हवा में अशुद्धि और वातावरणीय प्रदूषण कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। महामारी के इस दौर में कई अध्ययनों में कोरोना वायरस के भी हवा के माध्यम से भी प्रसारित होने का दावा किया गया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का संक्रमण उन स्थानों पर अधिक हो सकता है जहां पर अच्छे वेंटिलेशन की कमी है। इसके अलावा कॉमन कोल्ड, चेचक और टीबी जैसी बीमारियों को भी एयरबोर्न माना जाता है। मतलब, हवा की अशुद्धियों को कम करके कई तरह की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रहा जा सकता है। इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए देश के कुछ संस्थानों ने मिलकर वायु स्वच्छता प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम करने की शुरुआत की है।
रिपोर्टस के मुताबिक आईआईटी मद्रास, वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी चेन्नई और लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कोरोनोवायरस और टीबी के संक्रमण को रोकने के लिए वायु स्वच्छता प्रणाली विकसित करने के लिए हाथ मिलाया है। यूके का रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (आरएईएनजी) इस परियोजना का मुख्य प्रायोजक होगा। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिक जिस प्रणाली को विकसित करने की दिशा में काम करने जा रहे हैं, वह आज के समय में क्यों आवश्यक है?