Medically Reviewed by Dr. L.K. Garg
डॉ. एल. के. गर्ग
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ
आगरा
कोरोना महामारी के आने के बाद एक चीज जो बहुत तेजी से लोगों के दिमाग में बैठी है, वह है इम्यूनिटी। इसलिए लोग कुछ भी करने को तैयार हैं। प्रोटीन पावडर से लेकर विटामिन सप्लीमेंट्स तक सब कुछ बिना जानकारी, बिना डॉक्टर की सलाह के धड़ल्ले से खाए जा रहे हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह सप्लीमेंट्स बच्चों को भी दिए जा रहे हैं। क्या सच में बच्चों को इनकी जरूरत है?
दरअसल, कोरोना के पहले से ही हमारे देश मे बच्चों के रूटीन में बहुत फर्क आ चुका है। फिजिकल एक्टिविटीज (शारीरिक गतिविधियां) की जगह वर्चुअल गेम्स ने ले ली है।
बच्चे होमवर्क और मोबाइल में ही सारा दिन खत्म कर देते हैं। इसके कारण ही मोटापा, डायबिटीज और यहां तक कि कम उम्र में हाई बीपी जैसी समस्याएं भी बच्चों को शिकार बना रही हैं। कोरोना महामारी के आने के बाद समस्या और भी बढ़ गई है। ज्यादातर बच्चे घरों में बंद हैं। ताजी हवा का मिलना और फिजिकल एक्टिविटी लगभग बंद हो चुकी हैं। ऊपर से ऑनलाइन एक्टिविटीज बढ़ गई हैं। अभी मेरे पास ज्यादातर बच्चे पेट के रोग, सिरदर्द, मोटापा आदि के इलाज के लिए आ रहे हैं।