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डॉक्टर की बच्चों को लेकर चेतावनी: इन लक्षणों पर रहेंं अलर्ट, वरना बच्चों को बीपी-शुगर का खतरा

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. L.K. Garg

डॉ. एल. के. गर्ग
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ 
आगरा 


कोरोना महामारी के आने के बाद एक चीज जो बहुत तेजी से लोगों के दिमाग में बैठी है, वह है इम्यूनिटी। इसलिए लोग कुछ भी करने को तैयार हैं। प्रोटीन पावडर से लेकर विटामिन सप्लीमेंट्स तक सब कुछ बिना जानकारी, बिना डॉक्टर की सलाह के धड़ल्ले से खाए जा रहे हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह सप्लीमेंट्स बच्चों को भी दिए जा रहे हैं। क्या सच में बच्चों को इनकी जरूरत है?

दरअसल, कोरोना के पहले से ही हमारे देश मे बच्चों के रूटीन में बहुत फर्क आ चुका है। फिजिकल एक्टिविटीज (शारीरिक गतिविधियां) की जगह वर्चुअल गेम्स ने ले ली है।

बच्चे होमवर्क और मोबाइल में ही सारा दिन खत्म कर देते हैं। इसके कारण ही मोटापा, डायबिटीज और यहां तक कि कम उम्र में हाई बीपी जैसी समस्याएं भी बच्चों को शिकार बना रही हैं। कोरोना महामारी के आने के बाद समस्या और भी बढ़ गई है। ज्यादातर बच्चे घरों में बंद हैं। ताजी हवा का मिलना और फिजिकल एक्टिविटी लगभग बंद हो चुकी हैं। ऊपर से ऑनलाइन एक्टिविटीज बढ़ गई हैं। अभी मेरे पास ज्यादातर बच्चे पेट के रोग, सिरदर्द, मोटापा आदि के इलाज के लिए आ रहे हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

प्राकृतिक है सबसे बेहतर 

  • बच्चों को प्रकृति ने इस तरह से बनाया है कि उनके शरीर को जो पोषक तत्त्व चाहिए, वह सामान्य भोजन और प्राकृतिक साधनों से ही मिल सकते हैं। बशर्ते बच्चे को कोई बीमारी या डिफिशिएंसी न हो। जन्म के छह माह बाद से आप बच्चे को घर का सामान्य भोजन पीसकर या मिक्सी में निकालकर खिला सकते हैं। इसके साथ ही जन्म से उसे मिलने वाला मां के दूध का पोषण भी उसकी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है।  इसके बाद दो साल की उम्र के बाद बच्चे को घर में सबके साथ बैठाकर खाना खिलाएं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

दिनभर में हों चार मील 

  • मैं हमेशा पैरेंट्स को यह सलाह देता हूं कि बच्चे को दिनभर में चार बार का खाना-नाश्ता मिलना ही चाहिए। इसमें ब्रेकफास्ट, लंच, शाम का नाश्ता और फिर डिनर शामिल हैं। इसमें अभी सब्जियां, फल, सूखे मेवे, अनाज शामिल होना ही चहिए। बाहर का खाना कम से कम दें। दही, दूध, पनीर, मूंगफली, गुड़, खजूर, आदि बच्चों की डाइट में जरूर शामिल करें। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में बच्चे को पानी पीने की आदत डालें। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

फिजिकल एक्टिविटी का डोज 

  • डाइट के अलावा जो चीज बच्चे की इम्यूनिटी को बरकार रखने और बढ़ाने में मदद कर सकती है, वह है फिजिकल एक्टिविटी। खासकर कोरोना काल में जब बच्चे अपना ज्यादा समय टीवी, कम्प्यूटर या मोबाइल पर बिता रहे हैं। यह जरूरी हो जाता है कि बच्चा खूब खेलें-कूदें। बच्चे के मन से कोरोना का डर निकालें और उसे मास्क लगाकर साइकिलिंग, दौड़ना आदि जैसी एक्टिविटीज करने दें। उसे बताएं कि खेलने के बाद या किसी भी बाहरी चीज को छूने के बाद उसे हाथ धोना है और मास्क को पहने रहना है। इतनी एहतियात काफी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

डॉक्टर से जरूर पूछें 

  • अगर आपके बच्चे को किसी बीमारी या अन्य शारीरिक अवस्था की वजह से किसी पोषक तत्व की कमी है तो डॉक्टर से राय लेकर उसे सप्लीमेंट्स दे सकते हैं। लेकिन यहां भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि सप्लीमेंट्स एक समय सीमा, जो भी डॉक्टर ने बताई है, उससे ज्यादा न दिए जाएं। सप्लीमेंट्स की मात्रा भी कभी भी अपने मन से घटाएं-बढ़ाएं नहीं। यह हमेशा याद रखिए कि बच्चे का शरीर लगातार विकास कर रहा होता है। ऐसे में उसके शरीर पर हर चीज का असर उसी गति से होता है। सप्लीमेंट्स की अधिकता से बच्चे के शरीर को उल्टा नुकसान भी हो सकता है। इसलिए बेवजह सप्लीमेंट्स देने से बचें। 
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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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