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Coronavirus: बाहर की अपेक्षा घर के लोगों से कोरोना का ज्यादा खतरा, 10 में से एक संक्रमण ऐसे ही फैला

Wed, 22 Jul 2020 04:15 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Risk - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण दुनियाभर के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। हर दिन इससे संक्रमित होने वालों की संख्या बढ़ रही है और इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा भी हर दिन बढ़ रहा है। अब अमेरिका की शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन ने चिंता बढ़ा दी है। इस अध्ययन में कहा गया है कि बाहर की बजाय घर के सदस्यों से कोरोना संक्रमण ज्यादा खतरा है। इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि 10 में से एक को अपने ही परिवार के सदस्यों से संक्रमण हुआ। 
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Coronavirus - फोटो : iStock
  • दक्षिण कोरियाई महामारी विशेषज्ञों ने पाया है कि लोगों में बाहर की जगह अपने घर के सदस्यों से संपर्क में आने से कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक है। बीते 16 जुलाई को सीडीसी में प्रकाशित एक अध्ययन में करीब 5,700 इंडेक्स मरीजों पर विस्तार से यह देखा गया, जो कोरोना पॉजिटिव थे और करीब 59,000 से अधिक लोग जो उनके संपर्क में आए थे।  
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बुजुर्ग भी कोरोना संक्रमण से ज्यादा प्रभावित हैं (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक, संक्रमण के बढ़ते मामलों में उम्र मायने रखती है। घर में अगर कोरोना का पहला मामला किशोरों में या 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में सामने आता है तो संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। साउथ कोरिया के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन केनिदेशक जियॉन्ग यून-केयॉन्ग के मुताबिक, इन उम्र वर्ग के लोगों से परिवार के सदस्यों का संपर्क अधिक होता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • दूसरी ओर कोरिया सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (KCDC) के निदेशक जियोंग यूं-क्यॉन्ग के मुताबिक, यह परिणाम संभवत: इसलिए आया है क्योंकि 60 से 70 आयुवर्ग के सदस्यों के नजदीकी संपर्क में होने की संभावना है और इस समूह को सुरक्षा की अधिक आवश्यकता है।
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कोरोना संक्रमित (File Photo) - फोटो : पेक्सेल्स
  • हैलिम यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन में सहायक प्रोफेसर और इस अध्ययन के सहभागी शोधकर्ता डॉ. चोए यंग-जून ने कहा कि नौ वर्ष और उससे कम आयु के बच्चों के इस इंडेक्स का हिस्सा होने की संभावना कम थी। कारण कि 20 से 29 वर्ष के 1,695 युवाओं की तुलना में नौ वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या(29) काफी कम थी, जो कि काफी छोटा नमूना है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • वयस्कों के मुकाबले 9 साल या इससे कम उम्र के बच्चों में खतरा कम है। इनमें ज्यादातर कोरोना के एसिम्प्टोमैटिक मामले सामने आने का खतरा है। डॉ. चोए यंग-जून ने कहा कि बच्चों के वायरस संक्रमण फैलाने की संभावना कम हो सकती है, लेकिन अध्ययन की परिकल्पना को सही साबित करने के लिए हमारा डाटा पर्याप्त है। 
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कोरोना वायरस संक्रमण - फोटो : Pixabay
  • मालूम हो कि इस अध्ययन के लिए 20 जनवरी से 27 मार्च के बीच का डाटा लिया गया था। यह वही दौर था, जब कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा था। खासकर दक्षिण कोरिया में हर दिन कोरोना संक्रमण के ज्यादा मामले सामने आ रहे थे, यानी वहां कोरोना संक्रमण अपने चरम पर था। मालूम हो कि बीते सोमवार को केसीडीसी ने 45 नए मामलों की पुष्टि की है और इसी के साथ वहां संक्रमितों का आंकड़ा 13 हजार 800 पार कर चुका है, जबकि 295 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 
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