प्रतीकात्मक तस्वीर
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फाइब्रॉयड की जांच और उपचार
फाइब्रॉयड के गांठों की पहचान एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और सीटीस्कैन के जरिये किया जा सकता है। इसके बाद इनके आकार और स्थिति को ध्यान में रखकर उपचार किया जाता है। अगर इसकी वजह से मरीज को किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं हो रही है तो सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। मेनोपॉज के बाद ये गांठें अपने आप धीरे-धीरे सिकुड़ कर खत्म हो जाती हैं।
वहीं पेल्विक एरिया में तेज दर्द और हेवी ब्लीडिंग जैसे लक्षण नजर आने पर हीट्रोस्कोपी, मेयोमेक्टोमी और हेस्ट्रोकॉमी जैसी तकनीकों से इसकी सर्जरी की जाती है। इसकी सर्जरी मरीज के उम्र पर भी निर्भर करती है। कम उम्र के मरीजों का लेप्रोस्कोपी या ओपन सर्जरी से ही उपचार किया जा सकता है।