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WHO का यू टर्न: पहले कहा- बिना लक्षण वाले मरीज नहीं फैलाते कोरोना, फिर बोले- गलतफहमी थी

Fri, 12 Jun 2020 12:15 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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WHO Guidelines about Coronavirus - फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनिया के कई देशों में स्थिति गंभीर होती जा रही है। तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के पीछे दुनियाभर के कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीजों को भी बड़ा कारण माना, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस संबंध में अलग राय स्पष्ट की। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि बिना लक्षण वाले मरीज कोरोना नहीं फैलाते। इस पर कई विशेषज्ञों को आपत्ति भी हुई। अब दो दिन के अंदर डब्ल्यूएचओ ने अपनी राय पर यू-टर्न मारते हुए इसे गलतफहमी बताया और सफाई भी दी है।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि दुनियाभर में कोरोना संक्रमण फैलने का जो ट्रेंड है, उससे यही लग रहा कि एसिम्पटोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीजों से कोरोना वायरस नहीं फैलता। ऐसे मामले दुर्लभ ही हैं। लेकिन महज दो दिन के अंदर अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि यह एक गलतफहमी थी। डब्ल्यूएचओ की महामारी विशेषज्ञ डॉ. मारिया वेन ने अपने बयान पर यह सफाई दी।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
दुनियाभर के वैज्ञानिकों के सवाल उठाने के बाद डॉ. वेन ने यह सफाई दी। डब्ल्यूएचओ के तीन दिन में तीन बयानों से समझते हैं कि एसिम्पटोमैटिक मरीजों पर क्या राय रही: 
आठ जून:
  • दुनिया में जिस तरह कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं उसकी वजह ये एसिम्पटोमैटिक मरीज नहीं हैं। ऐसे मामले दुर्लभ हैं। खासकर युवाओं और दूसरे स्वस्थ लोगों में इस संक्रमण के लक्षण या तो नजर नहीं आते या बहुत हल्के लक्षण नजर आते हैं। फिलहाल हमारा ध्यान केवल लक्षण वाले मरीजों पर है। 
: डॉ. मारिया वेन, महामारी विशेषज्ञ, डब्ल्यूएचओ  

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कोरोना संक्रमण का दौर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pexels
नौ जून: 
  • मैंने 'बेहद दुर्लभ' शब्द का इस्तेमाल किया था। वह एक गलतफहमी थी। फिलहाल हमारे पास इसका कोई जवाब नहीं है। उस समय मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों का जवाब दे रही थी। मैं जो समझ पा रही थी, वही बताने की कोशिश कर रही थी। मैंने उस वक्त जो कहा, वह हाल में सामने आई रिसर्च और स्टडी के आधार पर कहा था। 
: डॉ. मारिया वेन, महामारी विशेषज्ञ, डब्ल्यूएचओ  
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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
10 जून: 
  • एसिम्प्टोमैटिक मरीजों के मामले पर अभी और रिसर्च किए जाने की जरूरत है। यह नया वायरस है। विश्व स्वास्थ्य संगठन निरंतर इस संबंध में कुछ न कुछ नया सीख रहा है। इस वायरस से जुड़ी जटिल चीजों को समझना बहुत आसान नहीं है लेकिन यह हमारी जिम्मेदारी और जवाबदेही है। 
: जनरल टेड्रोस अधानोम, डब्ल्यूएचओ प्रमुख
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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुरू में तीन तरह के मरीजों से कोरोना संक्रमण फैलने की संभावनाएं बताई थी: 
  • सिम्प्टोमैटिक- वे मरीज, जिनमें कोरोना के लक्षण देखने को मिले और फिर उनसे दूसरों में फैले।
  • प्री सिम्प्टोमैटिक- वायरस के संक्रणम फैलाने और लक्षण दिखने के बीच भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। इसकी समय सीमा, वायरस का इंक्यूबेशन पीरियड यानी 14 दिन की होती है। इनमें सीधे तौर पर कोरोना के लक्षण नहीं दिखते। लेकिन हल्का बुखार, बदन दर्द जैसे लक्षण शुरुआत में दिखते हैं। 
  • एसिम्प्टोमैटिक- जिनमें किसी तरह के लक्षण नहीं होते लेकिन वो कोरोना पॉजिटिव होते हैं और संक्रमण फैला सकते है। इसी को लेकर पिछले दिनों से बहस चल रही है।
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कोरोना की जांच के लिए नमूने एकत्र करते स्वास्थ्य कर्मी(File Photo) - फोटो : PTI
कोरोना का संक्रमण मूलत: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है
  • किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने के दौरान उनके ड्रॉपलेट्स के जरिए इसका संक्रमण फैलता है। ये ड्रॉपलेट्स अगर किसी सतह पर लगे हों तो उससे भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। ऐसे में यह भी हो सकता है कि संक्रमित व्यक्ति में लक्षण न भी दिखें। डब्ल्यूएचओ की महामारी विशेषज्ञ डॉ. मारिया वेन भी ऐसा मानती हैं, लेकिन उन्होंने सोमवार को यह भी कहा कि दुनियाभर में जिस तरह मामले बढ़ रहे हैं उसकी वजह ये एसिम्प्टोमैटिक मरीज नहीं हैं।

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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • डॉ. मारिया वेन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि डब्ल्यूएचओ के पास अबतक का जो आंकड़ा है, वह यही स्पष्ट करता है कि बिना लक्षण वाले मरीजों से कोरोना संक्रमण फैलने के मामले दुर्लभ हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा था कि सरकारों को अपना लक्ष्य संक्रमितों का पता लगाने और उन्हें आइसोलेट मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों पर भी नजर रखने की जरूरत है। 

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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • डॉ. मारिया वेन के बयान के बाद डब्ल्यूएचओ की आलोचना भी होने लगी। अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फौसी के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ की राय गलत थी। संगठन को अपना बयान बदलना पड़ा, क्योंकि उसके पास अपनी बात साबित करने के प्रमाण ही हीं थे। डॉ. एंथनी ने कहा कि हमारे पास ऐसे प्रमाण हैं कि कोरोना के कुल मरीजों में 25 से 45 फीसदी ऐसे मरीज हैं, जिनमें लक्षण नहीं दिखते हैं और ये स्वस्थ लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। 

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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • लक्षण वाले मरीजों से तो लोग परहेज कर सकते हैं और अपना बचाव कर सकते हैं। लेकिन जिनमें लक्षण ही न दिखें तो उनकी कोरोना जांच के अलावा दूसरा कोई विकल्प ही नहीं होता। पिछले दिनों दिल्ली के एक मामले में घर के एक बुजुर्ग कोरोना से पीड़ित थे, लेकिन उनमें लक्षण नहीं दिखे थे। उनसे परिवार के एक युवा में संक्रमण फैला तो लक्षण दिखते ही पूरे परिवार की जांच कराई गई और फिर पता चला कि घर के अन्य सदस्य भी कोरोना संक्रमित हैं। 
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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • यह स्पष्ट है कि एसिम्प्टोमैटिक मरीजों से संक्रमण फैल सकता है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के महामारी रोग विशेषज्ञ प्रो. लियाम स्मिथ के मुताबिक, विज्ञान को लेकर यह बात मेरी समझ के विपरीत है। ऐसे मरीज जिनमें लक्षण नहीं दिखते उनसे भी दूसरों में संक्रमण फैल सकता है। इसलिए लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। 
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