ध्यान नहीं जाता और इसे हम केवल कॉलेस्ट्रॉल और लाइफस्टाइल से ही जोड़कर देखते हैं। आइए जानते हैं हार्ट की कुछ ऐसी ही बीमारियों के बारे में। 
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बैड कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : istock
धमनियों में कॉलेस्ट्रॉल जमाव की बीमारी

इसे Coronary Artery Disease  यानी की CAD कहा जाता है। यह बीमारी तेल, कॉलेस्ट्रॉल युक्त चीजें और गलत खान-पान व खराब लाइफस्टाइल के चलते होती है। ये बीमारी धमनियों, जिन्हें कोरोनरी धमनियां कहा जाता है जो दिल की धड़कन के पंप को सही रूप से रक्त पहुंचाने का काम करती है, उसमें बैड कॉलेस्ट्रॉल जमा होने के कारण होती है। सामान्य तौर पर हार्ट अटैक का कारण यही होता है। 


हार्ट फेलियर या दिल का काम करना बंद कर देना

इसे आसान शब्दों में Heart Failure कहा जाता है। हार्ट फेल्योर एक बीमारी है जिसमें हार्ट का पंप फंक्शन पहले धीमे-धीमे कमजोर हो जाता है और बाद में बंद हो जाता है जिससे शरीर के जरूरी हिस्सों में रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है इससे व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। 
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रक्तचाप की समस्या - फोटो : istock
हाइपरटेंशन (Hypertension)

हाइपरटेंशन इसे हाई ब्लड प्रेशर भी कहते हैं जिसके कारण भी हार्ट की फंक्शनिंग पर असर होता है। यह खतरनाक हो जाता है, क्योंकि यह कोरोनरी धमनियों को खराब करता है और हार्ट के जोड़ों को कमजोर कर देता है जिससे हार्ट को क्षति पहुंचती है और कई बार व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। 
 
इसके अलावा रैजमियोपैथी ऐसी बीमारी होती है, जिसमें हार्ट की धड़कन गति अनियमित हो सकती है। इसे दूसरे शब्दों में कहें तो हार्ट एक निश्चित समयावधि में उतनी बार नहीं धड़कता है जिसे नॉर्मल कहा जाता है। यह बीमारी गंभीर होती है और कई दूसरी समस्याओं का कारण बनती है। 

कोर पल्पिटेशन (Palpitations)

हार्ट की इस बीमारी में हार्ट की धड़कन बेहद तेज या असामान्य हो जाती है। कई बार रोगी को यह महसूस होता है उसकी हार्ट की गति बंद सी हो गई है। यह बीमारी कई बार दूसरी बीमारियों के साथ जुड़ती है। 

हार्ट की यह बीमारी वाल्व से जुड़ी होती है। हार्ट में दो वॉल्व होते हैं यदि उसमें से कोई एक खराब हो जाए या ठीक तरह से काम नही करे तो यह बीमारी होती है। इस बीमारी में धड़कन सही तरीके से काम नहीं करती है। 
 
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : istock
कोर पल्पिटेशन (Cardiomyopathy):

कोर पल्पिटेशन में हार्ट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसमें हार्ट की पंपिंग क्षमता कम हो जाती है जिससे हार्ट फेलियर का खतरा होता है। 

इसके अलावा एंजाइना पेक्टोरिस कहा जाता है। इस बीमारी में हार्ट को शरीर के हिस्सों में ब्लड पहुंचाने में कठिनाई होती है, जो आमतौर इस बात का संकेत करती है कि हार्ट को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। एंजाइना के लक्षण में छाती में दर्द, दबाव या असहजता होती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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